ID SENT ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0001 Link-1 ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0003 कृषि क्षेत्र में जल संकट से निपटने के लिए सस्ता सौर ऊर्जा चालित बैटरी आधारित स्प्रेयर ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0005 जल एक अनमोल संसाधन है और जल की कमी पूरे राष्ट्र पर भारी पड़ रही है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0006 सिंचाई में लगभग 70% जल की खपत करने वाली कृषि क्षेत्र इस संकट के कारण अर्थव्यवस्था का सबसे कमजोर क्षेत्र बन गया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0007 इस मुद्दे के समाधान के लिए लगभग प्रत्येक भूमि क्षेत्र में सौर पंप को लागू करने पर चर्चा हुई है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0009 जल की खपत को कम करना ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0011 सौर पंपों के अलावा, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीएमईआरआई) सिंचाई के लिए आवश्यक जल की खपत को कम करने के तरीकों पर कार्य कर रहा है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0012 शुरुआत में, ड्रिप सिंचाई पद्धित पर विचार किया गया था, लेकिन बाद में यह महसूस किया गया कि ड्रिप सिंचाई पद्धति छोटे किसानों से लेकर सीमांत किसानों तक के लिए सस्ता नहीं है, जिनकी भारतीय कृषि परिदृश्य में प्रमुख हिस्सेदारी हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0013 ये किसान कुछ हजार रुपये की लागत वाले हाथ से चलने वाले छिड़काव यंत्र (मैनुअल स्प्रेयर्स) का उपयोग करते हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0015 छिड़काव करने वाला यंत्र - वर्तमान स्थिति ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0017 उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कीटनाशक फसल की उत्पादकता बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन उपयुक्त मशीनरी की कमी के कारण बड़ी मात्रा में कीटनाशक स्प्रे बर्बाद हो जाता है और मृदा, जल तथा वायु प्रदूषित हो जाता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0018 कीटनाशकों के ऐसे हानिकारक प्रभावों के कारण, उनके उपयोग को कम करने और उनके छिड़काव को अधिक कुशल बनाने के लिए दबाव बढ़ रहा है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0019 कुशल छिड़काव करने वाला यंत्र बनाने के लिए सतह के फैलाव, दलदलापन या श्यानता, भारता, वायु का प्रवाह, गतिशील दबाव, कण का आकार आदि के विज्ञान को समझने की आवश्यकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0021 बैटरी द्वारा संचालित छिड़काव प्रणाली ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0023 सीएसआईआर-सीएमईआरआई ने एक “सीमांत किसानों” और दूसरा “छोटे किसानोम” के लिए बैटरी द्वारा संचालित दो प्रकार की छिड़काव प्रणाली विकसित की है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0024 5 लीटर की क्षमता वाला बैक पैक स्प्रेयर (पीठ पर रखकर छिड़काव करने वाला यंत्र), "सीमांत किसानों" के लिए बनाया गया है, जबकि 10 लीटर की क्षमता वाला कॉम्पैक्ट ट्रॉली स्प्रेयर "छोटे किसानों" के लिए बनाया गया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0025 ये छिड़काव करने वाला यंत्र दो अलग-अलग टैंकों, प्रवाह नियंत्रण और दबाव नियंत्रक से युक्त होते हैं, ताकि फसलों को जल की विभिन्न आवश्यकताओं, लक्षित/स्थान विशिष्ट सिंचाई, कीटों को नियंत्रित करने के लिए कीटनाशक/फफूंदीनाशक का उचित उपयोग बनाए रखना, पत्तियों की सतह पर जल आधारित सूक्ष्म खुरदरापन पैदा करना, छोटे क्षेत्र की सीमा में मृदा की नमी का स्तर बनाए रखना और खरपतवार नियंत्रण किया जा सके। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0026 यह प्रणाली सौर-क्षमता आधारित बैटरियों पर कार्य करता है, इस प्रकार यह राष्ट्र के ऊर्जा और विद्युत से वंचित कृषि क्षेत्रों में भी उपयोग को सक्षम बनाता है, इस प्रकार यह मूल्य आधारित वाष्पशील जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0027 ये छिड़काव वाले यंत्र (स्प्रेयर) विकसित करने में सरल और सीखने तथा लागू करने में आसान हैंइसलिए भारतीय किसानों के सामने आने वाले जल संकट को दूर करने में मददगार साबित होंगे। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0029 कार्यविधि ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0031 छिड़काव करने वाले यंत्रों (स्प्रेयर्स) का प्रवाह नियंत्रण सुविधा जल/कीटनाशक प्रवाह के कई स्तरों को प्राप्त करने में मदद करता है जिससे क्षेत्र में लचीलापन और गतिशीलता के साथ-साथ अनुप्रयोग की तीव्रता भी बढ़ जाती है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0032 छिड़काव करने वाले यंत्र (स्प्रेयर) का ड्यूल-चैंबर (दो-स्तरीय) डिजाइन संसाधन को और अधिक कार्यशील बनाने में मदद करता है क्योंकि यह प्रणाली को किसी भी विशेष समय में दो प्रकार के तरल पदार्थ ले जाने की अनुमति देता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0033 सीएसआईआर-सीएमईआरआईमें किए गए प्रयोगों के अनुसार, कार्यशील किसानों ने सूचित किया है कि यह सीएसआईआर-सीएमईआरआईविकसित स्प्रेयर का उपयोग करते समय 75% जल और 25% समय की बचत होती है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0034 यह डिजाइन तत्व स्प्रे आधारित कृषि अनुप्रयोगों के लिए समय को कम करने में भी मदद कर सकता है, क्योंकि किसानों को एक अलग सामग्री का उपयोग करने से पहले एक भी बर्तन की सामग्री को पूरी तरह से खाली नहीं करना चाहिए। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0036 प्रभावी सामाजिक-आर्थिक समाधान ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0038 सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) हरीश हिरानी ने विस्तार से बताया,“कृषि क्षेत्र में जल के उपयोग को कम करके, ये कई प्रकार के तरीके कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0039 इस क्रांतिकारी तकनीक से शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में भी कृषि मार्ग तैयार करने में मदद मिलेगी, क्योंकि जल की कमी का किसान समुदाय को कोई भय नहीं होगा। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0040 सीएसआईआर-सीएमईआरआई द्वारा विकसित स्प्रेयर सीमांत और छोटे दोनों किसानों के लिए एक लागत प्रभावी सामाजिक-आर्थिक समाधान प्रदान करता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0041 किफायती मूल्य निर्धारण तकनीक के व्यापक कारक को आगे लाने से कुटीर और सूक्ष्म उद्योगों को अवसर मिलता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0042 ” ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0044 सीएसआईआर-सीएमईआरआई ने पहले ही 1 किलोवाट-क्षमता (kwp), 3किलोवाट-क्षमता (kwp), 5किलोवाट-क्षमता (kwp), 6किलोवाट-क्षमता (kwp), 7.5किलोवाट-क्षमता (kwp) और 11.5किलोवाट-क्षमता (kwp) का सौर वृक्ष विकसित किया है, (जो अबतक का विश्व में सबसे बड़ा सौर वृक्ष है) ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0046 Link-2 ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0048 कृषि में नैनोटेक्नोलॉजी के अभिनव प्रयोग ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0050 वर्तमान समय में, अपने सूक्ष्म आकार तथा अद्वितीय भौतिक-रासायनिक विशेषताओं के कारण नैनोमैटेरियल्स का विभिन्न क्षेत्राों में प्रयोग बढ़ा है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0051 नैनो तकनीक में कृषि संबंधित प्रतिकूल समस्याओं को कम करने के साथ-साथ, पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा व कृषि उत्पादकता में सुधार करने की अपार क्षमता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0052 कृषि उत्पाद, मानव जीवन के अधिकांश पहलुओं को प्रभावित करते हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0053 इनमें दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुएं जैसे-ईंधन, कपड़ा, पफर्नीचर, भोजन और पशु आहार इत्यादि शामिल हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0054 कृषि से भावी वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के लिये प्रौद्योगिक उन्नति की आवश्यकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0055 नैनोटेक्नोलॉजी के कृषि क्षेत्रा में विभिन्न अनुप्रयोगों एवं आशंकाओं को संक्षेप में इस लेख में वर्णित किया गया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0057 शोधकर्ताओं द्वारा हाइड्रोजन, नैनाक्ले और नैनोजियोलाइट्‌स का सफल परीक्षण मृदा की जलधारण क्षमता को बढ़ाने के लिये किया गया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0058 इसलिये फसल परिपक्वता के दारैान पानी धीमी गति से प्रवाहित होता है तथा लंबी अवधि तक आवश्यकतानुसार उपलब्ध भी होता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0059 इस प्रकार की प्रणाली का प्रयोग पत्ती क्षेत्राों के पुनर्वितरण के लिये अनुकूल है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0060 कार्बन नैनोट्‌यूब और अकार्बनिक जैसे नैनो धातु तथा मेटल ऑक्साइड का उपयोग पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले हानिकारक पदार्थों को अवशोषित करने के लिये भी किया गया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0062 नैनौमटेरियल्स द्वारा पौधों की प्रभावी वृद्धि ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0064 कार्बन नैनोट्‌यूब और Mo, SiO2, ZnO एवं TiO2 के नैनोकणों के प्रयोग के पश्चात पौधों की वृद्धि आंकी गयी है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0065 इस तकनीक द्वारा पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा पौधों को मिलती है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0066 पौधों पर नैनोमैटेरियल्स का वास्तविक प्रभाव उनकी प्रजातियों की संवेदनशीलता के अलावा उनकी संरचना, आकार, सतह, भौतिक और रासायनिक गुणों पर निर्भर करता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0068 भाकृअनुप-कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान में नैनोटेक्नोलॉजी ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0070 नैनोटेक्नोलॉजी के कृषि संबंधित क्षेत्रों में प्रयोगों पर संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा उल्लेखनीय तकनीकों का विकास किया गया है, जो निम्नलिखित हैं: ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0072 नैनोसेल्युलोज पायलट प्लांट ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0074 भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 'मेक इन इंडिया' अभियान में पहल करते हुए संस्थान ने अपने हितधारकों एवं नवउद्यमियों के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शन व अपने देश में अपनी तरह का प्रथम नैनोसेल्युलोज पायलट प्लांट मुंबई मुख्यालय में स्थापित किया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0075 इस पायलट प्लांट में कपास लिंटर्स, कपास अपशिष्ट और खोई से 10 कि.ग्रा. प्रति 8 घंटे की दर से जलीय रूप में नैनोक्रिस्टलाईन सेल्युलोज (एनसीसी) और शुष्क रूप नैनोफायब्रिलेटेड सेल्युलोज (नएफसी) का उत्पादन लिया जाता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0076 संस्थान के हितधारकों को नैनोसेल्युलोजयुक्त विभिन्न अनुप्रयोगों की कुशल तकनीकें विकसित करने और कस्टमाइज्ड उत्पादों का टेस्ट ट्रायल करने के लिए उष्मायन इकाई के रूप में नैनोसेल्युलोज पायलट प्लांट की सुविधा प्रदान की जाती है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0078 नैनोकणयुक्त सूती कपड़ा ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0080 इस पायलट संयंत्र की सुविधा अन्य नैनोमटेरियल्स तैयार करने के लिए भी प्रयोग में लायी जा रही है जैसे कि नैनो जिंक ऑक्साइड, जिसके उपयोग से परिष्कृत की गई रोगाणुरोधी सूती चादरें अस्पताल में भर्ती किये गए मरीजों में पारसक्रंमण रोकने के लिए सफलतापूर्वक प्रयोग में लाई रही हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0082 हाई-एंड पेपर कोटिंगयुक्त क्रॉफ्ट पेपर ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0084 नैनोसेल्युलोज का उपयोग करके कम से कम लागत में शुद्ध लुगदी प्राप्त हुई है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0085 योजक या एडिटीव के रूप में पुनर्चक्रित क्रॉफ्ट पेपर में डालने से पेपर की मजबूती में वृद्धि दिखाई दी है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0087 नैनोसेल्युलोजयुक्त ग्रीन कंपोजिट ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0089 खाद्य पैकेजिंग में नैनोसेल्युलोज से बनी नैनोकंपोजिट फिल्म से शीघ्र खराब होने वाले खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ में सुधार आया है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0091 नैनो उर्वरक ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0093 दूषित मृदा सुधार के लिए, नाइट्रोजन उर्वरकों के निक्षालन से होने वाले नुकसान, पौधों में अमोनिया विषाक्तता को कम करने तथा कृषि पैदावार बढ़ाने के लिए प्रभावी व धीमी गति में उर्वरक प्रवाहित करने हेतु नैनोसेल्युलोज द्रव्य की उपयोगिता सिद्ध हो रही है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0094 इससे उर्वरक की खपत कम होगी और फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0096 इन सफल तकनीकों के अतिरिक्त संस्थान में नैनोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में शोध कार्य संबंधी सभी अत्याधुनिक उपकरण व सुविधाएं उपलब्ध हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0097 संस्थान द्वारा समय-समय पर इस संदर्भ में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0098 उद्यमी/शोधकर्ता संस्थान एवं सिरकोट द्वारा विकसित नैनोसेल्युलोज उत्पादन प्रौद्योगिकी से न केवल कपास लिंटर और अन्य सेल्युलोज प्रचुर कृषि अपशिष्ट का मूल्यवर्धन हो रहा है, बल्कि प्रौद्योगिकी लाइसेंसिग के लिए अन्वेषक, उद्यमी और उद्योगपति भारत सरकार के स्टार्टअप पहल के तहत संस्थान से भी जुड़ रहे हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0100 भविष्य की आशंकाएं ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0102 कृषि जगत में नैनोप्रौद्योगिकी के संभावित अनुप्रयोगों की पहचान करने में कापफी प्रगति के बावजूद, कृषि क्षेत्रा में महत्वपूर्ण योगदान देने से पूर्व निकट भविष्य में कई अन्य मुद्दों का समाधान किया जाना बाकी है, ये निम्नलिखित हैंः ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0104 नैनोसिस्टम्स के प्रभावों की मौजूदा व्यावसायिक उत्पादों के प्रभावों के साथ तुलना करना ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0106 नैनोमैटेरियल्स, नैनोपेस्टिसाइड्स नेना फर्टिलाइजर्स संबंधित नुकसान और जीवनचक्र के मूल्यांकन और तरीकों के साथ-साथ गैर लक्षित जीवों जैसे-अन्य पौधे, मृदा और मधुमक्खियों पर विपरीत प्रभाव का आंकलन ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0108 नैनोमैटेरियल्स और नैनोकणों का प्रयोग करके उत्पादित भोजन की प्रक्रिया में नियुक्त श्रमिकों और उपभाेक्ताओं की सुरक्षा काे संबंधित करना भी आवश्यक है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0110 बढ़ती हुई वैश्विक जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो रही चुनौतियों के निवारण को ध्यान में रखते हुए, कृषि क्षेत्र में नैनोमैटेरियल्स से टिकाऊ के मुद्दे का समाधान तलाशा जा सकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0111 वास्तव में उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग को नैनोस्केल करिअर के उपयोग से बढ़ाया जा सकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0112 इससे कम खपत में उचित उत्पादकता को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0113 नैनोटेक्नोलॉजी द्वारा किसी भी प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाले कचरे एवं उपोत्पाद की मात्रा में भी कमी आती है, जिसके साथ ही साथ कचरे के पुनः उपयोग में भी यह तकनीक सहायक है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0114 नैनोसेंसर्स तकनीक, ऊर्जा तथा संसाधनों के कुशल प्रबंधन के साथ प्रिसिजन(सटीक) कृषि को प्रोत्साहन देने में भी उपयोगी है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0115 पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर होने वाले नैनोटेक्नोलॉजी के प्रभावों का सटीक मूल्याकंन करने के लिए विश्वसनीय तरीकों के विकास की आवश्यकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0116 इससे विभिन्न मेट्रिसेसों में उपयोग होने वाले नैनोमैटेरियल्स के लक्षणों तथा मात्रा का अंदाजा लगाया जाना सुनिश्चित होगा। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0118 नैनोसेंसर्स प्रणाली ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0120 नैनोसेंसर्स द्वारा किसानों को सटीक नियंत्रण के साथ पौधों की सामयिक जरूरतों को पूर्ण करने में सहायता मिलती है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0121 इस प्रकार फसलों की निगरानी, मृदा में पोषक तत्वों और कीटनाशकों के सटीक विश्लेषण या स्मार्ट कृषि के लिये पानी के उपयोग की दक्षता को नियंत्रित करने संबंधित अनुसंधान प्रयासों पर कार्य करना अनिवार्य है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0122 नैनोसेंसर्स द्वारा मृदा के कई मापदंडों ;पी-एच मान, पोषक तत्व, फसल और मृदा में अपशिष्ट कीटनाशकों की मात्रा, आर्द्रता, रोगजनकों का पूर्वानुमान, नाइट्रोजन का अपटेक इत्यादि स्थायी खेती को बढ़ावा देने संबंधी केवल कुछ उदाहरण हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0123 नैनौसेंसर्स प्रणाली, पारंपरिक सेंसर प्रणाली की तुलना में उच्च संवेदनशीलता और विशिष्टता दर्शाती हैं। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0124 इसके द्वारा मृदा में उपस्थित मृदा जल तनाव का आंकलन करके वास्तविक पानी उपयोग की दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0125 इसके साथ ही इसे स्वायत्त सिंचाई नियंत्रकों के साथ भी जोड़ा जा सकता है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0126 सिंचाई प्रणाली का स्वचालन, स्मार्ट कृषि की एक प्रमुख तथा महत्वपूर्ण आवश्यकता है, विशेष रूप से उन इलाकों में जहां सिंचाई जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है। ebs_Unnat-Kirshi-Taknik-Link1-2-translation-hin2tel_0128 स्त्रोत : खेती पत्रिका, आईसीएआर, मनोज कुमार महावर,वैज्ञानिक, ए.के. भारीमल्ला-वरिष्ठ वैज्ञानिक, पी.जी. पाटील-निदेशक और प्राची म्हात्रो-पुस्तकालयाध्यक्ष, भाकृअनुप-केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान, मुंबई (महाराष्ट्र)।