ID SENT ebs_ajmer_0002 अजमेर ebs_ajmer_0004 टैगलाइन - अजमेर-ए-शरीफ का घर ebs_ajmer_0006 घूमने का सबसे अच्छा समय - अक्टूबर से फरवरी ebs_ajmer_0008 अंश - आध्यात्म और विरासत से सराबोर राजस्थान का अजमेर शहर एक लोकप्रिय तीर्थ स्थान है। ebs_ajmer_0012 राजस्थान में बसा अजमेर शहर, अना सागर झील के मनोरम विस्तार में बसी अरावली पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जो विविध धर्मों और संस्कृतियों का प्रतीक है। ebs_ajmer_0013 तीर्थयात्रियों के लिए यह एक लोकप्रिय ठहराव है तथा अजमेर-ए-शरीफ के घर के रूप में प्रसिद्ध है जोकि चिश्ती आदेश के संस्थापक, तथा भारत में सूफी संप्रदाय के प्रमुख फ़कीर ख्वाजा मुइन-उद-दीन चिश्ती की दरगाह को कहा जाता है। ebs_ajmer_0014 इस दरगाह में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन रमजान के त्योहार और उन फ़क़ीर के उर्स के दौरान और ज्यादा शानदार हो जाता है, जब वहाँ बड़ा जनसमूह उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचता है। ebs_ajmer_0016 इस शहर की स्थापना करने वाले चौहान राजाओं की तत्कालीन राजगद्दी होने के नाते, अजमेर अपने भव्य किलों, प्राचीन मंदिरों और एक जीवंत इतिहास के लिए प्रसिद्ध है जो इसकी कला और शिल्प में दृष्टिगोचर होता है। ebs_ajmer_0017 यह शहर पुष्कर शहर का प्रवेश द्वार भी है, जिसे एक प्रमुख हिंदू तीर्थ माना जाता है। ebs_ajmer_0018 पुष्कर रेत के टीलों, झीलों, पहाड़ियों और जंगलों के सुरम्य परिदृश्य में बसा हुआ तथा शांत व पुष्कर झील के चारों ओर बसा हुआ नगर है, और अपने सुविख्यात मेंले के लिए प्रसिद्ध है जो प्रत्येक वर्ष अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान 2,00,000 से अधिक लोगों को अपनी ओर खींचता है, अजमेर अपनी तहों में एक पूरा इतिहास समेटे हुए है। ebs_ajmer_0020 यह शहर राजा अजयपाल चौहान द्वारा तब स्थापित किया गया था जब पृथ्वीराज चौहान 12 वीं शताब्दी में मुहम्मद गौरी के हाथों मारे गए थे। ebs_ajmer_0021 बाद में इसे 1532 में मारवाड़ राजवंश द्वारा जीत लिया गया था, जिसके बाद 1559 में यहाँ अकबर के अधीन मुगल वंश का शासन स्थापित हुआ। ebs_ajmer_0022 अकबर ने अजमेर को एक पूर्ण प्रांत का दर्जा दिया था। ebs_ajmer_0023 मुगलों ने 1770 तक अजमेर पर शासन करना जारी रखा और उसके बाद मराठों ने उन पर फ़तह हासिल कर के इस का शासन अपने हाथों में ले लिया। ebs_ajmer_0024 अंत में, सन 1818 में अजमेर को मराठों द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया गया। ebs_ajmer_0026 आकर्षण : ebs_ajmer_0028 अजमेर-ए-शरीफ (आध्यात्मिक) ebs_ajmer_0030 एक अतिव्यस्त सड़क पर बनी हुए अजमेर-ए-शरीफ दरगाह देश की सबसे पाक सूफी इबादतगाहों में से एक है। ebs_ajmer_0031 दरगाह शरीफ या अजमेर-ए-शरीफ दुनिया भर के ज़ायरीन को आमंत्रित करता है, जो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को श्रद्धांजलि देने आते हैं। ebs_ajmer_0032 वह अपनी धर्मनिरपेक्ष विचारधारा और शांति से संबंधित महान शिक्षाओं के लिए जाने जाते थे। ebs_ajmer_0033 दरगाह के बाहर की सड़क पर इत्र, मिठाइयाँ, फूल, चादरों और कपड़ों जैसी कई प्रकार की वस्तुओं की दुकानें हैं, जो ख्वाजा को चढ़ाई जाती हैं। ebs_ajmer_0034 जैसे ही आप दरगाह में प्रवेश करते हैं, अद्भुत नक्काशी के साथ चांदी से बने विशाल दरवाजों की एक श्रृंखला से होते हुए गुज़रते हैं। ebs_ajmer_0035 यह दरवाजे एक विशाल आंगन में खुलते हैं जिसमें मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, जो संगमरमर से बनाई गई है। ebs_ajmer_0036 दरगाह में छत की तरफ सोने की परत चढ़ी हुई है और इसे चांदी की रेलिंग और संगमरमर की दीवार से सुरक्षित रखा जाता है। ebs_ajmer_0037 शाम की रस्मों में महफ़िल-ए-समा शामिल है, जो आगंतुकों के लिए एक रोमांचकारी अनुभव है। ebs_ajmer_0038 जब आप दरगाह परिसर से बाहर निकल रहे हों, तो खाना पकाने की बड़ी देग को भूल न जाएँ। ebs_ajmer_0039 यह माना जाता है कि इस देग में पैसा फेंकने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी होंगी। ebs_ajmer_0041 अना सागर झील (प्रकृति) ebs_ajmer_0043 एशिया की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक, एना सागर झील 2 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैली हुई है। ebs_ajmer_0044 पर्यटक अना सागर की यात्रा के दौरान नौका विहार और ऊंट की सवारी जैसी विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। ebs_ajmer_0045 झील का दौरा करने का सबसे अच्छा समय सर्दियों के मौसम के दौरान होता है जब यह झील साइबेरिया और दुनिया के अन्य हिस्सों से आए पेलिकन, जलमुर्गी और बतख जैसे प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या से भर जाती है। ebs_ajmer_0046 पर्यटक दौलत बाग भी जा सकते हैं, जो अपने आकर्षक संगमरमर के मंडपों के लिए प्रसिद्ध है जिन्हें ‘बारादरी’ के नाम से जाना जाता है तथा जिनका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने 1637 में करवाया था। ebs_ajmer_0047 नज़दीक ही झील के इर्दगिर्द बसी आनासागर चौपाटी है, जो एक हलचल भरा खानेपीने की वस्तुओं का बाज़ार है। ebs_ajmer_0048 शाम के समय झील को देखने बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक आते हैं क्योंकि यह सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। ebs_ajmer_0049 इस झील का निर्माण पृथ्वीराज चौहान के दादा अनाजी चौहान ने 1135 ईस्वी से 1150 ईस्वी के दौरान करवाया था। ebs_ajmer_0051 अढ़ाई-दिन-का-झोंपड़ा (आध्यात्मिक) ebs_ajmer_0053 अजमेर शहर के बाहरी इलाके में स्थित, अढ़ाई-दिन-का-झोंपड़ा एक महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है जिसे वास्तुकला की भारतीय- इस्लामिक शैली में बनाया गया है। ebs_ajmer_0054 यह एक मस्जिद का खंडहर है जो इसी नाम से जाती है। ebs_ajmer_0055 कहा जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण ढाई दिन में हुआ था। ebs_ajmer_0056 हेरात के अबू बक्र द्वारा डिजाइन किए गए अढ़ाई-दिन-का-झोंपड़ा में 10 गुंबद हैं, जो 100 से अधिक स्तंभों पर टिके हुए हैं। ebs_ajmer_0057 मुख्य सभागार की दीवारों को काट कर झरोखे बनाए गए हैं ताकि सूरज की रोशनी अन्दर प्रवेश कर सके। ebs_ajmer_0058 मस्जिद के आंतरिक सदन में एक मुख्य हॉल है जिसमें लगे हुए स्तंभों पर अद्भुत कारीगरी की गई है। ebs_ajmer_0059 यहाँ से 500 मीटर की दूरी पर स्थित दरगाह शरीफ में नमाज अदा करने के बाद अढ़ाई-दिन-का-झोंपड़ा का दौरा किया जा सकता है। ebs_ajmer_0061 किशनगढ़ (विरासत) ebs_ajmer_0063 अपने विस्तृत संगमरमर बाजार के लिए पूरे भारत में संगमरमर के शहर के रूप में जाना जाता किशनगढ़ अजमेर के बाहरी इलाके में स्थित है। ebs_ajmer_0064 यहाँ का मुख्य आकर्षण नौ ग्रहों का मंदिर है, जो शायद दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र मंदिर है। ebs_ajmer_0065 यहां आने वाले पर्यटक लोकप्रिय किशनगढ़ शैली में बनाए गए लघु चित्रों को खरीद सकते हैं जो हरे रंग के प्रचुर उपयोग और परिदृश्यों के चित्रण की अपनी विशेष शैली के लिए विख्यात हैं। ebs_ajmer_0066 इसके अलावा आप यहां के मिर्च बाजार भी जा सकते हैं। ebs_ajmer_0067 शहर के अन्य पर्यटक आकर्षण गुंडोलाव झील तथा फूल महल पैलेस हैं जो किशनगढ़ के महाराजाओं के आनंद स्थल हुआ करते थे, इनके अतिरिक्त किशनगढ़ किला भारत और पाकिस्तान को जोड़ने वाली सड़क पर स्थित है, व राजस्थानी शैली की वास्तुकला का बेहतरीन नमूना रूपगढ़ किला भी इन आकर्षणों में शामिल हैं। ebs_ajmer_0068 यह शहर पुष्कर से लगभग 43 किमी की दूरी पर स्थित है, तथा यहां पर्यटन करने का सबसे अच्छा अवसर जुलाई और अगस्त में आयोजित होने वाला गणगौर महोत्सव होता है। ebs_ajmer_0070 टोडगढ़ (प्रकृति, वन्यजीव) ebs_ajmer_0072 समुद्र तल से 3,281 फीट ऊपर अरावली के शांत वातावरण में टोडगढ़ का सुंदर गांव स्थित है। ebs_ajmer_0073 यह अपनी औपनिवेशिक इमारतों, सर्पीली सड़कों और आकर्षक झरनों के लिए लोकप्रिय है, जो इसे इतिहास और प्रकृति प्रेमियों दोनों के लिए एक आदर्श स्थान बनाते हैं। ebs_ajmer_0074 राजस्थान के सबसे अच्छे पर्यावरण-पर्यटन स्थलों में से एक टोडगढ़ - राओली वन्यजीव अभयारण्य, में पक्षियों की विस्तृत व विविध प्रजातियों के साथ ही तेंदुए, भालू, बारहसिंघे, नीलगाय, भेड़िये इत्यादि को संरक्षित किया जाता है। ebs_ajmer_0075 यहाँ का एक अन्य आकर्षण दूधेश्वर मंदिर है, जो अभयारण्य के केंद्र में स्थित है। ebs_ajmer_0076 इस मंदिर का नाम भगवान शिव के नाम पर रखा गया है और यह ताज़े भूमिगत जल का एक स्थायी स्रोत है। ebs_ajmer_0077 यह बरगद और इमली के पेड़ों से घिरा एक शांत स्थान है। ebs_ajmer_0078 टोडगढ़ में भीलबेरी जलप्रपात की यात्रा करने से किसी को चूकना नहीं चाहिए, जो राजस्थान का संभवतः सबसे ऊंचा झरना है। ebs_ajmer_0079 पर्यावरण पर्यटन स्थलों के अलावा, यहाँ के अन्य उल्लेखनीय स्थानों में प्रज्ञा शिखर तथा विक्टोरियन एरा चर्च और स्कूल इत्यादि शामिल हैं। ebs_ajmer_0081 पुष्कर (आध्यात्मिक) ebs_ajmer_0083 शांत पुष्कर झील के चारों ओर स्थित पुष्कर नाम का शहर रेत के टीलों, झीलों, पहाड़ियों और जंगलों के मध्य एक अद्भुत परिवेश को समेटे हुए है। ebs_ajmer_0084 अध्यात्म में लीन पुष्कर नगर के नाम का शाब्दिक अर्थ है कमल का फूल, और माना जाता है कि यह स्थान भगवान ब्रह्मा का आसन है। ebs_ajmer_0085 अतः, पुष्कर शहर अत्यधिक दुर्लभ स्थानों में से एक है जहाँ भगवान ब्रह्मा का मंदिर है। ebs_ajmer_0086 यह मंदिर एक लाल रंग का भवन है जिसे 14 वीं शताब्दी ईसवी के दौरान बनाया गया था, तथा यहाँ दूर-दूर से भक्त आया करते है। ebs_ajmer_0087 किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा ने एक बार जमीन पर कमल का एक फूल गिराया था, जिससे एक झील का निर्माण हुआ, उस झील का नाम बाद में उन्होंने फूल के नाम पर रखा। ebs_ajmer_0089 पुष्कर की आत्मा अपनी गलियों में बसी हुई है और यहाँ की पुरातन गलियों, बाजारों और घाटों से गुज़रते हुए आप इस शहर का आनंद ले सकते हैं। ebs_ajmer_0090 पुष्कर मेला मवेशियों, घोड़ों और ऊंटों का एक बहुत बड़ा पशुबाज़ार या नखासा होता है, जो अपने भव्य आयोजन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। ebs_ajmer_0091 यह सात दिन का पर्व है जो अक्टूबर और नवंबर के महीनों के दौरान आयोजित होता है। ebs_ajmer_0092 इस मेले की जीवंतता हर साल लगभग 2,00,000 आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित करती है; जिनमें घोड़ों, ऊंटों और भैंसों के विक्रेता व खरीदार शामिल होते हैं। ebs_ajmer_0093 इन आगंतुकों को अपनी और आकर्षित करने के लिए यहाँ हथकरघे के सामान, खाने-पीने की वस्तुएँ, मिठाई, कुल्फी, आइस क्रश, चूड़ियाँ व ऊंट की काठी इत्यादि सामान बेचने के लिए बहुत सी अस्थाई दुकानें स्थापित की जाती हैं। ebs_ajmer_0095 मेड़ता सिटी (विरासत, आध्यात्मिक) ebs_ajmer_0097 मेड़ता नमक आध्यात्मिक शहर की यात्रा अजमेर से एक दिन में की जा सकती है। ebs_ajmer_0098 कभी मेड़तिया राठौड़ राजपूतों के शासनकाल में एक महत्वपूर्ण राज्य रहे मेड़ता को भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त मीरा बाई का जन्मस्थान होने के कारण जाना जाता है। ebs_ajmer_0099 मीरा बाई के 500 साल पुराने जन्मस्थान भग्नावशेष रानी मीराबाई की भक्तिमय कहानियों से गूंजते हैं। ebs_ajmer_0100 पर्यटक इस शहर के केंद्र में स्थित चारभुजा मंदिर के नाम से मशहूर मीरा बाई मंदिर के भी दर्शन सकते हैं। ebs_ajmer_0101 इसके अंदरूनी भाग अत्यधिक सुन्दर हैं और जिनकी दीवारें और फर्श हजारों पत्थरों, दर्पणों और रत्नों से सुशोभित हैं। ebs_ajmer_0102 दीवारों पर विस्तृत चित्र विभिन्न हिंदू देवताओं की महिमा को प्रदर्शित करते हैं। ebs_ajmer_0103 एक अन्य प्रसिद्ध पर्यटक स्थल मीरा बाई स्मारक या मीरा बाई मेमोरियल है, जो एक बलुआ पत्थर का इस्तेमाल कर के राजपूत वास्तुकला शैली में निर्मित एक बड़ा दरवाज़ा है। ebs_ajmer_0104 स्मारक के पास एक छोटा संग्रहालय भी स्थित है जो मीरा बाई के जीवन के बारे में जानकारी देता है। ebs_ajmer_0105 औरंगज़ेब मस्जिद मुग़ल वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना तथा इस शहर में स्थित एक और दर्शनीय पर्यटन स्थल है। ebs_ajmer_0106 पुष्कर से 61 किमी की दूरी पर स्थित मेड़ता वहाँ की यात्रा के दौरान एक लोकप्रिय भ्रमण स्थल है। ebs_ajmer_0108 कव्वाली अजमेर का लोक संगीत (कला और शिल्प) ebs_ajmer_0110 चमड़े का काम (कला और शिल्प) ebs_ajmer_0112 ब्यावर (धरोहर) ebs_ajmer_0118 अजमेर की कलात्मक संस्कृति में डूबने के लिए पर्यटक वहाँ की मधुर कव्वाली के संगीत का आनंद ले सकते हैं, अथवा उत्तम चमड़े की सामग्रियों की खरीदारी कर सकते हैं। ebs_ajmer_0120 अजमेर का लोक संगीत कव्वाली ebs_ajmer_0122 अजमेर की कव्वालियाँ और कव्वाल दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। ebs_ajmer_0123 कव्वाली एक लोकप्रिय नृत्य रूप है जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करती है और उन्हें इस शहर के उत्साह का अनुभव करवाती है। ebs_ajmer_0124 'कव्वाली' शब्द अरबी शब्द 'क़वोल' से लिया गया है, जिसका अर्थ है ऐसा धार्मिक क्रियाकलाप जो विचारों की शुद्धि में मदद करता है। ebs_ajmer_0126 यह विधा 13 वीं शताब्दी में भारत में लोकप्रिय हुई और तब से अजमेर प्रसिद्ध विश्वप्रसिद्ध कव्वालों का गढ़ बना हुआ है। ebs_ajmer_0127 अल्लाह की शान में रचित कव्वालियों को अजमेर शरीफ दरगाह हॉल के अंदर कव्वालों द्वारा नियमित रूप से गाया जाता है, जिसे महफिल-ए-समा के नाम से जाना जाता है। ebs_ajmer_0128 आमतौर पर कव्वाली का प्रदर्शन प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक होता है और यह दुनिया के विभिन्न हिस्सों के गायकों को अपनी कव्वाली के माध्यम से अल्लाह की इबादत करने के लिए एक मंच पर आने का एक अद्भुत अनुभव देता है। ebs_ajmer_0129 अजमेर की कव्वाली का आनंद लेने के लिए सबसे अच्छा समय वार्षिक उर्स उत्सव के दौरान होता है, जो हर साल सूफी फकीर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मृत्यु की बरसी के अवसर पर उनकी दरगाह पर आयोजित होता है। ebs_ajmer_0130 इस दौरान दरगाह परिसर के भीतर कई कव्वाली समारोह आयोजित किए जाते हैं और उनमें शिरकत करना वास्तव में एक रूहानी एहसास है। ebs_ajmer_0132 चमड़े का काम ebs_ajmer_0134 अजमेर शहर अपने चमड़े के काम के लिए प्रसिद्ध है, जो पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए स्थानीय कारीगरों द्वारा किया जाता है। ebs_ajmer_0135 जवाजा और हरमाड़ा के गाँव चमड़े के सामानों के विनिर्माण के मुख्य केंद्र हैं। ebs_ajmer_0136 हरमाड़ा के कारीगर चमड़े की कुर्सियाँ, पर्स, हैंड बैग और जूतियाँ बनाने में माहिर हैं, जिन पर हाथ से कढ़ाई अर्थात कशीदाकारी की जाती है। ebs_ajmer_0137 यहाँ के तिलोनिया गाँव में चमड़े से बने सुन्दर कढ़ाई वाले डिजाइनर हैंडबैग, पर्स, बेल्ट, टोपी, स्टूल और कुर्सियाँ भी देश भर में प्रसिद्ध हैं। ebs_ajmer_0138 पर्यटक प्रसिद्ध मोजरियों या जूतियों को भी ख़रीद सकते हैं जो सिर्फ़ इस राज्य में ही पाई जाती हैं। ebs_ajmer_0139 उन्हें बनाने के लिए चमड़े में कशीदाकारी करने के बाद उस में छिद्र किए जाते हैं, फिर उसे जड़ा जाता है और कई आकर्षक रूप विन्यासों के अनुरूप सिला जाता है। ebs_ajmer_0140 ढोल और तबले जैसे वाद्ययंत्र बनाने में भी चमड़े का उपयोग किया जाता है, जो राजस्थान के लोक संगीतकारों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। ebs_ajmer_0142 लघु चित्रकारी ebs_ajmer_0144 राजस्थान की उत्कृष्ट लघु चित्रकारी की कृतियाँ अजमेर में अवश्य खरीदी जानी चाहिए। ebs_ajmer_0145 किंवदंतियों, ऐतिहासिक घटनाओंऔर रंगों के कलात्मक संयोजन से मिल कर उभरे उनके चित्रण ने उन्हें काफी लोकप्रिय बना दिया है। ebs_ajmer_0146 इन चित्रों की पृष्ठभूमि में घुमड़ते बादलों के साथ बड़ी और घुमावदार आंखों जैसी सुन्दरताओं का अंकन किया गया है। ebs_ajmer_0147 किशनगढ़ चित्रकला अजमेर में लोकप्रिय भारतीय कला की 18 वीं शताब्दी से पहले की शैली है। ebs_ajmer_0148 किशनगढ़ चित्रों के पात्र अधिकतर व्यापक व भव्य परिदृश्य में काम करते हुए दिखाए जाते हैं। ebs_ajmer_0152 यहाँ क्या करें ebs_ajmer_0154 फॉय सागर झील में पानी में डूबते हुए सूरज की अद्भुत छटा देखने से लेकर खारवा की ऐतिहासिक विरासत का अवलोकन करने तक, अजमेर में करने को बहुत कुछ है। ebs_ajmer_0156 फॉय सागर ebs_ajmer_0158 सुरम्य अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित फॉय सागर एक कृत्रिम झील है जो सुंदर वातावरण का निर्माण करती है। ebs_ajmer_0159 सुंदर सूर्यास्त देखने के लिए यह झील अजमेर की सबसे अच्छी जगहों में से एक है तथा इसका नाम अंग्रेजी वास्तुकार, मिस्टर फोय के नाम पर रखा गया है। ebs_ajmer_0161 मांगलियावास ebs_ajmer_0163 इस शहर के बाहरी इलाके में स्थित, मांगलियावास दुर्लभ प्रजातियों के दो 800 साल पुराने पेड़ों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें कल्पवृक्ष कहा जाता है। ebs_ajmer_0164 कहा जाता है कि ये पेड़ प्रार्थना करने वालों की मनोकामना पूरी करते हैं। ebs_ajmer_0165 इस चमत्कारी प्रभाव को प्राप्त के लिए, भक्त पेड़ों के चारों ओर एक धागा बांधते हैं। ebs_ajmer_0167 ब्यावर ebs_ajmer_0169 दीवारों से घिरा ब्यावर शहर औपनिवेशिक प्रभाव में बसा हुआ है क्योंकि यह 19 वीं में ब्रिटिश अधिकारी कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन द्वारा एक सैन्य छावनी के रूप में स्थापित किया गया था। ebs_ajmer_0170 ब्यावर का आनंद लेने का सबसे अच्छा तरीका या तो ऑटो-रिक्श किराए पर लेना या फिर पैदल चलना है। ebs_ajmer_0171 शहर की सभी सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों के केंद्र अर्थात यहाँ के हरे-भरे सुभाष उद्यान से अपनी यात्रा शुरू करें। ebs_ajmer_0172 पार्क में बच्चों के लिए झूले हैं और एक मनोरम पिकनिक स्थल भी है। ebs_ajmer_0174 शहर की समृद्ध स्थापत्य विरासत की झलक पाने के लिए, महादेव जी की छतरी के आकर्षक गुंबददार मंडप की ओर प्रस्थान करें। ebs_ajmer_0175 चहलपहल भरे अग्रसेन मार्केट के पास स्थित, यह ब्यावर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। ebs_ajmer_0176 पंच बत्ती सार्वजनिक सर्कल पर रुक कर थोड़ी देर विश्राम का आनंद लें और यहाँ की स्थानीय संस्कृति का अवलोकन करें। ebs_ajmer_0177 ब्यावर में राजस्थानी हस्तशिल्प के बहुत से अच्छे सामान सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हैं। ebs_ajmer_0178 शहर के स्थानीय बाजारों में राजस्थानी कठपुतलियाँ और अन्य सजावटी वस्तुएँ जैसे रंगीन स्थानीय हस्तशिल्प सामग्रियाँ बेचने वाली दुकानें हैं। ebs_ajmer_0179 ब्यावर के शाहपुरा मोहल्ले में शूलब्रेड मेमोरियल सीएनआई चर्च इस शहर के औपनिवेशिक अतीत के साक्षी के रूप में स्थापित है और इस शहर की यात्रा में यहाँ एक बार अवश्य जाना चाहिए। ebs_ajmer_0180 ब्यावर की प्रसिद्ध तिल पट्टी, शक्कर और तिल से बने गजक या खस्ता जैसे मीठे पकवानों की खरीदारी करने के लिए हलवाई गली की सैर करें। ebs_ajmer_0181 ब्यावर आने का सबसे अच्छा समय यहाँ आयोजित होने वाले वार्षिक तेजाजी मेले और गैर महोत्सव के दौरान होता है, जब इस शहर की सांस्कृतिक विविधता देखी जा सकती है। ebs_ajmer_0183 जूनिया ebs_ajmer_0185 एक निर्मल झील के तट पर बसे जूनिया का अपना ही एक विलक्षण ऐतिहासिक अतीत है जो राजपूताना संस्कृति से सराबोर है। ebs_ajmer_0186 इसका मुख्य आकर्षण 1,000 साल पुराना जूनिया किला है जो एक भव्य और अद्भुत भवन है। ebs_ajmer_0187 जूनिया अजमेर से लगभग 90 किमी दूर स्थित है। ebs_ajmer_0189 खारवा ebs_ajmer_0191 अजमेर के बाहरी इलाके में स्थित, खारवा में कई ऐतिहासिक स्थल हैं जो पर्यटकों को अपने वास्तु वैभव के कारण आकर्षित करते रहे हैं। ebs_ajmer_0192 इनमें से प्रमुख खारवा किला है, जो राजपूत वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक है। ebs_ajmer_0193 अरावली पहाड़ियों में बसे इस 500 साल पुराने किले को खारवा राज्य के शासक महाराजा राव सगत सिंह खारवा (1872-1939) ने बनवाया था। ebs_ajmer_0194 भव्यतापूर्वक सजी हुई दीवारों, सुंदर खिड़कियों, आंगनों और दीर्घाओं से सुसज्जित यह किला पर्यटकों को अपनी राजसी शान का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता प्रतीत होता है। ebs_ajmer_0195 इसके अलावा, इसके आसपास की सुंदरता यहाँ की यात्रा और अधिक आकर्षक बनाती है क्योंकि यह किला एक शांत सुरम्य झील के किनारे पर स्थित है। ebs_ajmer_0196 किले को अब शाही परिवार द्वारा पर्यटकों हेतु एक यात्रीनिवास के रूप में चलाया जाता है। ebs_ajmer_0200 इन व्यंजनों का मज़ा लें ebs_ajmer_0202 सुगंधित बिरयानी से लेकर स्वादिष्ट सोहन हलवे तक, अजमेर के भोजन में अद्भुत जीवंतता और विविधता है। ebs_ajmer_0204 स्वादिष्ट व्यंजन ebs_ajmer_0208 अजमेर की उम्दा चावलों से कई तहों में तैयार की गई लज़ीज़ खुशबूदार बिरयानी यहाँ का मशहूर पकवान है। ebs_ajmer_0209 शुद्ध खड़े मसालों का उपयोग करके तैयार की गई लज़ीज़ चिकन दम और मटन दम बिरयानी को अजमेर की सड़कों पर लगे ठेलों से लेकर महंगे रेस्तरांओं तक कहीं भी खाया जा सकता है। ebs_ajmer_0211 कढ़ी कचौरी ebs_ajmer_0213 कढ़ी कचौरी अजमेर का एक स्वादिष्ट और मनभावन स्ट्रीट फूड है। ebs_ajmer_0214 यह दो लोकप्रिय राजस्थानी व्यंजनों का ज़ायक़ेदार मेल है - राजस्थानी कढ़ी और राजस्थानी कचौरी; जिसके साथ प्याज, धनिया पत्ती और मीठी चटनी का मिश्रण साथ में परोसा जाता है। ebs_ajmer_0215 यह परंपरागत रूप से यहाँ नाश्ते में खाया जाने वाला व्यंजन है, जिसका लुत्फ़ दोपहर के तुरत-फुरत खाए जा सकने वाले भोजन और शाम के नाश्ते के विकल्प के रूप में भी उठाया जाता है। ebs_ajmer_0217 सोहन हलवा ebs_ajmer_0219 सोहन हलवा एक बेहद लोकप्रिय और व्यापक रूप से खाई जाने वाली पारंपरिक भारतीय मिठाई है। ebs_ajmer_0220 यह मैदा, दूध और सूखे मेवों का उपयोग करके बनाया जाता है और मीठा खाने के शौक़ीन सभी लोगों को ग़ज़ब का आनंद देने वाली वस्तु है। ebs_ajmer_0226 अजमेर जंक्शन रेलवे स्टेशन दिल्ली-जयपुर-मारवाड़-अहमदाबाद-मुंबई रेलवे लाइन पर स्थित है। ebs_ajmer_0227 यह स्टेशन दिल्ली, मुंबई, जयपुर, इलाहाबाद, लखनऊ और कोलकाता जैसे प्रमुख भारतीय शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ebs_ajmer_0231 यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा किशनगढ़ हवाई अड्डा है, जो अजमेर से लगभग 30 किमी दूर स्थित है। ebs_ajmer_0232 यह अजमेर को प्रमुख भारतीय शहरों के साथ नियमित संपर्क की सुविधा प्रदान करता है। ebs_ajmer_0236 अजमेर सड़क मार्ग से भीअच्छी तरह से जुड़ा हुआ है क्योंकि यह स्वर्णिम चतुर्भुज राष्ट्रीय राजमार्ग 8 पर दिल्ली और मुंबई के ठीक बीच में स्थित है।