ID SENT ebs_anantnag_0002 स्थान-अनंतनाग ebs_anantnag_0004 टैगलाइन-अमरनाथ यात्रा का प्रवेश-द्वार ebs_anantnag_0006 भ्रमण का उत्तम समय-मई से अक्टूबर ebs_anantnag_0010 यहां का अद्भुत सौंदर्य, अनोखे नजारे, ट्रैकिंग के रास्ते आदि अनंतनाग आने वाले सैलानियों को आनंदित करते हैं। ebs_anantnag_0014 कश्मीर घाटी में स्थित हरी-भरी लिद्दर घाटी के ढलानों में स्थित अनंत नाग अपूर्व सौंदर्य की धरती है। ebs_anantnag_0015 गर्मियों के मौसम में यह जगह अपने हरे-भरे कुदरती नजारों, कलकल बहती धाराओं और ऊंची चोटियों से सैलानियों को बेहद भाती है। ebs_anantnag_0016 हर साल अमरनाथ गुफा के दर्शनों की कठिन और पवित्र यात्रा पर निकले हजारों हिन्दू तीर्थ यात्री यहीं से होकर गुजरते हैं जो कि यहां से 63 किलोमीटर की दूरी पर है। ebs_anantnag_0017 अनंतनाग के सिनेमाई सौंदर्य ने बहुत सारे फिल्मकारों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है जो कि खासतौर पर मार्तंड सूर्य मंदिर के अवशेषों की तरफ खिंचे चले आते हैं। ebs_anantnag_0018 कश्मीर घाटी के दक्षिणी किनारे पर स्थित अनंतनाग जिला राज्य के सबसे पुराने जिलों में से एक है। ebs_anantnag_0019 साथ ही पहलगाम, कोकरनाग, अचबल, बेरीनाग, डक्सुम जैसी लोकप्रिय जगहों को जाने का रास्ता भी यहीं से होकर गुजरता है। ebs_anantnag_0020 संद्रान, ब्रेंगी, अरापथ और खासकर लिद्दर जैसी बहुत सारी छोटी नदियां यहां की प्राकृतिक सुंदरता में वृद्धि करती हुई यहां से होकर गुजरती हैं। ebs_anantnag_0024 अमरनाथ गुफा (आध्यात्मिक) ebs_anantnag_0026 अमरनाथ स्थित शिव गुफा को हिन्दू बेहद पवित्र मानते हैं क्योंकि इसे भगवान शिव का धरती पर निवास स्थान माना जाता है। ebs_anantnag_0027 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा में बर्फ से निर्मित चार-पांच संरचनाएं बनती हैं जो विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतीक हैं। ebs_anantnag_0028 प्रथा के अनुसार सबसे बड़ी संरचना को भगवान अमरनाथ या शिव, बाईं तरफ वाली को भगवान गणेश और दाईं ओर वाली को देवी पार्वती के रूप् में पूजा जाता है। ebs_anantnag_0029 अमरनाथ गुफा के भीतर बाईं तरफ एक और छोटी गुफा है जहां पवित्र भभूत को श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता है। ebs_anantnag_0030 हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र गुफा के दर्शन के लिए जून से अगस्त के दौरान यहां पहुंचते हैं। ebs_anantnag_0031 इस यात्रा को ‘अमरनाथ यात्रा’ के नाम से जाना जाता है जो चंदनवाड़ी से शुरू होकर पिस्सू, शेषनाग और पंजतरिणी होते हुए अमरनाथ गुफा पर पूर्ण होती है। ebs_anantnag_0033 कथा है कि भगवान शिव मां पार्वती को संसार की रचना और अमरत्व का रहस्य बताना चाहते थे जिस के लिए उन्होंने इस गुफा का चयन किया। ebs_anantnag_0034 उन्होंने अपने सारे आभूषण उतार कर इस गुफा में प्रवेश किया लेकिन किसी कबूतर का एक अंडा उनके सिर पर आ गिरा। ebs_anantnag_0035 कहा जाता है कि वह अमर हो गया और कबूतर का एक जोड़ा इस गुफा में अभी भी दिखाई देता है। ebs_anantnag_0036 दक्षिणमुखी यह गुफा 45 मीटर ऊंची और 27 मीटर गहरी है। ebs_anantnag_0038 मार्तंड सूर्य मंदिर (धरोहर) ebs_anantnag_0040 भगवान सूर्य (भास्कर, मार्तंड) को समर्पित यह विशाल मंदिर सूर्यवंशी राजा ललितादित्य द्वारा करवाए गए निर्माण-कार्यों में सबसे अधिक सुंदर है। ebs_anantnag_0041 ईसा पूर्व आठवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर के भग्नावशेष बताते हैं कि यह अपने भीतर अनोखी, अद्वितीय और ग्रीक प्रभावों वाली स्थापत्य शैली समेटे हुए है। ebs_anantnag_0042 इसे यहां के स्तंभों, पत्थर के खंभों, द्वारों, रास्तों आदि में और बहुतायत से इस्तेमाल किए गए चतुर्भजों व त्रिभुजों आदि के रूप में देखा जा सकता है। ebs_anantnag_0043 यह मंदिर खंभों और मेहराबों वाले प्रांगण में है जिसे देख कर लगता है कि यहां अवश्य ही एक ढका हुआ रास्ता होता होगा। ebs_anantnag_0044 ये सब कश्मीरी हिन्दू शैली के स्थापत्य के साथ मिल कर एक चौंका देने वाली संरचना बनाता है। ebs_anantnag_0045 स्थानीय मान्यता है कि अपने सुनहरे दौर में यह मंदिर पूरे विश्व से पर्यटकों को आकर्षित करता था। ebs_anantnag_0047 डक्सुम (प्रकृति) ebs_anantnag_0049 घने जंगलों और बर्फीले पहाड़ों से घिरा डक्सुम अपने भीतर कुदरत के बेहद खूबसूरत नजारे समेटे हुए है जिन में पेड़ों से ढके पर्वतों से लेकर घास के लुभावने मैदान शामिल हैं। ebs_anantnag_0050 लगभग 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डक्सुम भव्य कोकरनाग चश्मे के पास है और एक असीम शांति प्रदान करता है। ebs_anantnag_0051 ब्रेंगी नदी की सुमधुर धारा आसपास के शांत वातावरण में घुल-मिल जाती है, इस जगह को अच्छी तरह से देखने के लिए ट्रैकिंग ही उत्तम उपाय है। ebs_anantnag_0052 ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह जगह काफी अच्छी है क्योंकि यहां से कई ट्रैक शुरू होते हैं। ebs_anantnag_0053 सिंथन टॉप और सिंथन दर्रे को जाने वाला रास्ता बेहद खूबसूरत है। ebs_anantnag_0054 यात्री यहां के हरे-भरे और सुंदर स्थलों पर कैंपिंग कर सकते हैं और तारों के आवरण के तले आनंद दायक समय गुजार सकते हैं। ebs_anantnag_0055 डक्सुम का एक अन्य प्रमुख आकर्षण ब्रेंगी नदी में मछली पकड़ना भी है जो ट्राउट मछलियों से भरी हुई है। ebs_anantnag_0056 हालांकि मछली पकड़ने के लिए पहले वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। ebs_anantnag_0057 डक्सुम अनंतनाग से 40 किलोमीटर और श्रीनगर से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ebs_anantnag_0059 अचबल (प्रकृति) ebs_anantnag_0061 आंखों को सुहाता सोन सनवर पर्वत से निकलने वाला अचबल चश्मा कभी मुगल बेगम नूरजहां के मनोरंजन का स्थान हुआ करता था। ebs_anantnag_0062 यह प्राचीन झरना अनोखी फारसी शैली में बने शानदार मुगल उद्यानों से घिरा हुआ है। ebs_anantnag_0063 श्रीनगर से 58 किलोमीटर दूर पहाड़ की तलहटी में स्थित यह बाग चिनार के ऊंचे वृक्ष से पहचाना जाता है। ebs_anantnag_0064 तीन धाराओं से होकर इस बाग में बहता चश्मे का पानी और कई सारे फव्वारे यहां के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। ebs_anantnag_0066 ऐसी मान्यता है कि इस चश्मे का स्रोत ब्रेंगी नाला है जो निकल के देवल गाम में चूने पत्थर की चट्टानों में कहीं गुम हो जाता है। ebs_anantnag_0067 अचबल के अन्य आकर्षणों में सीढ़ीदार छते, यहां की पारंपरिक खूबसूरती और सजावटी झाड़ियां हैं। ebs_anantnag_0071 हवाई मार्ग द्वारा-नजदीकी हवाई अड्डा श्रीनगर 48 किलोमीटर की दूरी पर है। ebs_anantnag_0073 रेल द्वारा-नजदीकी रेलवे स्टेशन बनिहाल 31 किलोमीटर दूर है। ebs_anantnag_0075 सड़क द्वारा-अनंतनाग सड़क मार्ग से सभी मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है।