ID SENT ebs_bekal_0002 गंतव्य का नाम: ebs_bekal_0004 बेकल ebs_bekal_0006 टैगलाइन: ebs_bekal_0008 धरती पर स्वर्ग ebs_bekal_0010 जाने का सबसे अच्छा समय: ebs_bekal_0014 अंश: ebs_bekal_0016 केरल में स्थित तटीय शहर बेकल अपने 17 वीं शताब्दी के किले और सुरम्य और रमणीय बैकवाटर्स के लिए प्रसिद्ध है । ebs_bekal_0018 गंतव्य मुख्य विवरण: ebs_bekal_0020 केरल के बीचों-बीच बसा हुआ बेकल नामक तटीय शहर, मधुरम समुद्र तटों, प्राचीन झरनों और साफ़ जल से भरे खूबसूरत बैकवाटर्स से घिरा हुआ शांत और शानदार पर्यटन स्थल है। ebs_bekal_0021 यहाँ एक अद्भुत 300 साल पुराने बेकल किला है और बहुत से शांत समुद्र तट हैं जो सूर्यास्त के मनमोहक दृश्य पेश करते हैं और पर्यटकों को पानी के खेल खेलने और प्रकृति की गोद में सैर करने के रोमांचक अवसर प्रदान करते हैं। ebs_bekal_0022 यह शहर एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी समेटे हुए है जो ग्रेनाइट मूर्तियों, नारियल के उत्पादों और लकड़ी की नक्काशी जैसे विभिन्न अद्वितीय हस्तशिल्पों में परिलक्षित होती है। ebs_bekal_0023 बेकल कन्नूर और कोझीकोड जैसे मनोरम स्थानों की ओर जाने के लिए प्रवेश द्वार भी है। ebs_bekal_0025 "किंवदंती है कि स्थानीय कन्नड़ लेखक राम नायक ने एक बार लिखा था कि बेकल नाम ""बलाकुलम"" से लिया गया है, जिसका अर्थ है एक बड़ा महल।" ebs_bekal_0026 यह एक महल का संदर्भ है जो कभी इस क्षेत्र में स्थित था। ebs_bekal_0027 समय के साथ, बालीकुलम पहले बेकुलम बना, और बाद में बेकल बन गया। ebs_bekal_0031 बेकल किला (विरासत) ebs_bekal_0033 अपनी अनुपम चाभी की घुंडी जैसी आकृति के लिए मशहूर बेकल किले का निर्माण 1650 ईस्वी में केलडी के शिवप्पा नायक द्वारा किया गया था। ebs_bekal_0034 इस किले में कोई महल या हवेली नहीं है क्योंकि यह कभी भी एक प्रशासनिक केंद्र नहीं था, लेकिन यह आज भी केरल के सबसे बड़े और सबसे अच्छी तरह से संरक्षित किलों में से एक है। ebs_bekal_0035 समुद्र तल से 130 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला देश के कोने-कोने से पर्यटकों को अपनी वास्तुकला और अपने आसपास की बेजोड़ सुंदरता के लिए आकर्षित करता है। ebs_bekal_0036 पर्यटक इस किले के पास बने अवलोकन टॉवर पर भी जा सकते हैं, जहां से झरोखों द्वारा आसपास के अद्भुत दृश्य देखे जा सकते हैं। ebs_bekal_0037 किले के पास स्थित अन्य आकर्षणों में अंजनेय मंदिर भी शामिल है, जो अपनी निर्माणकला और मखराले से बनी थैय्यम देवी की दो मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0038 पर्यटक पास स्थित प्राचीन बेकल समुद्र तट की यात्रा भी कर सकते हैं, जो कि शांत वातावरण के बीच आराम करने व तरोताजा होने के लिए एक आदर्श स्थान है। ebs_bekal_0040 बेकल बीच (प्रकृति) ebs_bekal_0042 बेकल के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक, प्राचीन बेकल बीच शांत माहौल में आराम करने और पुनः ऊर्जावान बनने के लिए एक आदर्श स्थान है। ebs_bekal_0043 बेकल बीच भारत के बेहतरीन सफेद रेत से बने समुद्र तटों में से एक है और यह वास्तव में एक आनंदपूर्ण स्थान है। ebs_bekal_0044 इस समुद्र तट से बेकल किले के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं। ebs_bekal_0045 ताड़ के पेड़ों की अभिनव छटा के साथ समुद्र के ऊपर चमकते सूर्य के भव्य दृश्य समुद्र तट के निर्मल आकर्षण को बढ़ाते हैं। ebs_bekal_0046 पर्यटक समुद्र के शांत पानी में तैर सकते हैं और सुव्यवस्थित बेकल बीच पार्क में भी जा सकते हैं, जो कई मनोरंजन सुविधाएँ प्रदान करता है। ebs_bekal_0047 समुद्र तट के ही एक विस्तार के रूप में यह पार्क बेकल किले के बगल में स्थित है। ebs_bekal_0048 इस पार्क में कुछ खाद्य स्टाल हैं जहां स्थानीय व्यंजनों का आनंद लिया जा सकता है। ebs_bekal_0049 बेकल रिसॉर्ट्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BRDC) द्वारा प्रशासित यह स्वच्छ और शांत बीच कासरगोड से 16 किमी की दूरी पर स्थित है। ebs_bekal_0051 कपिल बीच (प्रकृति) ebs_bekal_0053 मालाबार तट के अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध समुद्र तटों में से एक कपिल बीच एक कमाल का बैकवाटर स्थल (नदी की स्थिर उपशाखा) है। ebs_bekal_0054 सुनहरी रेत, झिलमिलाता पानी और पेड़ों के घने झुरमुट यहाँ आने वाले आगंतुकों को सम्मोहित करने में सफल रहते हैं। ebs_bekal_0055 केरल के सबसे ख़ूबसूरत रहस्यों में से एक माना जाने वाला कपिल बीच वास्तव में शांति से परिपूर्ण एक सुरम्य स्थान है। ebs_bekal_0056 अरब सागर के विहंगम दृश्य को देखने के लिए इस बीच पर स्थित कोडी की चट्टान पर चढ़ें। ebs_bekal_0057 बेकल किले से 6 किमी दूर स्थित यह समुद्र तट सूर्यास्त के अद्भुत नज़ारे पेश करता है। ebs_bekal_0058 इस समुद्र तट पर सुंदर और दुर्लभ घोंघे व सीपियाँ भी इकट्ठे किए जा सकते हैं और उन्हें यादगार के रूप में घर ले जाया जा सकता है। ebs_bekal_0059 पर्यटक इस बीच के हरे-भरे नारियल के पेड़ों से सुसज्जित लंबे रेतीले हिस्से पर भ्रमण करते हुए प्रकृति की सैर का आनंद भी ले सकते हैं। ebs_bekal_0061 बेकल होल एक्वा पार्क (यहाँ क्या करें) ebs_bekal_0063 बेकल होल एक्वा पार्क उत्तरी मालाबार क्षेत्र में अपनी तरह का विशिष्ट पर्यटन स्थल है जो रोमांचक जल सवारी और शांत वातावरण की ओर आगंतुकों को आकर्षित करता है। ebs_bekal_0064 बेकल बैकवाटर्स में स्थित यह वाटर पार्क दोस्तों और परिवार के साथ आराम करने और बेहतरीन छुट्टियाँ बिताने के लिए अद्भुत जगह है। ebs_bekal_0065 यह पार्क एक शांत और आनंददायक स्थल के रूप में स्थानीय लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। ebs_bekal_0066 पर्यटक यहाँ पानी के रोमांचक खेलों के साथ वॉटर साइकिल चलाने या नवीकृत पैडल नावों में सैर का आनंद भी ले सकते हैं। ebs_bekal_0067 आप कुछ हल्के वजन वाली चप्पू चालित नावें भी किराए पर ले सकते हैं और उन्हें चला कर एक अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। ebs_bekal_0068 बेकल होल एक्वा पार्क प्रसिद्ध बेकल किले के बिलकुल नज़दीक स्थित है, और इस शहर में मौज-मस्ती से जुड़ी गतिविधियों का केंद्र है। ebs_bekal_0070 वलियापारम्बा बैकवाटर्स (प्रकृति) ebs_bekal_0072 बेकल के बैकवॉटर्स के एकांतमयी विस्तार के रूप में वलियापारम्बा अपने सुंदर आकर्षण के लिए मशहूर है। ebs_bekal_0073 प्रकृति की जीवंतता को महसूस करने के लिए यह एक रमणीय स्थान है और प्रकृति-प्रेमियों के लिए एकदम सही अवकाश स्थान है। ebs_bekal_0074 इसकी हरी-भरी वनस्पतियां, शांत चमकते नील बैकवाटर्स और यहाँ का सुरम्य समुद्र तट इसे अनूठा बनाते हैं। ebs_bekal_0075 हालाँकि अपने सुंदर द्वीपों के कारण वलियापारम्बा एक प्रमुख पर्यटक बैकवाटर रिज़ॉर्ट के रूप में उभर रहा है, लेकिन यह अभी भी बहुत हद तक शांतिपूर्ण और गैर-व्यावसायिक सा है, जो इसे बेहतरीन गुणवत्ता वाले विश्राम व अवकाश के क्षण बिताने के लिए एक अद्भुत जगह का रूप देता है। ebs_bekal_0076 सूर्यास्त के समय यहाँ शांत नाव की सवारी करते हुए जब आप नारियल के पेड़ों के साथ सुशोभित सुंदर द्वीपों से गुजरते हैं, तो यहाँ के सुंदरतम क्षणों को महसूस करते हैं। ebs_bekal_0077 इन बैकवाटर्स की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए पर्यटक या तो हाउस बोट किराए पर ले सकते हैं या सार्वजनिक नाव या जेट्टी का भी प्रयोग कर सकते हैं। ebs_bekal_0078 यहाँ समुद्र तटों के किनारे पिकनिक भी मनाई जा सकती है। ebs_bekal_0079 वलियापारम्बा, बेकल से 30 किमी की दूरी पर स्थित है। ebs_bekal_0081 अनंतपुरा झील मंदिर (आध्यात्मिक) ebs_bekal_0083 अनंतपुरा झील मंदिर, एक झील के बीच में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित सुंदर 9 वीं शताब्दी का मंदिर है। ebs_bekal_0084 यह केरल का एकमात्र झील मंदिर है और इसे भगवान अनंतपद्मनाभ का मूल निवास माना जाता है। ebs_bekal_0085 इस मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए भक्तों को एक पुल को पार करना पड़ता है। ebs_bekal_0086 झील मंदिर के आसपास पहाड़ियों और ताड़ और नारियल के पेड़ों के अद्भुत नज़ारे दिखाई देते हैं। ebs_bekal_0087 यह भव्य मंदिर इस झील में निवास करने वाले एक 150 साल आयु के मगरमच्छ के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसे बाबिया/बाबिया कहा जाता है और इस मंदिर का संरक्षक माना जाता है। ebs_bekal_0088 मंदिर के दर्शनार्थी इस प्रसिद्ध मगरमच्छ की एक झलक पाने के लिए बेसब्र रहते हैं। ebs_bekal_0089 अनंतपुरा झील मंदिर, बेकल से 30 किमी की दूरी पर स्थित है और इस मंदिर तक पहुँचने का रास्ता बहुत सुरम्य और आनंददायक है। ebs_bekal_0091 होसदुर्ग किला (विरासत) ebs_bekal_0093 कासरगोड जिले के पहाड़ी क्षेत्र में कई प्रभावशाली किले स्थित हैं, जिन्हें या तो सैन्य गढ़ के रूप में बनाया गया था या जो महत्वपूर्ण वाणिज्यिक और सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में काम करते थे। ebs_bekal_0094 ऐसा ही एक किला प्रसिद्ध होसुर्ग किला है, जो इक्केरी राजवंश के सोमशेखर नायक द्वारा निर्मित कई प्रसिद्ध किलों में से एक है। ebs_bekal_0095 इस किले को लोकप्रिय रूप से कान्हागड किले के नाम से जाना जाता है और यह आगंतुकों को अद्भुत वास्तुकला से आकर्षित करता है। ebs_bekal_0096 इस किले के गोल गढ़ इसकी प्राथमिक विशेषताएं हैं और दूर से देखे जा सकते हैं। ebs_bekal_0097 होसबर्ग किले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र नित्यानंदश्रम भी स्थित है, जिसमें 45 गुफाएँ हैं। ebs_bekal_0098 पर्यटक इस किले के ठीक बगल में स्थित कर्पूरेश्वर मंदिर भी जा सकते हैं। ebs_bekal_0099 होसुर्ग किला बेकल से 15 किमी और कान्हागड से 5 किमी की दूरी पर स्थित है। ebs_bekal_0101 उल्लाल (आध्यात्मिक) ebs_bekal_0103 उल्लाल नाम का अनोखा नगर अपनी धार्मिक समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0104 इसका मुख्य आकर्षण सोमनाथेश्वर मंदिर है, जो अरब सागर के तट पर स्थित है। ebs_bekal_0105 16 वीं शताब्दी में रानी अब्बाका देवी के शासनकाल में निर्मित यह मंदिर अपनी अद्वितीय दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शांतिपूर्ण परिवेश के कारण आगंतुकों को आकर्षित करता है। ebs_bekal_0106 इसका एक अन्य आकर्षण सैय्यद मदनी की दरगाह है, जहाँ 400 साल पहले मदीना से यहाँ आए तथा अध्यात्म के माध्यम से गरीबों की मदद करने वाले सूफी फ़क़ीर सैय्यद मदनी की कब्र स्थित है। ebs_bekal_0107 इस दरगाह पर उर्स त्योहार के दौरान तीर्थयात्रियों का हुजूम लगता है, यह त्यौहार हर पांच साल में एक बार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। ebs_bekal_0108 पर्यटक 1926 में स्थापित सेंट सेबेस्टियन चर्च में भी जा सकते हैं। ebs_bekal_0109 यह मैंगलोर के आसपास स्थित सबसे प्रसिद्ध चर्चों में से एक है और अपनी शानदार वास्तुकला से पर्यटकों को आकर्षित करता है। ebs_bekal_0110 उल्लाल के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों में उल्लाल जामा मस्जिद भी शामिल है, जिसे फ़क़ीर सैय्यद मोहम्मद शरीफुल मदनी की याद में बनाया गया था। ebs_bekal_0112 उल्लाल इस देश के सबसे पुराने शहरों में से है, और कभी तुलु साम्राज्य की राजधानी था। ebs_bekal_0113 15 वीं शताब्दी के दौरान यहाँ पुर्तगालियों का शासन था और उसके प्रभाव को पूरे शहर में देखा जा सकता है। ebs_bekal_0115 मलिक दीनार मस्जिद (आध्यात्मिक) ebs_bekal_0117 केरल की पारंपरिक वास्तुकला शैली में निर्मित ऐतिहासिक मलिक दीनार मस्जिद को भारत में आने वाले पहले ज्ञात मुसलमानों में से एक मलिक इब्न दीनार द्वारा स्थापित किया गया था। ebs_bekal_0118 प्रतिवर्ष यहाँ मलिक दीनार और उनके साथी व्यापारियों के समूह के भारत आगमन की स्मृति में एक भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है। ebs_bekal_0119 किंवदंती है कि 1,500 साल पहले दीनार और उनके 12 साथी मुस्लिम भारत में आए, तथा अपने साथ अपना मज़हब भी लेकर आए। ebs_bekal_0120 मलिक दीनार मस्जिद का निर्माण 642 ईस्वी में पश्चिमी गंगा राजवंश के राजा चेरमन पेरुमल के शासनकाल में किया गया था। ebs_bekal_0121 इस मस्जिद के निर्माण में लकड़ी के स्तंभों पर अरबी नक्काशी का प्रयोग किया गया था, जिसकी खूबसूरती देखने लायक है। ebs_bekal_0122 यह मस्जिद विशेष रूप से उर्स समारोह के उत्सव के दौरान ज़बर्दस्त भीड़ से गुलज़ार होती है। ebs_bekal_0124 मल्लिकार्जुन मंदिर (आध्यात्मिक) ebs_bekal_0126 नारियल और ताड़ के लहराते हुए वृक्षों की छाँव में स्थित सुंदर मल्लिकार्जुन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और तीर्थयात्रियों को अपनी शानदार वास्तुकला और शांत वातावरण की ओर आकर्षित करता है। ebs_bekal_0127 मंदिर के समीप बहने वाली कुम्बला नदी इस स्थान की सुरम्य सुंदरता में और अधिक वृद्धि करती है। ebs_bekal_0128 पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति को हिंदू धर्मग्रन्थ महाभारत में वर्णित पांडवों में से एक अर्जुन द्वारा स्थापित किया गया था। ebs_bekal_0129 यह मंदिर हर साल मार्च के महीने में वार्षिक जात्रा महोत्सव का आयोजन करने के लिए भी प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0130 इस मंदिर के प्रमुख आकर्षणों में से एक यक्षगान प्रदर्शन है, जो हर शाम इसके परिसर में आयोजित किया जाता है। ebs_bekal_0131 इसके अतिरिक्त, इस मंदिर का एक अन्य आकर्षण वार्षिक गणेश चतुर्थी समारोह है जिस में राज्य के सभी हिस्सों से हजारों तीर्थयात्रियों भाग लेते हैं। ebs_bekal_0132 मल्लिकार्जुन मंदिर कासरगोड शहर के केंद्र में स्थित है और बेकल से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। ebs_bekal_0134 थालास्सेरी (विरासत) ebs_bekal_0136 सुरम्य परिवेश के मध्य स्थित तथा औपनिवेशिक सौन्दर्य से परिपूर्ण थलासेरी नामक तटीय शहर क्रिकेट, सर्कस और केक की भूमि के रूप में प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0138 ऐसा कहा जाता है कि थालास्सेरी में निवासरत अंग्रेज बहुत शौक से क्रिकेट खेला करते थे और भारत के सर्कस का जन्म इसी शहर में हुआ था। ebs_bekal_0139 स्वादिष्ट केक परोसने वाली कई बेकरियों के कारण थालास्सेरी केक खरीदने के लिए सबसे मशहूर जगहों में से एक बन चुका है। ebs_bekal_0141 कन्नूर जिले में स्थित यह खूबसूरत शहर अपने प्राचीन किलों, सुन्दर चर्चों, सुरम्य समुद्र तटों और अलंकृत मंदिरों की ओर पर्यटकों को आकर्षित करता है। ebs_bekal_0142 'मालाबार पेरिस' के नाम से प्रसिद्ध यह शहर ब्रिटिश, फ्रेंच और पुर्तगाली शासनकाल के दौरान मालाबार क्षेत्र में विशेष महत्व रखता था। ebs_bekal_0144 18 वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा निर्मित थालास्सेरी किला यहाँ का सबसे अधिक देखा जाने वाला पर्यटन स्थल है, जो अपनी अनूठी वास्तुकला और प्राचीन आकर्षण से आगंतुकों पर जादू बिखेरता है। ebs_bekal_0145 यह भव्य किला ख़ूबसूरत नक्काशीदार दरवाजों, विशाल खिड़कियों और आकर्षक भित्ति चित्रों से सुसज्जित है। ebs_bekal_0146 इस किले के ठीक बगल में स्थित सफेद रंग से रंगा इंग्लिश चर्च या सेंट जोंस का एंग्लिकन चर्च है, जिसे मालाबार तट पर बनाए जाने वाले सबसे पहले चर्चों में से एक कहा जाता है। ebs_bekal_0147 थालास्सेरी में मुगप्पिलनगढ़ समुद्र तट देश में सबसे बड़े ड्राइव-इन समुद्र तटों में से एक है जिन पर गाड़ियाँ चलाई जा सकती हैं, सूर्यास्त के दौरान उस समुद्र तट पर कार चलाने का अपना ही एक अलग आनंद है, थालास्सेरी उत्तर केरल के सर्वश्रेष्ठ तोहफ़ों में से एक है और केरल की यात्रा के दौरान इस तटीय शहर का दौरा ज़रूर किया जाना चाहिए। ebs_bekal_0149 लकड़ी नक्काशी (कला और शिल्प) ebs_bekal_0151 केरल का कासरगोड क्षेत्र यहाँ के मंदिरों और चर्चों में की जाने वाली लकड़ी की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0152 बेकल और उसके आस-पास के इलाकों में मंदिरों के दरवाजों पर देवी-देवताओं की छवियों को उकेरा गया है, जबकि मंदिर के शीर्ष पर की जाने वाली लकड़ी की त्रियायामी नक्काशी इनकी प्रमुख विशेषता है। ebs_bekal_0153 लकड़ी नक्काशी की प्रक्रिया में कागज के एक टुकड़े पर उसके चित्र को उकेरा जाता है जिसे एक तेज चाकू का उपयोग करके किनारों से काट लिया जाता है। ebs_bekal_0154 ऐसा करने से प्राप्त कटे हुए चित्र को फिर से नक्काशी का प्रारूप चिन्हित करने के लिए लकड़ी पर रखा जाता है, जिसके बाद कलाकार अंत में लकड़ी को विभिन्न आकृतियों और रूपरेखाओं के अनुसार उकेरते हैं। ebs_bekal_0155 यह बात ध्यान में रखना दिलचस्प है कि कागज़ पर कटे हुए प्रारूपों का उपयोग केवल बुनियादी रूपरेखा निर्धारित के लिए किया जाता है, जबकि आगे की अधिकांश जटिल नक्काशी का कार्य यहाँ के कलाकार अपनी कल्पना और रचनात्मकता के आधार पर ही करते हैं। ebs_bekal_0156 लकड़ी की वस्तुओं को तराशने के लिए आधार बनाए जाने वाले विषयों में पौराणिक महाकाव्यों, पुष्पसज्जा और पशुओं की मूर्तियों के दृश्य शामिल हैं, इसी प्रकार यहाँ लकड़ी की चौखटें और प्राचीन फर्नीचर की वस्तुएँ भी लकड़ी की नक्काशी के उपयोग से बनाई जाती हैं। ebs_bekal_0157 कुछ शिल्पकार भगवान बुद्ध और ईसा मसीह की मूर्तियाँ, कथकली के मुखौटे, पेन स्टैंड और ऐसी अन्य वस्तुएँ बनाने के लिए गुलाब की लकड़ी का उपयोग करते हैं। ebs_bekal_0159 नारियल उत्पाद (कला और शिल्प) ebs_bekal_0161 बेकल का क्षेत्र नारियल के वृक्षों से आच्छादित है। ebs_bekal_0162 इनकी बहुतायत के कारण केरल के प्रतिभाशाली शिल्पकार अपनी रचनात्मकता का उपयोग कर कई सदियों से नारियल के खोल से सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाते आ रहे हैं। ebs_bekal_0163 इन वस्तुओं को तैयार करने की प्रक्रिया जटिल है। ebs_bekal_0164 सबसे पहले, कठिन नारियल के खोल को चिकना किया जाता है, फिर इसके किनारे को विशेष रूप से इस उद्देश्य के लिए तैयार औजारों का उपयोग करके काटा जाता है। ebs_bekal_0165 बेकल में दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर कटोरे, चाय के बर्तन, कप, चम्मच और ऐश-ट्रे से लेकर सजावटी सामान जैसे लैंप शेड्स, गुलदान, दीवार पर लटकने वाली कलाकृतियों और पायदान तक, नारियल के खोल से बनी वस्तुओं को बेचने वाली हस्तशिल्प दुकानों की एक विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। ebs_bekal_0166 नारियल के खोल से बने हुक्के और बड़े फूलदानों जैसे कुछ विशिष्ट उत्पादों की सुंदरता को बढ़ाने तथा उन्हें मज़बूत बनाने के लिए उनमें पीतल का प्रयोग भी किया जाता है। ebs_bekal_0168 ग्रेनाइट की मूर्तियाँ (कला और शिल्प) ebs_bekal_0170 बेकल के प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपने शानदार शिल्प कौशल की मदद से ग्रेनाइट पत्थर में विभिन्न देवी-देवताओं की खूबसूरत मूर्तियाँ गढ़ने के लिए व्यापक ख्याति अर्जित की है। ebs_bekal_0171 इनके सदियों पुराने इस शिल्प को दूर-दूर से आए पर्यटकों ने सराहा है। ebs_bekal_0172 अलप्पुझा में स्थापित भगवान बुद्ध की करुमादिकुट्टन मूर्ति इस राज्य के मूर्तिकारों की रचनात्मक उत्कृष्टता का बेहतरीन नमूना है। ebs_bekal_0173 11 वीं शताब्दी में स्थापित की गई यह मूर्ति ठोस काले ग्रेनाइट से बनी है। ebs_bekal_0175 इन मूर्तियों को बनाने की कला पीढ़ियों से चली आ रही है और एक मूर्ति के निर्माण को पूरा करने में लगने वाला समय इसके आकार पर निर्भर करता है। ebs_bekal_0176 इन्हें बनाने के लिए कच्चा माल आम तौर पर तमिलनाडु, अंबासमुद्रम की खदानों से लाया जाता है और फिर उस पर नक्काशी की जाती है। ebs_bekal_0177 आप इस क्षेत्र में विभिन्न हस्तकला की दुकानों से ग्रेनाइट की सुन्दर नक्काशीदार मूर्तियों की खरीदारी कर सकते हैं। ebs_bekal_0179 योग और ध्यान (यहाँ क्या करें) ebs_bekal_0181 बेकल योग चिकित्सकों और ध्यान में रुचि लेने वाले लोगों के लिए बहुत उपयुक्त स्थान है। ebs_bekal_0182 केरल के योग अध्ययन और उपचार विधियों ने पिछले कुछ वर्षों में लोकप्रियता हासिल की है और कई योग संस्थान इस राज्य में स्थापित हो गए हैं। ebs_bekal_0183 बेकल का सुंदर शहर, योग के आश्रय में डूब जाने और प्रकृति की गोद में विश्राम करने के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करता है। ebs_bekal_0184 इस शहर के अद्भुत स्वास्थ्य रिट्रीट और स्पा अपने ताज़गी भरे विश्रामदायक माहौल के लिए यहाँ आने वाले यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। ebs_bekal_0185 शांत परिवेश के बीच प्रशिक्षित शिक्षकों से योग सीखने का अनुभव वास्तव में पारलौकिक है। ebs_bekal_0186 अगर आपको ऐसे उपचार की जरूरत है, तो आपको निश्चित रूप से बेकल में आना चाहिए और इस शांत शहर के शांतिपूर्ण परिवेश में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करना चाहिए। ebs_bekal_0188 कन्नूर (भ्रमण) ebs_bekal_0190 कन्नूर को अक्सर अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण केरल का ताज कहा जाता है, इस खूबसूरत शहर को कभी नौरा के नाम से जाना जाता था, जहां से राजा सोलोमन के जहाजों द्वारा यरूशलेम के पवित्र मंदिर के निर्माण के लिए लकड़ी ले जाई गई थी। ebs_bekal_0191 प्राचीन काल से यह स्थान अरबों, रोमनों और यूनानियों से व्यापारिक संबंधों के लिए मशहूर रहा है। ebs_bekal_0193 यह स्थान अपने मंदिरों और किलों के लिए भी प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0194 इसके अलावा अपने बुनाई उद्योग और काजू व्यापार के लिए ख्याति रखने वाला यह शहर अपने सुनहरी रेत वाले अद्भुत समुद्र तटों और थैय्यम देवी के प्रसिद्ध लोक कला रूपों की ओर पर्यटकों को आकर्षित करता है। ebs_bekal_0195 कोलाथिरी शासकों के शासनकाल के दौरान यह शहर एक प्रमुख बंदरगाह के रूप में प्रसिद्ध था। ebs_bekal_0196 कन्नूर से 3 किमी दूर स्थित कन्नूर का किला या सेंट एंजेलो का किला यहाँ का एक प्रमुख आकर्षण है, जिसे भारत के पहले पुर्तगाली वायसराय डोम फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 1505 में बनवाया था। ebs_bekal_0198 यह किला कन्नूर के औपनिवेशिक अतीत के गवाह के रूप में मौजूद है और यहाँ के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक भी है। ebs_bekal_0199 मोपिला खाड़ी और अरक्कल मस्जिद भी किले के पास स्थित हैं। ebs_bekal_0200 कन्नूर अपने प्राचीन समुद्र तटों के लिए भी प्रसिद्ध है और इन सब में सबसे लोकप्रिय मुजप्पिलंगड बीच है, जहाँ तक गाड़ियाँ ले जाई जा सकती हैं। ebs_bekal_0202 इस लंबे समुद्र तट पर कार चलाना वास्तव में एक रोमांचकारी अनुभव है और कन्नूर जाने पर इस तरह के एक दुर्लभ अवसर को कभी छोड़ना नहीं चाहिए। ebs_bekal_0203 कन्नूर में नडाल जंक्शन से केवल 2 किमी की दूरी पर स्थित, एज़हारा बीच शहर के समुद्र तटों में से एक है। ebs_bekal_0204 यह शहर अपने मंदिरों के लिए भी जाना जाता है और यहाँ स्थित प्राचीन पेरलासरी श्री सुब्रह्मण्य मंदिर केरल के सबसे भव्य मंदिरों में से एक है। ebs_bekal_0206 इस मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका तालाब है, जो अद्भुत वास्तुशिल्प कला का नमूना है और चित्र खिंचवाने के लिए उम्दा स्थान है। ebs_bekal_0207 भगवान सुब्रमण्य को समर्पित यह मंदिर पर्यटकों के लिए एक दर्शनीय स्थल है। ebs_bekal_0208 कन्नूर में पश्चिमी घाट में अरलम अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण है। ebs_bekal_0210 कन्नूर से 55 किमी की दूरी पर स्थित इस अभयारण्य में विविध वनस्पतियों और जीवों का निवास है। ebs_bekal_0211 इन प्राणियों में हिरण, हाथी, सूअर, बैल और विभिन्न प्रकार की गिलहरियाँ शामिल हैं। ebs_bekal_0212 कन्नूर बेकल से 80 किमी की दूरी पर स्थित है और यह दूरी दो घंटे में आसानी से तय की जा सकती है। ebs_bekal_0213 कोझिकोड (भ्रमण) ebs_bekal_0215 पहले कालीकट के नाम से जाना जाता कोझीकोड केरल के सबसे अच्छे शहरों में से एक है और अपने प्राचीन समुद्र तटों और असली मालाबार व्यंजनों के कारण यहाँ का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है। ebs_bekal_0217 कप्पड बीच, कोझिकोड के सबसे लोकप्रिय आकर्षणों में से एक है। ebs_bekal_0218 पर्यटक इस समुद्र तट पर विभिन्न जल क्रीड़ाओं में शामिल हो सकते हैं, इस समुद्र तट पर 27 मई, 1498 को वास्को डी गामा के भारत आने की स्मृति में स्थापित किया गया एक पत्थर का स्मारक भी मौजूद है। ebs_bekal_0219 यहाँ का एक अन्य प्रसिद्ध समुद्र तट कोझीकोड बीच है, जहाँ बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और पर्यटकों से आबाद रहता है, वे यहाँ के सुव्यवस्थित पैदल मार्ग पर सुबह और शाम टहलने का आनंद लेते हैं। ebs_bekal_0221 इस प्राचीन समुद्र तट पर खानेपीने के सामान, आइसक्रीम और स्थानीय रूप से बने शीतल पेय बेचने वाले विक्रेताओं की पंक्तियाँ हैं। ebs_bekal_0222 यदि आप एक शांतिपूर्ण अनुभव चाहते हैं, तो बेपोर बीच पर जाएँ जहां आप प्रकृति की गोद में सैर का आनंद ले सकते हैं। ebs_bekal_0223 पक्षीप्रेमियों के मध्य यहाँ का कलालुंडी पक्षी अभयारण्य काफी प्रसिद्ध है, जहाँ पक्षियों और मछलियों की एक विविध प्रजतियाँ पाई जाती हैं। ebs_bekal_0225 कोझीकोड में लिए जाने लायक सबसे बेहतरीन अनुभवों में से एक इरिंगा शिल्प ग्राम का भ्रमण है, जहां आप कुशल कारीगरों और शिल्पकारों को देख सकते हैं और उनके द्वारा बनाए गए उत्तम हस्तशिल्प उत्पाद खरीद सकते हैं। ebs_bekal_0226 इस शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की एक झलक पाने के लिए ईस्ट हिल पर स्थित पजसिराजा संग्रहालय देखा जा सकता है। ebs_bekal_0228 राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा संचालित इस संग्रहालय में प्राचीन भित्ति चित्र, कांस्य के सिक्के और महापाषाण संरचनाओं का एक बड़ा संग्रह मौजूद है। ebs_bekal_0229 संग्रहालय के ठीक बगल में एक कलावीथि मौजूद है जहाँ प्रख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा की कुछ बेहतरीन कृतियों का प्रदर्शन किया जाता है। ebs_bekal_0230 कोझीकोड अपने अद्भुत झरनों के लिए भी प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0232 इस शहर से 46 किमी की दूरी पर स्थित अरिप्पारा जलप्रपात जहाँ एक ओर प्रकृति प्रेमियों को स्वर्ग जैसा अनुभव देता है वहीं दूसरी ओर यहाँ के सफेद जल में राफ्टिंग करने के शौक़ीन रोमांचप्रेमियों को भी बड़ी संख्या में आकर्षित करता है। ebs_bekal_0233 अपने मशहूर सुगंधित मसालों के अलावा कोझिकोड शहर यहाँ की पहचान बन चुके लज़ीज़ कोझिकोडियन हलवे, केले के चिप्स और लघु सर्पनौकाओं जैसे सुन्दर स्मृति चिह्नों के लिए भी प्रसिद्ध है। ebs_bekal_0235 शहर का एसएम स्ट्रीट मार्केट मालाबार क्षेत्र के सबसे पुराने बाजारों में से एक है और पर्यटकों के लिए खरीदारी करने का एक बेहतरीन ठिकाना है। ebs_bekal_0236 कोझीकोड, बेकल से 170 किमी की दूरी पर स्थित है और एक दिवसीय भ्रमण के लिए उम्दा जगह है। ebs_bekal_0241 लज़ीज़ बिरयानी से लेकर मीठे हलवे तक बेकल में व्यंजनों की भरमार है ebs_bekal_0243 स्वादिष्ट भोजन ebs_bekal_0245 बिरयानी ebs_bekal_0247 मालाबार बिरयानी के नाम से प्रसिद्ध यह व्यंजन सुगंधित चावल कई तहों में मुर्गे के माँस, तले हुए प्याज, सूखे मेवे और घी के साथ बनाया जाता है। ebs_bekal_0249 इस सामग्री को एक साथ मिलाया जाता है और फिर बर्तन में बंद कर के धीरे-धीरे भाप में पकाया जाता है, जिसे दम विधि कहा जाता है। ebs_bekal_0250 इस उम्दा व्यंजन की कई क़िस्में प्रचलित हैं, तथा प्रत्येक राज्य और क्षेत्र में इसे अलग विधि से तैयार किया जाता है। ebs_bekal_0251 मालाबार शैली की विधि में घी और लौंग, इलायची, दालचीनी और जायफल जैसे मसलों का प्रचुर मात्र में उपयोग इस पकवान को अच्छी खुशबू देने का काम करता है। ebs_bekal_0252 इसके अलावा, पारंपरिक बिरयानी के विपरीत, इस विशेष शैली में छोटे आकार के चावल की प्रजाति का उपयोग किया जाता है जिसे खाइमा या जेरेकासला चावल कहा जाता है। ebs_bekal_0253 हलवा ebs_bekal_0255 अरबी परंपराओं द्वारा प्रेरित यह प्रसिद्ध मिठाई चावल या आटे से बनाई जाती है जिसे सूखे फलों से सुसज्जित किया जाता है। ebs_bekal_0257 पायसम ebs_bekal_0259 दूध, चावल, घी और चीनी या गुड़ से बना पायसम मीठी और मलाईदार खीर की तरह होता है। ebs_bekal_0261 इसे पारंपरिक रूप से सूखे मेवों, नारियल और किशमिश द्वारा सुसज्जित किया जाता है। ebs_bekal_0262 कई बार चावल की जगह सेंवई का प्रयोग किया जाता है। ebs_bekal_0263 यहाँ कैसे पहुँचें ebs_bekal_0267 बेकल से निकटतम हवाई अड्डा कर्नाटक में स्थित मैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो शेष भारत के प्रमुख स्थानों से भलीभांति जुड़ा हुआ है। ebs_bekal_0271 बेकल से निकटतम रेलवे स्टेशन 16 किमी दूर कासरगोड में स्थित है। ebs_bekal_0275 बेकल इस जिले के साथ-साथ राज्य के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से सुव्यवस्थित व मज़बूत सड़कों के माध्यम से भलीभांति संपर्क में है।