ID SENT ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0002 दिल्ली ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0004 टैगलाइन-भारत की मनोरम राजधानी ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0006 पर्यटन का सर्वोत्तम समय-अक्टूबर से मार्च महीने तक ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0008 अंश: भारत की राजधानी दिल्ली, शानदार अतीत, संपन्न आधुनिकता और रोमांचक अनुभवों का एक अद्भुत मिश्रण है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0012 पुराने स्मारकों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के उद्यमी लोगों के निरंतर विलयन से बनता यह जीवंत और आधुनिक महानगर दिल्ली, भारत की राजधानी होने के साथ-साथ एक आकर्षक पर्यटन स्थल भी है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0013 यमुना नदी के किनारे पर बसा, लगभग 1,000 साल पुराना यह राजधानी शहर दिल्ली, विरासत और समकालीन दोनों तरह के अनुभवों की एक सम्मोहक मिश्रित चित्रकारी प्रस्तुत करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0014 यह शहर आज भी अपनी सदियों पुरानी विरासतों को गर्व से संजोए हुए है; और साथ-साथ यह भारतीय लोकतंत्र की राजधानी और आत्मा भी है, अपनी इसी आधुनिकता के कारण यह शहर दुनिया के सबसे उन्नत महानगरों से बराबरी का दर्जा बनाए हुए है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0016 राजधानी के पुरानी दिल्ली के आसपास का चहलपहल से भरा हुआ इलाका, आज भी अपनी प्राचीनता को बरकरार रखे हुए है, और आप यहां के व्यंजनों की संस्कृति को देखकर हैरान रह जाएंगे, यहां की घुमावदार गलियों में दुकानदार सभी तरह की चीज़ें बेचते नज़र आ जाएंगे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0017 पुरानी दिल्ली में घूमना वाकई एक अविस्मरणीय अनुभव है, यहां आप कुछ प्राचीनतम व्यंजनों को चख सकते हैं, जो इनके स्वाद के उद्गम का दावा मुगलों के रसोई से करते हैं, साथ ही आप यहां की विशिष्ट संस्कृति में पूर्णतः सराबोर हो जायेंगे जब आप यहां पर उत्तम हस्तशिल्प, थोक में कपड़े और आपकी इच्छा से निर्मित आभूषण आदि सभी चीजें बजट में मिलते पायेंगे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0019 इसकी भूलभुलैया जैसी चांदनी चौक की गलियों के बीच शानदार जामा मस्जिद विद्यमान है, जो देश की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0020 यहां से कुछ ही दूर पर दिल्ली का गौरव, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, लाल किला है, जो मुगल सम्राट शाहजहां की विरासत है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0021 कई पुराने किले, प्रतिष्ठित कुतुब मीनार और कई प्राचीन मंदिर, पुरातात्विक रत्नों के रूप में इस राजधानी में भरी पड़ी हैं, और ये सभी इमारतें उन मुगल सम्राटों को श्रद्धांजलि देती हैं जिन्होंने अपने साम्राज्य का प्रशासन दिल्ली से किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0022 वहीं अगर हम राजधानी के आधुनिक हिस्से 'नई दिल्ली' की बात करें तो यह इलाका दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का शक्ति केन्द्र है, जो प्रतिष्ठित सरकारी संरचनाओं, चकाचौंध करने वाले मॉल, विस्तृत फैले आवासीय परिसरों, शानदार रेस्तरां और कैफे, भव्य मंदिरों और हरे-भरे उद्यानों से भरा पड़ा है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0023 यह जगह भोजन के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है, जहां आप सभी भारतीय राज्यों के लगभग सभी प्रसिद्ध व्यंजनों को चख सकते हैं, दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय से लेकर स्थानीय व्यंजनों तक की भरमार है, जो किसी भी व्यंजन-पसंद पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0025 यह शहर खरीदारी का एक केंद्र है, जहां आपकी सभी जरूरतों की चीजें, जैसे किताबें, फैशनेबल कपड़े और उत्तम आभूषण से लेकर सभी तरह के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और जूतों तक मिलेंगे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0026 दिल्ली ज्यादातर उच्च-स्तरीय खुदरा स्टोर और ब्रांड्स का घर है, जो खरीदारों को सीधे-सीधे कई विकल्प प्रदान करते हैं, इसके साथ ही इन दुकानों में पुराने शिल्प और वस्त्रों की भी अच्छी खासी किस्में मिलती हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0027 दिल्ली का प्रमुख स्थान, देश के राजनीतिक केंद्र के रूप में निर्विवाद है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0029 एक केंद्र शासित प्रदेश विस्मयकारी संरचनाओं का घर है, जैसे भारतीय संसद, राष्ट्रपति भवन या राष्ट्रपति निवास, और राज घाट (राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी का स्मारक) और साथ के पड़ोसी इलाके जैसे कनॉट प्लेस और लोधी कॉलोनी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0030 दिल्ली एक सदी से भी अधिक समय से भारत की राजधानी है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0031 जहां एक ओर इतिहास के कुछ महान और शक्तिशाली शासकों ने इस शहर पर अपना आधिपत्य जमाया था, वहीं दूसरी ओर, यह शहर अपने उत्पत्ति का इतिहास हिंदू महाकाव्य महाभारत में पाता है, जब इसे इंद्रप्रस्थ के रूप में जाना जाता था, जो पांडवों का निवास स्थान था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0033 सन् 1192 में, अफगान के योद्धा मुहम्मद गौरी ने इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और सन् 1206 में उसने दिल्ली सल्तनत की नींव डाली। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0034 सन् 1398 में, तुर्क-मंगोल शासक, तैमूर ने इस शहर पर आक्रमण किया और यहां अपने राज्य की स्थापना की। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0035 बाद में लोदी वंश के राजाओं ने दिल्ली पर शासन किया, जिन्हें बाबर ने उखाड़ फेंका, और उसने भारत में मुगल साम्राज्य की संस्थापना की। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0036 शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान, दिल्ली मुग़ल साम्राज्य की राजधानी बनी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0037 मुगल काल तीन शताब्दियों तक चला और बाद में भारत अंग्रेजों के हाथों में आ गया, जिन्होंने सन् 1911 में अपनी राजधानी को कलकत्ता से बदलकर दिल्ली कर दिया। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0038 अन्य प्रमुख राजवंशों, जैसे तुगलक और खिलजी के दौरान भी दिल्ली उनकी राजधानी थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0039 स्वतंत्रता के बाद सन् 1947 में, नई दिल्ली को भारतीय गणराज्य की आधिकारिक राजधानी बनी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0043 लाल किला (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0045 दिल्ली के केंद्र में स्थित राजसी लाल किला, लाल बलुआ पत्थर से बना मुगलों की वास्तुकला की विरासत के प्रमाण के रूप में है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0046 दुनिया के सबसे खूबसूरत स्मारकों में से एक, यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, किला-ए-मुबारिक के रूप में प्रसिद्ध है, और यह महलों, मंडपों और मस्जिदों से परिपूर्ण है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0048 मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा, अपनी राजधानी शाहजहानाबाद के महल किले के रूप में निर्मित लाल किला, अपनी विशाल किलेबंदी की दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0049 किले की वास्तुकला इस्लामिक, फारसी, तैमूरिद और हिंदू शैलियों के बेजोड़ सम्मिश्रण को दर्शाती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0050 यहां के प्रमुख आकर्षणों में एक हैं दीवान-ए-ख़ास, जिसे शाह महल के नाम से भी जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर दीवान-ए-आम या हॉल ऑफ़ पब्लिक ऑडियंस और रंग महल (हरम का एक हिस्सा) है, जिसे इम्तियाज़ महल के नाम से भी जाना जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0051 यहां के अन्य स्मारक हैं, नौबत खाना (ड्रम हाउस), जहां से शाही संगीतकारों द्वारा शाही परिवार के सदस्यों के आने की घोषणा की जाती थी; हम्माम (शाही स्नानघर), और मुतम्मन बुर्ज या मुसम्मन बुर्ज, यह एक मीनार है जहां सम्राट खुद अपनी प्रजा से मिलने आते थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0052 जब मुगलों की शक्ति कमजोर पड़ने लगी तो सन् 1739 में फारसियों ने, नादिर शाह की अगुवाई में आक्रमण कर किले को लूट लिया। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0053 आक्रमणकारियों द्वारा किले के अधिकांश ख़ज़ाने लूट लिए गए, जिसमें मशहूर मयूर सिंहासन भी शामिल था, जिसे शाहजहाँ ने सोने और रत्नों से जड़वा कर बनवाया था, इन रत्नों में कीमती कोहिनूर हीरा भी शामिल था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0055 यहां स्मारकों के अलावा, हर शाम आयोजित किया जाने वाला साउंड एंड लाइट शो 'सोन एट लुमिये' है, जो पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0056 एक घंटे तक चलने वाला यह कार्यक्रम भारत में मुगल साम्राज्य के इतिहास को दर्शाता है, और उनके गौरवशाली अतीत के साथ-साथ उनके पतन की ओर ले जाने वाले घटनाओं के चरणों की झलक भी पेश करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0057 इसमें व्यक्त किये गये वृतांतों को महान अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज़ दी है, जिसके चलते यह शो दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर लेता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0059 किले का प्रवेश द्वार लाहौर गेट है, जो रास्ता बाज़ार के इलाके चट्टा चौक की ओर जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0060 यह चौक, एक मेहराबदार मार्ग है जहां शाही दर्जी और व्यापारियों की दुकाने हैं, जो दुकानें देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट हस्तशिल्प और कपड़ों को बेचते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0061 बहुत कम लोग जानते हैं कि लाल किले में कई सैन्य बैरके भी हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने बनाया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0062 लाल और सफ़ेद बलुआ पत्थर से निर्मित, ये बैरक औपनिवेशिक वास्तुकला के बेहतरीन नमूने हैं, और इसकी प्राचीन सौंदर्य से कोई भी तुरंत ही प्रभावित हो जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0063 सन् 1857 में, ये बैरक ब्रिटिश सेना को यहां रखने के लिये बनाये गये थे जब उन्होने बहादुर शाह जफर, अंतिम मुगल सम्राट को उनकी सत्ता से हटा दिया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0064 ब्रिटिश शासन समाप्त होने के बाद, बैरकों का उपयोग भारतीय सेना के जवानों द्वारा किया जाने लगा, पर भारतीय सेना ने भी इन्हें सन् 2003 में खाली कर दिया। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0065 आज, इनमें से कुछ बैरकों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहयोग से संग्रहालयों और कला दीर्घाओं में बदल दिया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0067 हर साल स्वतंत्रता दिवस पर भारतीय प्रधानमंत्री लाहौर गेट की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, जो लाल किले को देश के सबसे महत्वपूर्ण स्मारकों में से एक बनाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0068 इसकी अनोखी बनावट और शानदार वास्तुकला ने राजस्थान, दिल्ली और आगरा के कई स्मारकों के निर्माण को प्रेरित किया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0070 इस ऐतिहासिक किले की यात्रा, आपको दिल्ली के बीते युग का एक शानदार अनुभव पाने का मौका प्रस्तुत करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0072 लाल किले के निर्माण में 10 वर्ष (सन् 1638-48) लगे थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0073 उस समय किले के बगल से यमुना नदी गुज़रती थी, जिसने वक्त के साथ अपने बहाव का रूख बदल कर अब दूर हो गई है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0074 इतिहासकार यह भी बताते हैं कि किले से एक नहर बाहर निकलती थी, जिसके दोनो ओर पेड़ लगे थे, इसे नहर-ए-बिहिश्त या स्वर्ग की नहर कहा जाता था, और इस नहर के पानी का स्रोत यमुना नदी थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0076 कुतुब मीनार (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0078 दिल्ली सल्तनत के इतिहास जितनी पुरानी यह प्रतिष्ठित 'कुतुब मीनार', ईंटों से बनी दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है, जो शहर की आकाश रेखा पर प्रबल रूप से छाई रहती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0079 73 फुट ऊंची यह पांच मंजिला टॉवर, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, मध्ययुगीन भारत की सबसे शानदार इमारतों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0080 मीनार की पहली तीन मंजिले लाल बलुआ पत्थर में बनी हैं, जब कि चौथी और पांचवीं मंजिलें संगमरमर और बलुआ पत्थर से बनी हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0081 सभी पांच मंजिलें बाहर निकली दीर्घाओं से सुसज्जित हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0083 दिल्ली के महरौली क्षेत्र में स्थित, कुतुब मीनार को कुतुब-उद-दीन ऐबक द्वारा बनवाया गया था, कुतुब-उद-दीन ने ही भारत में मामलुक वंश (सन् 1206-1290) की नींव डाली थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0084 अफगानिस्तान के गजनी शहर के विजय स्तम्भ से प्रेरित होकर, कुतुब-उद-दीन ने इसका निर्माण कार्य 1192 ईस्वी में शुरू कराया था, लेकिन दुर्भाग्यवश, कुतुब-उद-दीन-ऐबक, इसके पूरा होने तक जिंदा न रह सका। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0085 मीनार को आखिरकार उसके उत्तराधिकारियों इल्तुतमिश और फिरोज शाह तुगलक ने पूरा करवाया। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0087 यहां का एक और आकर्षण कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद है, जो मीनार के ठीक बगल में है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0088 कुतुब-उद-दीन-ऐबक द्वारा निर्मित इस मस्जिद को कुतुब परिसर की पहली इमारत माना जाता है, जब कि इस परिसर में कई और स्मारकें मौजूद हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0089 इसमें सबसे लोकप्रिय 'लौह स्तंभ' है, जिसे अशोक स्तंभ के नाम से भी जाना जाता है, और जो चौथी शताब्दी का बना हुआ है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0090 यह लगभग 24 फीट ऊंचा है और छह टन से अधिक वजन का है, कहा जाता है कि इसमें कभी ज़ंग नहीं लगती। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0091 परिसर में आने वाले पर्यटकों के बीच यह एक लोकप्रिय धारणा है कि यदि आप स्तंभ से अपनी पीठ सटाकर, उलटे बाहों से स्तंभ को चारों ओर घेरकर यदि हाथों की उंगलियों को एक दूसरे से छू लेते हैं, तो आप जो भी इच्छा करेंगे वह पूरी हो जाएगी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0092 इसका उदाहरण हिंदी फिल्म 'चीनी कम' के एक दृश्य में देखा जा सकता है, जिसमें प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अभिनय किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0094 पर्यटक अलाई दरवाजा भी जा सकते हैं जो लाल बलुआ पत्थरों से बना एक गुंबददार प्रवेश द्वार है, जिसे सफेद संगमरमर के पत्थरों से सजाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0095 अलाउद्दीन खिलजी द्वारा निर्मित, यह भव्य स्मारक कुशल तुर्की कारीगरों के शिल्प कौशल के वसीयतनामे के रूप में खड़ा है, जिन्होंने इसे बनाया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0096 यह इमारत के पास ही अलाई मीनार है, जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाना शुरू किया था और जिसे वह कुतुब मीनार से दोगुना ऊंचा बनवाना चाहता था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0097 दुर्भाग्यवश, सन् 1316 में खिलजी की मृत्यु के बाद इस मीनार का निर्माण ठप पड़ गया। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0098 आज, इस मीनार की पहली मंजिल पर एक विशाल मलबे की चिनाई देखने को मिलती है, जिसे पत्थर की एक परत से ढका जाने वाला था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0099 यहां मौजूद इल्तुतमिश का मकबरा खुद सम्राट द्वारा बनवाया गया था, और दिल्ली में बनने वाले पहले मकबरों में से एक था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0101 पर्यटक महरौली पुरातत्व पार्क में भी जा सकते हैं, जहां दिल्ली सल्तनत के कभी शासक रहे घियास-उद-दीन बलबन की कब्र है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0102 कुतुब परिसर में जमाली कमाली मस्जिद है, और एक सूफी संत की कब्र भी है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0103 यहां नवंबर और दिसंबर के महीनों में तीन दिवसीय 'कुतुब महोत्सव' आयोजित किया जाता है, जिसमें होने वाला शास्त्रीय नृत्य और संगीत, भारी मात्रा में भीड़ को परिसर की ओर आकर्षित करती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0105 हुमायूँ का मकबरा (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0107 बड़े पैमाने पर अच्छे तरीके से छटाई किये उद्यानों से घिरा, हुमायूँ का विशाल मकबरा, दिल्ली के शानदार स्मारकों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0108 यह भारतीय उपमहाद्वीप में निर्मित पहला उद्यान मकबरा है, मुगल वास्तुकला का पर्याय बन चुके भव्य मकबरों में से एक, यह मकबरा ऐसा पहला स्मारक है, जो प्रेम और हसरत की एक कालातीत गाथा को दर्शाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0109 मुग़ल सम्राट हुमायूँ की पहली पत्नी, साम्राज्ञी हाजी बेगम ने यह मकबरा, अपने शौहर हुमायूँ की याद में बनवाया था, इस मकबरे में सम्राट और उनकी बेगम दोनों की कब्रें मौजूद हैं, यह मकबरा आज भी उनके शाश्वत प्रेम के वसीयत के रूप में खड़ा है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0111 फारसी वास्तुकार मिरक मिर्जा घियास द्वारा डिजाइन की गई यह भव्य इमारत, दुनिया के सभी कोनों से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0112 जैसे ही आप ताड़ के पेड़ों से घिरे उद्यान में प्रवेश करेंगे, आप सामने ही एक सुंदर फव्वारा पाएंगे, जो फोटोग्राफी के लिए एक शानदार पृष्ठभूमि देता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0113 इस पूरे उद्यान को उद्यानपथों और पानी के नहरों द्वारा चार मुख्य भागों में विभाजित किया गया है; यह उद्यान इस्लाम के पवित्र ग्रंथ कुरान में वर्णित ' स्वर्ग उद्यान (पैराडाइज गार्डन)' का पर्याय है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0114 उन चार मुख्य भागों को, पुनः 36 छोटे भागों में विभाजित किया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0116 स्मारक तक पहुंचने के लिए आपको राजसी द्वारों से गुजरना पड़ता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0117 इसके अंतिम द्वार से ठीक पहले, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा एक दर्शक दीर्घा बनाई गई है, जहां इस स्मारक की पुरानी तस्वीरें प्रदर्शनी में लगाई गई हैं, जो इस मकबरे की भव्यता को दर्शाती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0119 मकबरे की मुख्य इमारत लाल बलुआ पत्थर से बनी है, जबकि मकबरा सफेद और काले संगमरमर से बनाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0120 एक आकर्षक द्वार से होते हुए आप मध्य कक्ष में जाएंगे, जिसमें हुमायूँ का मकबरा है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0121 इस हॉल को जटिल नक्काशीदार खिड़कियों और खूबसूरती से डिजाइन की गई छत से सजाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0122 यह पूरी इमारत एक काफी बड़े चबूतरे पर बनी हुई है, जिस पर कई और मकबरे हैं जिनमें साम्राज्ञी हाजी बेगम और राजकुमार दाराह शिकोह के मकबरे भी शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0124 इस स्मारक का एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि इसमें हुमायूँ के पसंदीदा नाई का मकबरा भी है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0125 सन् 1857 में, अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह ज़फ़र ने, अंग्रेजों द्वारा बंदी बनाये जाने और निर्वासित किये जाने के पहले, इस स्मारक का उपयोग अपने आश्रय के लिये किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0126 परिसर के दाईं ओर ईसा खान की कब्र है, जो शेरशाह सूरी के दरबार में एक दरबारी थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0127 यह लोदी-युग की वास्तुकला को दर्शाता है, और इसका निर्माण 16 वीं शताब्दी में किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0129 हुमायूँ का मकबरा के बेहद करीब, दिल्ली के एक अन्य लोकप्रिय आकर्षण है, हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह, इस दरगाह का निर्माण 14 वीं शताब्दी के सूफी संत निज़ामुद्दीन औलिया की कब्र के चारो ओर किया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0131 इंडिया गेट (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0133 देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि के रूप में खड़ी यह इमारत, दिल्ली के प्रतिष्ठित स्थलों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0134 इंडिया गेट का निर्माण बलुआ पत्थर से किया गया है, और इसकी उंचाई 42 मीटर है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0135 यह इमारत राष्ट्रीय राजधानी में बनी अपनी तरह की पहली इमारत है, जिसे अंग्रेजों ने बनवाया था, सन् 1919 के अफगान युद्ध में, उत्तरी पश्चिमी सीमा पर मारे गए 13,516 सैनिकों और प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सेना के 90,000 सैनिकों के नामों को इंडिया गेट की दीवारों पर अंकित किया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0136 स्मारक के आधार का निर्माण भरतपुर के लाल रंग के पत्थरों से किया गया है, इंडिया गेट की संरचना फ्रांस की संरचना, आर्क-द-ट्रायम्फ के समान है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0138 इंडिया गेट हरे-भरे बागानों से घिरा हुआ है, जो परिवारों के साथ पिकनिक मनाने के स्थल के रूप में काफी लोकप्रिय है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0139 इस स्मारक पर जाने का सबसे अच्छा समय रात के वक्त होता है, रात के समय इंडिया गेट सुनहरी रोशनी में नहाया हुआ लगता है और अंधेरे आकाश में इसकी चमक और निखर कर आती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0141 इस भव्य स्मारक की आधारशिला सन् 1921 में ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा रखी गई थी, जिसे ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियन्स द्वारा डिजाइन किया गया था, इन्होंने ही नई दिल्ली की कई औपनिवेशिक संरचनाओं को भी डिजाइन किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0142 एक दशक बाद, यह स्मारक तत्कालीन वाइसराय, लॉर्ड इरविन द्वारा भारत को समर्पित किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0144 संगमरमर से बनी 'अमर जवान ज्योति', इंडिया गेट के समक्ष स्थित है और इसका निर्माण वर्ष 1971 में किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0145 इसे वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के दौरान प्राण न्योछावर करने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए इसे बनाया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0146 इसमें जलने वाली लौ की पहरेदारी वर्दीधारी सैनिकों द्वारा अनवरत की जाती है, लौ के समीप एक चमकती हुई राइफल गड़ी है, जिसके ऊपर सैनिक का एक हेलमेट रखा हुआ है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0148 इंडिया गेट पर गणतंत्र दिवस के दिन एक भव्य परेड का आयोजन होता है, और इस दिन राष्ट्रपति अमर जवान ज्योति पर माल्यार्पण करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0149 इसके बाद, राजपथ पर एक भव्य परेड आयोजित की जाती है और आप एक साफ-सुथरी फाइल में प्रतियोगियों, टैंकों, जीवंत झांकियों, हथियारों को देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0150 स्कूली बच्चे और लोक नर्तक परेड में शामिल होते हैं और पूरे मामले में एक सांस्कृतिक स्पर्श जोड़ते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0152 राष्ट्रीय जीव उद्यान (करने लायक चीजें) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0154 नेशनल जूलॉजिकल पार्क यानी दिल्ली का चिड़ियाघर, पुराने किले के पास स्थित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0155 176 एकड़ के क्षेत्र में फैला, यह पार्क वनस्पतियों और पक्षियों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करता है, और यहां 1,000 से अधिक विभिन्न प्रकार वन्य पशु निवास करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0157 आप यहां पानी में आराम फरमाते हुए विशाल दरियाई घोड़ों को देख सकते हैं, यहां आप चिंपैंजियों को एक दूसरे को छेड़ते हुए, मौज मस्ती करते हुए और बंदरों की बेतरतीब हरकतों को भी देख सकते हैं, इसके अलावा आप एशियाई शेरों की दहाड़ भी सुन सकते हैं, जो बाड़े में अपने अधिकार को दर्शाते हैं, दिल्ली के चिड़ियाघर में कई मजेदार अनुभव आपका इंतजार कर रहे हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0158 इसके अलावा आप यहां शाही बंगाल टाइगर, दलदली हिरण, भारतीय गैंडे, ब्रो एन्टर्ल्ड हिरण आदि को भी देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0159 यहां पक्षी प्रेमियों के लिए, प्रवासी पक्षियों जैसे स्टॉर्क और मोरों की तो भरमार है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0161 रोमांचक अनुभव के लिए, पर्यटक रेप्टाइल हाउस भी जा सकते हैं, जहां छिपकलियों और सांपों की विभिन्न प्रजातियां मौजूद हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0163 चिड़ियाघर का उद्घाटन सन् 1959 में किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0164 इसमें रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई शेर, दलदली हिरण, भारतीय गैंडे आदि प्रजातियों के संरक्षित प्रजनन कार्यक्रम भी हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0165 चिड़ियाघर में घूमने के लिए आप बैटरी-कार भी किराए पर ले सकते हैं, जो आपको पूरे चिड़ियाघर का दौरा कराती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0167 चिड़ियाघर में एक पुस्तकालय भी है, जिसमें वन्यजीवों पर लिखी गई पुस्तकों का संग्रह है और ये किताबें चिड़ियाघर के इतिहास के बारे में भी जानकारियां प्रदान करती हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0168 पर्यटकों को परिसर में पीने के पानी के अलावा किसी भी प्रकार के भोजन लाने की अनुमति नहीं है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0170 बहाई लोटस टेम्पल (आध्यात्मिक) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0172 एक विशाल कमल के आकार में निर्मित, बहाई लोटस टेम्पल, एक बेहद ही शांत स्थल है जो दूर-दूर से पर्यटकों को इसे देखने के लिये आकर्षित करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0173 यह बहाई धर्म का मंदिर है जिसका उद्देश्य सभी जातियों और क्षेत्रों के लोगों के बीच सार्वभौमिक मूल्यों के आधार पर सामूहिक विश्वास की एकता कायम करना है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0174 सभी धर्म और आस्था के लोग बिना किसी भेदभाव के इस मंदिर में आ सकते हैं और अपने धर्मों से संबंधित धार्मिक मंत्रों का उच्चारण भी कर सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0175 वर्ष 1986 में ईरानी-कनाडाई वास्तुकार, फ़रीबुर्ज़ साहबा ने इस मंदिर का डिज़ाइन किया था, कमल के आकार वाले इस मंदिर में 27 सफेद संगमरमर की पंखुड़ियां हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0176 इस मंदिर में नौ दरवाजे हैं, जो एक केंद्रीय प्रार्थना कक्ष में खुलते हैं जो लगभग 40 मीटर ऊंचा है, और इसकी क्षमता 2,500 लोगों की है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0177 मंदिर परिसर में पानी से लबालब भरे नौ तालाब हैं, जो शाम के समय बेहद लुभावने लगते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0178 यह मंदिर अपने वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0180 चांदनी चौक (करने लायक चीज़ें) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0182 पुरानी दिल्ली की प्राचीनता को संजोये चांदनी चौक एक भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र है जो राष्ट्रीय राजधानी के सबसे पुराने क्षेत्रों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0183 चांदनी चौक अपने व्यस्त बाजारों के कारण जाना जाता है और यहां की संकरी और अंतहीन गलियां किसी भूलभुलैया से कम नहीं हैं, ये संकरी गलियां छोटी-छोटी दुकानों से सजी रहती हैं जिनमें नमकीन, मिठाई और सेवई के स्वादिष्ट पकवानों की कई दुकानें हैं, यहां पर ऐसी दुकानें भी हैं, जहां आपको कपड़े सहित कई उत्पाद मिल जाएंगे और वह भी बजट के दामों पर। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0184 जोर शोर से चलने वाली इस मध्ययुगीन बाज़ार में आपको लगभग सभी तरह के इत्र, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोमबत्तियां, जीवन शैली के सामान और देवी-देवताओं की मूर्तियां बड़ी आसानी से मिल जाएंगे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0185 इसके अलावा, यह दिल्ली के सबसे बड़े थोक बाजारों में से एक है, जिसमें यात्रियों को कई वस्तुओं पर भारी छूट भी मिल सकती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0187 चांदनी चौक यहां मिलने वाले व्यंजनों के लिए बेहद लोकप्रिय है, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, और अन्य ऐसे लोगों जैसी बड़ी-बड़ी हस्तियां भी यहां भोजन करना पसंद करते थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0188 जैसे ही आप बाजार में पकवानों की दुकानों को खंगालना शुरू करेंगे, आपको मेट्रो स्टेशन के पास ही काफी पुरानी और प्रसिद्ध एक जलेबी वाले की दुकान मिलेगी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0189 स्वादिष्ट, नरम और चाशनी के रस से लबालब इन गरम गरम जलेबियां का स्वाद ऐसा है, जो आपको दिल्ली की सर्दियों में भी गर्मा दें। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0190 खाने के शौकीन लोग, भोजन के असीम और अविस्मरणीय अनुभव के लिए परांठे वाली गली भी जा सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0191 परांठे वाली गली के नाम से मशहूर इस पतली सी गली में ताजे और गर्म परांठे बनाने वालों कई दुकानें हैं जहां पर्यटकों को अवश्य जाना चाहिए। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0192 इसके बाद आती है स्वादिष्ट आलू-कचौरी और दही भल्ले की बात। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0193 यदि आप गर्मियों में जा रहे हैं, तो मसालेदार नींबू पानी का एक बड़ा गिलास लेना न भूलें। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0194 वहीं चांदनी चौक में मिलने वाली रबड़ी फालूदा यहां की खासियत है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0195 यहां की कई दुकानें 100 साल से भी अधिक पुरानी हैं और आज भी मध्ययुगीन दिल्ली के स्वाद को बरकरार रखे हुए हैं, जो इस जगह को लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0197 चांदनी चौक का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने 17 वीं शताब्दी में करवाया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0198 लाल किले के ठीक सामने फैले इस बाजार से, फतेहपुरी मस्जिद का बेहद ही खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0200 'चांदनी चौक' का अर्थ होता है, चांद की रोशनी से रौशन जगह, और इस बाज़ार को शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान से ही चांदनी चौक के नाम से पुकारा जाता है, इस क्षेत्र में पेड़ों की कतार वाली एक नहर थी, जिसमें रात के वक्त चांद साफ दिखाई पड़ता था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0204 गिन्नीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज करवा चुका यह मंदिर, दुनिया के सबसे बड़े व्यापक हिंदू मंदिरों में से एक है, अक्षरधाम मंदिर परिसर वास्तुकला का एक आश्चर्यजनक नमूना है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0205 यह मंदिर काफी विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, और इसके परिसर के ऊपर से देखने पर यह किसी शानदार स्वर्गीय शहर से कम नहीं लगता। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0206 मंदिर का निर्माण गुलाबी बलुआ पत्थर और संगमरमर से किया गया है और यह मंदिर बड़े पैमाने पर साफ-सुथरे उद्यान, प्राचीन झरने और खुले आंगनों के बीचों-बीच स्थित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0207 इसे वास्तुकला की पारंपरिक हिंदू शैली में डिजाइन किया गया है और यह वास्तु शास्त्र और पंचरात्र शास्त्र का अनुसरण करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0208 जैसे ही आप इस लुभावने परिसर में टहलते हैं, आपको दीवारों पर सजाए गए जानवरों, फूलों, नर्तकियों, वाद्यकारों और देवताओं की जटिल नक्काशियां देखने को मिलेगी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0209 कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल किया गये पत्थर राजस्थान से लाये गये थे, जिनका वजन लगभग 6,000 टन था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0210 इसकी संरचना में प्रयुक्त हुआ इतालवी केर्रारा संगमरमर इस भव्य मंदिर के सौंदर्य को और बढ़ा देता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0212 इस मंदिर की कुछ दिलचस्प विशेषताएं हैंः एक संगीतमय फव्वारा, यज्ञपुरुष कुंड में होने वाला 'सहज आनंद वाटर शो' और विस्मयकारी लाइट एंड साउंड शो। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0213 शाम 7:30 बजे से शुरू होने वाला यह शो प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों में लिखित कहानियों को सुनाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0214 यह एक शानदार प्रस्तुति है, जिसमें रंगीन लेज़र बिंब, जल मग्न ज्वालाएं, पानी के जेट और वीडियो प्रोजेकशन का उपयोग किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0216 यह मंदिर 140 फीट ऊंची है और इसकी चौड़ाई लगभग 300 फीट है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0217 इसमें 234 सुंदर नक्काशी किये खंभे हैं, साथ ही नौ विस्तृत रूप से उत्कीर्ण गुंबदें हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0218 मंदिर परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की लगभग 20,000 मूर्तियां हैं, और मुख्य मंदिर भगवान स्वामीनारायण का है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0219 देवता की 11 फुट ऊंची मूर्ति केंद्रीय गुंबद के ठीक नीचे स्थित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0220 दिलचस्प बात यह है कि अक्षरधाम की प्रत्येक प्रतिमा, पांच धातुओं के मिश्रण से बने पंचधातु से निर्मित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0221 इसमें 148 हाथियों की प्रतिमाएं भी हैं जिनका वजन 3,000 टन से अधिक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0223 मंदिर में दस द्वारों के माध्यम से प्रवेश किया जा सकता है, जो 10 दिशाओं का प्रतीक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0224 मुख्य द्वार, भक्तिद्वार या भक्ति के द्वार के नाम से प्रसिद्ध है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0225 6 नवंबर, सन् 2005 को अक्षरधाम का उद्घाटन किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0226 दुनिया भर के 8,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने मंदिर निर्माण में सहायता दी थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0228 जंतर मंतर (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0230 जंतर मंतर, जयपुर के महाराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा, 1724 ई. में उत्तर भारत में बनवाये गये पांच खगोलीय वेधशालाओं में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0231 यह अपनी बेजोड़ ज्यामितीय संरचना के अद्भुत संयोजन के कारण दुनिया भर के आर्किटेक्ट, कलाकारों और कला इतिहासकारों का ध्यान आकर्षित करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0232 यह नग्न आंखों से खगोलीय स्थितियों के अवलोकन के लिए डिज़ाइन किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0233 यह टॉलेमी के स्थिति संबंधी खगोल विज्ञान की परंपरा का एक हिस्सा है, जो अनेक सभ्यताओं में आम था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0235 जंतर मंतर में 13 खगोल विज्ञान उपकरण मौजूद हैं, जिनका उपयोग ग्रहों, सूर्य और चंद्रमा की चाल और समय की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0236 खगोलीय तालिकाओं का प्रयोग खगोलीय पिंडों की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए संकलित किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0237 जंतर मंतर के प्रमुख आकर्षण हैं, मिश्र यंत्र, सम्राट यंत्र और जयप्रकाश यंत्र। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0239 सम्राट यंत्र एक विशाल सूर्य घड़ी है, जो पृथ्वी की धुरी के समानांतर खड़ी है और समय की सही जानकारी देने में मदद करती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0240 जयप्रकाश यंत्र एक गोलार्ध के आकार का यंत्र है और इसका उपयोग सितारों की सही स्थिति को अंकित चिह्नों के साथ संरेखित करने के लिए किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0241 वहीं मिश्र यंत्र का उपयोग वर्ष के सबसे छोटे और सबसे बड़े दिनों का पता लगाने के लिए किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0242 इन सभी उपकरणों को ईंट और मलबे के साथ बनाया गया है और इसे चूने के साथ प्लास्टर किया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0243 पर्यटक, जंतर मंतर के पूर्व में स्थित, एक छोटे से भैरव मंदिर को भी जाकर देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0245 कहा जाता है कि महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय को खगोलीय पिंडों की गतिविधियों का पता लगाना बेहद पसंद था, जिसके कारण उन्होंने जंतर मंतर का निर्माण को शुरु कराया था, ताकि इनकी दूरी, स्थान और गति की गणना की जा सके। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0247 राष्ट्रपति भवन (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0249 भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास के तौर पर, राष्ट्रपति भवन दिल्ली का सबसे प्रमुख स्थल है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0250 राष्ट्रपति भवन, वास्तुकला की एडवर्डियन बरोक शैली में निर्मित है, यह इमारत शास्त्रीय रूपांकनों से सज्जित है, जो विरासत और अधिकार का प्रतीक हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0251 राष्ट्रपति भवन 321 एकड़ के क्षेत्र में फैला है और इसमें 340 कमरे हैं, जिनमें अतिथि कक्ष, स्वागत कक्ष, कार्यालय, स्टाफ़ और अंगरक्षकों के आवास भी शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0253 राष्ट्रपति भवन का निर्माण सन् 1929 में हुआ था और इसे राष्ट्रपति निवास और वाइसराय हाउस भी कहा जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0254 इससे पहले, यह ब्रिटिश वायसराय का निवास स्थान था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0255 राष्ट्रपति भवन, जो वास्तुशिल्प कला का अद्भुत उदाहरण है, उसका निर्माण 17 वर्षों में किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0256 राष्ट्रपति भवन का डिजाइन एडवर्ड लुटियन्स और हर्बर्ट बेकर ने तैयार किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0257 भवन का प्रसिद्ध मुगल गार्डन 15 एकड़ भूमि में फैला है और इसमें 159 किस्मों के गुलाब, 60 किस्मों की बोगनवेलिया और कई अन्य किस्मों के फूल मौजूद हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0258 राष्ट्रपति भवन संग्रहालय परिसर की यात्रा करना भी अपने आप में एक दिलचस्प अनुभव है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0259 यहां का एक और प्रमुख आकर्षण है, राष्ट्रपति की एक पुरानी और छोटी बग्गी, जिसमें लगे जीवंत आकार के घोड़ों की मूर्तियां बिलकुल असली मालूम होती हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0260 आप जॉर्डन के राजा द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भेंट की गई मर्सिडीज कार को भी देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0261 इतिहास पर करीब से नज़र डालने के लिए पर्यटकों के लिये, इस भवन और स्वतंत्रता आंदोलन की दुर्लभ तस्वीरों को यहां एक मेज पर प्रदर्शित किया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0262 परिसर में एक उपहार काउंटर भी है, जिस पर राष्ट्रपति द्वारा दुनिया के विभिन्न देशों से प्राप्त किए गए उपहारों को दर्शाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0263 पर्यटकों को विशेष रूप से 3-डी होलोग्राफिक छवियों वाले एक विशेष निर्मित वर्ग कमरे में ले जाया जाता है, जहां विभिन्न राष्ट्रपतियों के भाषणों के साथ इन छवियों को दिखाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0264 संग्रहालय में कई खिड़कियां हैं, जहां अभी तक बने सभी राष्ट्रपतियों के व्यक्तिगत सामान की प्रदर्शनी लगाई गई है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0266 देश के सभी राजनीतिक नेताओं के बहुत पहले, महात्मा गांधी ने सन् 1931 में राष्ट्रपति भवन का दौरा किया था जब उन्हें लॉर्ड इरविन ने आमंत्रित किया था, वे एक चुटकी नमक, अंग्रेजों के विरोध के निशानी के रूप में, अपने साथ यहां लेकर आए थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0267 यह बैठक अंततः सन् 1931 के गांधी-इरविन समझौते में सम्पन्न हुई थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0269 जामा मस्जिद (आध्यात्मिक) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0271 भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक, जामा मस्जिद, पुरानी दिल्ली में स्थित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0272 इसका निर्माण सन् 1644 में शुरू किया गया था और मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा इसे पूरा कराया गया। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0273 लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बनी, इस भव्य मस्जिद को मस्जिद-ए-जहाँनुमा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है दुनिया का दृश्य दिखाने वाली मस्जिद। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0274 मस्जिद के आंगन को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है और यहां सीढ़ियों के माध्यम से उत्तर, दक्षिण और पूर्व, तीनों दिशाओं से दाखिल हुआ जा सकता है, कहा जाता है कि यह तीनों रास्ते कभी बाजारों, भोजनालयों और मनोरंजन के स्थलों की ओर जाते थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0275 मस्जिद का आंगन इतना विशाल है कि यहां एक समय में 25,000 नमाज़ी बैठ कर नमाज़ अदा कर सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0276 जामा मस्जिद को 10 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है और इसमें तीन द्वार, दो 40 मीटर ऊंची छोटी मीनारें और चार बड़ी मीनारें हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0277 मीनारों से पुरानी दिल्ली की हलचल भरी सड़कों का शानदार नज़ारा लिया जा सकता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0279 मस्जिद में पैगंबर मोहम्मद के कई अवशेष रखे हुए हैं और जो दूर-दूर से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0280 इनमें से कुछ अवशेषों में शामिल है, हिरण की खाल पर लिखे कुरान, पैगंबर के सैंडल और संगमरमर के पत्थर पर अंकित उनके पदचिह्न और एक लाल बाल, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह पैगंबर की दाढ़ी के बाल हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0282 जामा मस्जिद, मुग़ल वास्तुकार ओस्ताद खलील द्वारा डिजाइन किया गया था और इसे दस करोड़ रूपये की लागत से बनवाया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0283 किंवदंती है कि पुराने दिनों में मस्जिद का पूर्वी द्वार केवल शाही परिवारों के लिए था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0285 मस्जिद का दौरा करने का सबसे अच्छा समय ईद-उल-फितर और ईद-उल-ज़ोहा के उत्सव के दौरान है, जब इसे दुल्हन के रूप में सजाया जाता है और देश भर के लोग आकर्षित होकर इस मस्जिद को देखने आते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0287 ऐसा कहा जाता है कि लुटियन्स ने मस्जिद को अपने डिजाइन में इस तरह से शामिल किया कि मस्जिद, कनॉट प्लेस और संसद भवन, तीनों एक सीध में नज़र आएं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0288 नमाज के दौरान मस्जिद में पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं है, पर इस में प्रवेश निशुल्क है, लेकिन परिसर में कैमरा ले जाने के लिए भुगतान करना पड़ता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0290 कनॉट प्लेस (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0292 दिल्ली की दिल की धड़कन कहा जाने वाला, कनॉट प्लेस एक विरासत स्थल है, जिसे जियोरजियन शैली की वास्तुकला में निर्मित किया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0293 भोजनालयों, उच्च श्रेणी की दुकानें, पार्लर, थिएटर और बुक स्टोर के साथ साथ, यह बाजार दिल्ली में अधिकांश गतिविधियों का केंद्र है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0294 दो संकेंद्रित वृतों में फैले कनॉट प्लेस का एक विंटेज चरित्र है, पर वहीं उसके विपरीत यहां अनेक आधुनिक दुकानें और कैफ़ें मौजूद हैं जो तीक्ष्ण नियोन लाइट से प्रकाशित रहते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0295 किसी भी दिन, यहां आपको अनेक छात्र-छात्राएं और ऑफिस कर्मचारी सड़कों पर घूमते, चाट की थाली और सुखद मौसम का आनंद लेते हुए दिख जाएंगे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0297 कनॉट प्लेस में स्टॉल और स्टोर्स के आने से पहले, यह एक सिनेमा सेंटर हुआ करता था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0298 सन् 1920 के दशक में, रूसी बैले, उर्दू नाटक और मूक फिल्मों को यहां विभिन्न थिएटरों में प्रदर्शित की जाती थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0299 रिवोली और ओडियन जैसे विरासती सिनेमाघर अभी भी अपनी प्राचीनता को संरक्षित रखे हुए हैं, इन बड़े फिल्म थिएटरों में फिल्म देखने का अपना एक अलग ही रोमांच है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0301 कनॉट प्लेस का एक और मुख्य आकर्षण यहां का हनुमान मंदिर है, माना जाता है कि यह उतना ही प्राचीन है जितना इसके आस पास का इलाका। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0302 दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित वाले इस मंदिर का उल्लेख महाकाव्य महाभारत में भी मिलता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0303 इस मंदिर का नाम गिन्नीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है, जिसमें उपासकों ने यहां 24 घंटे तक लगातार 'श्री राम जय राम जय राम' मंत्र का जाप किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0305 हलचल से भरे इस बाजार के बीच एक शांत स्थान है, गुरुद्वारा बंगला साहिब, जो संभवतः कनॉट प्लेस का सबसे लोकप्रिय आकर्षण है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0306 एक मील की दूरी से ही इसका धूप में चमकता सुनहरा गुंबद दिखाई देता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0307 जैसे ही आप इसके परिसर में प्रवेश करते हैं, आपको एक अद्भुत शांति की भावना का एहसास होता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0308 इसके गर्भगृह में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद, आप गुरुद्वारे के शांत और खूबसूरत तालाब के चारों ओर टहल सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0309 सघन नक्काशी से सज्जित यह प्राचीन सफेद इमारत, गुरुद्वारा बंगला साहिब एक दर्शनीय स्थल है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0311 पर्यटक नजदीक के जंतर मंतर पर भी जा सकते हैं, जो उत्तर भारत की पांच खगोलीय वेधशालाओं में से एक है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0314 कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क एक अन्य मुख्य आकर्षण है, जहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजित किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0315 यहां हरे-भरे बगीचे हैं, जहां कई फव्वारे लगे हुए हैं और यहां आपको देश का सबसे ऊंचा लहराता हुआ झंडा भी दिख जाएगा। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0317 कनॉट प्लेस की इस भव्य हाथीदांत की सफेदी वाली संरचना सन् 1929 में अंग्रेजों द्वारा लुटियन्स की दिल्ली में स्थानांतरित करने के लिए बनाया गई थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0318 इसका नाम कनॉट के पहले ड्यूक के नाम पर रखा गया है, जो रानी विक्टोरिया का बेटा था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0319 यह दुनिया के सबसे महंगे ऑफिस इलाकों में से एक है, और अपने पर्यटकों को विविधता का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0320 एक ऐतिहासिक संरचना से लेकर दुकानदारों का स्वर्ग तक कहा जाने वाला यह स्थान, किसी की भी दिल्ली यात्रा का एक अभिन्न भाग होना ही चाहिये। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0322 अग्रसेन की बाउली (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0324 दिल्ली की हलचल के बीचों-बीच एक विचित्र और शांत स्थान है, जिसे अग्रसेन की-बाउली कहते हैं, यह राजधानी के इतिहास एक झलक पेश करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0325 यह 60 मीटर लंबी और 15 मीटर चौड़ी एक ऐतिहासिक सीड़ीनुमा कुआं है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0326 इसके विरासती चरित्र, जटिल संरचना और शांत वातावरण के चलते यह स्मारक अक्सर एक सिनेमाई पृष्ठभूमि प्रदान करता है जिसे फिल्म निर्माता बेहद पसंद करते हैं, जिस कारण इसे आप 'सुल्तान' और 'पीके' जैसी फिल्मों में इसे देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0327 जैसे ही आप बाउली में गहरे उतरते हैं, आपको एकाएक शीतलता का अहसास होता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0328 हो सकता है आपको डर की भावना भी अक्समात जकड़ ले क्यों कि इस स्मारक एक समय में भूतिया माना जाता था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0329 कहा जाता है कि बाउली में मौजूद पानी, काले जादू से भरा हुआ है और जो कोई भी इसे देखता है वह एक अजीब मदहोशी की हालत में पहुंच जाता है और इसमें छलांग लगा कर सीधा मृत्यु को प्राप्त करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0330 बाउली में 108 सीड़ियां हैं और मेहराबदार तीन मंजिले दोनों तरफ हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0332 आज यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0333 इसके निर्माता के बारे में जानकारी हेतु शायद ही कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड है, लेकिन यह माना जाता है कि इसे महान राजा अग्रसेन द्वारा बनवाया गया था और अग्रवाल समुदाय द्वारा इसे 14 वीं शताब्दी में फिर से बनवाया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0335 इस्कॉन मंदिर (आध्यात्मिक) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0337 दिल्ली में स्थित इस्कॉन मंदिर, पूरे देश में फैले मंदिरों में से यह अपनी तरह का एकलौता मंदिर है जो वास्तुशिल्प कला का एक उत्तम उदाहरण है।। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0338 भगवान कृष्ण को समर्पित यह मंदिर, कृष्णा चेतना की इंटरनेशनल सोसायटी से संबद्धित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0339 यह मंदिर अपने भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है और दूर-दूर से भक्तगण इसे देखने के लिये आते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0340 इसकी आंतरिक दीवारों को रूसी कलाकारों ने कई मनमोहक दृश्यों से सजाया गया है, जो भगवान कृष्ण, देवी राधा, भगवान राम और देवी सीता के जीवन के प्रसंगों को प्रदर्शित करती हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0342 मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका प्रार्थना कक्ष और संग्रहालय है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0343 यहां पर भगवान कृष्ण, देवी राधा और अन्य देवताओं की अति सुंदर मूर्तियां स्थापित की गई हैं, जिन्हें देखकर आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0344 यह संग्रहालय अपने मल्टीमीडिया शो के लिए जाना जाता है, जो आगंतुकों को रामायण और महाभारत की कहानियों को समझने में मदद करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0345 ये कृष्ण संप्रदाय के दर्शन, विचारों और प्रथाओं से आगंतुकों को परिचित कराने में सहायता करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0346 इस मंदिर की स्थापना सन् 1988 में भगवद् गीता की शिक्षाओं को फैलाने के उद्देश्य से की गई थी। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0348 तीन मूर्ति भवन (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0350 दिल्ली के टूरिस्ट सर्किट पर एक ऐसा लोकप्रिय और ऐतिहासिक पड़ाव है, जिसे तीन मूर्ति भवन कहते हैं, यह भारत के पहले प्रधान मंत्री, जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान था, जो वर्ष 1964 में अपनी मृत्यु तक यहां 16 साल तक रहे थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0351 इसके बाद, इस घर को उनके स्मारक के तौर पर सरकार को समर्पित कर दिया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0352 भवन को परिसर में खड़े तीन सैनिकों की प्रतिमाओं के कारण इसे 'तीन मूर्ति' कहा जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0353 ये तीन सैनिक, मैसूर, जोधपुर और हैदराबाद के लांसर्स का प्रतिनिधित्व करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0354 जिन्हें प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सन् 1922 में सिनाई, फिलिस्तीन और सीरिया में प्राण गंवाने वाले बहादुर सैनिकों को सम्मानित करने के ध्येय से, उनके प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0356 तीन मूर्ति भवन को, ब्रिटिश वास्तुकार रॉबर्ट टौर्र रसेल ने, सन् 1930 में ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ के निवास स्थान के रूप में डिजाइन किया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0357 पर्यटक नेहरू स्मारक संग्रहालय और पुस्तकालय भी जा सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0358 यहां आप नेहरू के पुराने कार्यालय को भी देख सकते हैं, जिन्हें उसी कलाकृतियों और फर्नीचर का उपयोग करके फिर से सजाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0359 पुस्तकालय में बड़ी संख्या में वह पुस्तकें हैं, जो आधुनिक भारत के इतिहास का कच्चा-चिट्ठा बतलाती हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0360 एक अन्य आकर्षण 'नेहरू तारामंडल' (प्लैनेटेरियम) है जो पूरे क्षेत्र के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0361 आप तारामंडल के आकाश थियेटर में होने वाले दिलचस्प शो और प्रस्तुतियों को भी देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0363 गुरुद्वारा बंगला साहिब (आध्यात्मिक) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0369 इसकी अन्य प्रमुख विशेषताओं में है, रसोई का क्षेत्र, एक बड़ी आर्ट गैलरी और एक स्कूल। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0370 यहां आने वाले भक्तों को लंगर (पवित्र भोजन) खिलाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0371 यह भोजन उन गुरुसिखों द्वारा तैयार किया जाता है जो यहां काम करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0373 किंवदंती है कि गुरुद्वारे का यह क्षेत्र एक समय में जयसिंहपुरा महल था, जो अम्बर का शासक राजा जय सिंह का निवास स्थान था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0374 कहा जाता है कि सन् 1664 में, सिखों के आठवें गुरु, गुरु हर कृष्ण साहिब, इस महल में रहे थे। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0376 हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह (देखने लायक चीज़ें) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0378 हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह दिल्ली के सबसे प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में से एक है, यह मुस्लिम सूफ़ी संत, निज़ाम-उद-दीन औलिया (1238-1325 ईस्वी) की दरगाह है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0379 इसकी संरचना बेहद ही लाजवाब है, जिसमें जटिल जालियों और संगमरमर के मेहराबों से बना एक विशाल प्रांगण है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0380 14 वीं शताब्दी में बना यह दरगाह इस्लामी शैली की वास्तुकला में बनाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0381 यह एक चौकोर आकार की इमारत है, जिसमें गुंबद आकार की एक छत है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0382 यहां का एक और विशेष आकर्षण 13 वीं शताब्दी में बना एक कमरा है, जिसे हुजरा-ए-क़दीम कहा जाता है और यह दरगाह के दर्शन को और दिलचस्प बना देता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0384 इस दरगाह में लोग काफी दूर-दूर से आते हैं, और उन्हें इसकी जालियों पर लाल धागा बांधते हुए आप देखेंगे ताकि उनकी दुआ कबूल हो। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0385 दुआ करते समय, वे अगरबत्तियां जलाते हैं और गुलाब की पंखुड़ियों की बौछार करते हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0386 दरगाह पर चादर चढ़ाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0387 दरगाह पर जाने का सबसे अच्छा समय गुरुवार का होता है जब यहां शाम को कव्वाली होती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0388 यह दरगाह इतना लोकप्रियता है कि यह अनेक फिल्मों की, जैसे 'बजरंगी भाईजान' (सन् 2015) और 'रॉकस्टार' (सन् 2011) की पृष्ठभूमि में रही है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0390 यहां का वातावरण बेहद आकर्षक और रूहानी रहता है, दरगाह के परिसर में अमीर खुसरो की कब्र है जो वे उर्दू और फारसी के बड़े सूफी कवियों में से एक हैं। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0391 इसके अलावा, यहां शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा बेगम की कब्र, रईस अतगाह खान की कब्र, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी पत्नी ने मुगल सम्राट अकबर को दूध पिलाने वाली नर्स थी, और 18 वीं सदी के एक शासक, मुहम्मद शाह रंगीला की कब्र भी है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0393 राजघाट (विरासत) ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0395 भारत के राष्ट्रपिता माने जाने वाले मोहनदास करमचंद गांधी की स्मृति में निर्मित यह समाधि, राजघाट संगमरमर का एक मंच है, जहां 31 जनवरी, सन् 1948 को महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0396 यमुना नदी के तट पर स्थित, राजघाट साफ-सुथरे उद्यानों से सज्जित है और यहां पेड़ों को बड़े ही सुंदर तरीके से लगाया गया है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0397 इस घाट पर, गांधी जी के नश्वर अवशेषों का अंतिम संस्कार किया गया था। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0399 यह समाधि स्वयं गांधी जी का एक सच्चा प्रतिबिंब है और उनकी सादगी का परिचय देती है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0400 यहां ईंटों से बना एक चबूतरा है, जहां उनके मृत शरीर को जलाया गया था और यह काले संगमरमर का मंच, संगमरमर के किनारों से घिरा है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0401 गांधीजी के मुख से निकले उनके आखिरी शब्द 'हे राम' उस स्मारक पर अंकित है। ebs_tourism-delhi-part1-translation-hin2tel_0402 पास ही में एक शाश्वत ज्योति जलती रहती है।