ID SENT ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0002 भूदृश्य को सुंदर बनाने वाले विभिन्न तरह के वृक्षों को अनेक गणमान्य लोगों, जैसे रानी एलिजाबेथ द्वितीय, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व अस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री गफ व्हिटमेन आदि द्वारा लगाए गए हैं, और एक पट्टिका पर उन सभी के नाम भी अंकित हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0004 इस महान नेता को श्रद्धांजलि देने से पहले आगंतुकों को अपने जूते निकालने पड़ते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0005 शुक्रवार, जिस दिन उनकी मृत्यु हुई थी, उसे याद करने के लिए प्रत्येक शुक्रवार को यहां एक समारोह आयोजित किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0006 पास ही में दो संग्रहालय हैं, जो गांधीजी को समर्पित हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0008 इस स्मारक को 'वाणु जी भूता' द्वारा डिजाइन किया गया था, और इस राष्ट्रीय स्मारक के वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0009 लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी और संजय गांधी जैसे कई अन्य नेताओं के स्मारक भी राज घाट परिसर के अंदर हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0011 तुगलकाबाद (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0013 दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित, तुगलकाबाद प्राचीन स्मारकों से भरा हुआ है, 14 वीं शताब्दी में दिल्ली पर शासन करने वाले तुगलक वंश की यह राजधानी थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0014 इस शहर में पत्थर के आकर्षक किले हैं, जो इसे एक अनियमित घेरे से घेरे हुए है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0015 तुगलक वंश के स्मारकों की विशिष्ट विशेषता उसकी ढलानें और मलबे से भरी शहर की दीवारें हैं, जिनकी ऊंचाई 10-15 मीटर तक है, ये दीवारें युद्धपरक मुड़ेरों से सुसज्जित हैं और इसकी सुरक्षा को और सशक्त करने के लिये उसके उपर दो मंजिले दुर्ग बने हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0017 शहर का मुख्य आकर्षण तुगलकाबाद किला है, जिसकी स्थापना सन् 1386-1321 में गयासुद्दीन तुगलक ने की थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0018 यह किला अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों पर स्थित है और इसकी दीवारें 6 किमी तक लंबी हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0019 इस किले के निर्माण का मुख्य उद्देश्य लगातार होने वाले मंगोल हमलों के खिलाफ इसकी रक्षा करना था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0021 शहर के अन्य आकर्षणों में एक बड़ा कृत्रिम जल भंडार, आदिलाबाद का किला आदि शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0023 सफदरजंग किला (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0025 समय की कसौटी से अछूता, सफदरजंग मकबरा, एक सुरम्य पृष्ठभूमि के साथ बेहद खूबसूरत नज़ारा पेश करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0026 यह संगमरमर और बलुआ पत्थर से बना एक सुंदर वास्तुशिल्प का नमूना है, इसे सन् 1754 में एक सक्षम प्रशासक और राजनेता, मुहम्मद मुकीम इन-खुरासां की याद में बनवाया गया था; और उन्हें तत्कालीन सम्राट द्वारा सफदरजंग की उपाधि से सम्मानित किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0027 इस स्मारक को एक इथोपियाई वास्तुकार द्वारा डिजाइन किया गया था और इसके केन्द्र में एक बड़ा गुंबद है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0028 यह एक ऊंचे मंच पर बनाया गया है, जो विशाल वर्ग आकार के उद्यानों से घिरा हुआ है जिसके प्रत्येक किनारे की लंबाई 280 मीटर है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0029 इस मकबरे के सामने के हिस्से और इसके पीछे बने मकानों में कई कमरे और एक पुस्तकालय है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0030 इसकी सतहों पर कई अरबी लेख अंकित हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0031 सफदरजंग और उनकी पत्नी, अमत जहां बेगम के दफन कक्ष को स्मारक के एक भूमिगत कक्ष में संरक्षित किया गया है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0032 पूरा स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संरक्षण में है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0034 पंच इन्द्रियों का बाग (गार्डन ऑफ फाइव सेंसिज़) (करने के लिए चीजें) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0036 20 एकड़ के क्षेत्र में फैला, गार्डन ऑफ़ फाइव सेंसिज़ अपने आगंतुकों को एक शांत वातावरण प्रदान करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0037 इस उद्यान को अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें 'खास बाग' सबसे लोकप्रिय है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0038 मुगल गार्डन की तर्ज पर बना यह हरा-भरा बाग खूबसूरत फूलों से सराबोर है और इसमें पानी के नहरें भी हैं, जो पर्यावरण को शीतलता प्रदान करते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0039 यहां फव्वारे की एक श्रृंखला भी है, जिन्हें शाम के समय जब चलाया जाता है तो यह बेहद ही शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0040 यहां का एक अन्य आकर्षण नील बाग है, जिसमें अनेक वाटर लिली और सैकड़ों सिरेमिक चाइम्स हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0041 इसके अलावा, इस उद्यान में कई फूलों की झाड़ियां और 200 से अधिक किस्मों के पौधे हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0042 इस बगीचे में टहलने से आपको एक अद्भुत फूर्ति का एहसास होता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0043 पार्क में कई भित्ति चित्र और मूर्तियां प्रतिस्थापित की गई हैं, जो इसे भारत में सार्वजनिक कला के सबसे बड़े संग्रहों में से एक बनाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0045 इस बगीचे में एक भोजन और खरीदारी की जगह भी है, जहां पर्यटक परिवार और दोस्तों के साथ प्राचीन परिवेश का आनंद ले सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0046 एक अन्य आकर्षण यहां का एम्फीथियेटर है, जिसमें बलुआ पत्थर से बनी सीटें हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0047 उद्यान के पीछे एक प्रदर्शनी क्षेत्र है, जहां कला प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है, जो पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0049 दिल्ली हाट (करने लायक चीजें) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0051 दिल्ली हाट सांस्कृतिक अतिरंजना, शिल्प और व्यंजनों का सम्मिश्रण है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0052 यह शहर के बीच एक अनूठा बाज़ार है, जो भारतीय संस्कृति की समृद्धि को प्रदर्शित करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0053 आप इस बाजार से कई पारंपरिक और इथनिक वस्तुएं खरीद सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0054 इतना ही नहीं, हाट में खाने के लिए अनेक स्वादिष्ट व्यंजन भी किफायती कीमतों पर मिलते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0055 आप भारत के भिन्न भिन्न राज्यों द्वारा स्थापित विभिन्न भोजन की दुकानों पर जा सकते हैं, जहां वे अपने क्षेत्र के खास व्यंजनों को पेश करते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0056 हाट का दौरा करना एक अनूठा अनुभव है क्योंकि यह आपको भारत के प्रत्येक राज्य की सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रदान करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0057 बाजार में आगंतुकों के लिए स्मारिका की दुकानें भी हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0058 आप जिन वस्तुओं को खरीद सकते हैं, उनमें पीतल के बर्तन, धातु शिल्प, रत्न, मोती, रेशमी और ऊनी कपड़े, अलंकृत जूते-चप्पले, चंदन और शीशम की बनी सजावट के सामान आदि शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0060 पुराना किला (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0062 यह 16 वीं शताब्दी में बने एक पत्थर का किला है, महाकाव्य महाभारत में भी इस स्थान का उल्लेख मिलता है और कहा जाता है कि इसके पास ही इंद्रप्रस्थ के प्रसिद्ध शहर के अवशेष हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0063 किले में उत्खनन से पता चलता है कि यह क्षेत्र लगभग 300 ईसा पूर्व काल से बसा हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0065 कुछ हद तक आयताकार रूप में बने इस किले की मोटी दीवारों पर कंगूरे बने हैं, और इसके तीन द्वार हैं जिसके दोनों ओर गढ़ बने हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0066 प्राचीन काल में, यह किला एक विस्तृत खाई से घिरा हुआ था, जो यमुना नदी से जुड़ा हुआ था, कहते हैं कि उस वक्त यमुना किले के पूर्व में बहती थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0067 इसका उत्तरी द्वार इस्लामी नुकीले मेहराब और हिंदू छत्रियों और कोष्ठकों का मिश्रण है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0068 किले की दीवारें और प्रवेश द्वार मुगल सम्राट हुमायूं द्वारा बनवाये गए थे और किले के काम को शेर शाह सूरी ने आगे बढ़ाया था, शेर शाह सूरी ने 16 वीं शताब्दी के मध्य में दिल्ली पर शासन किया था और उसने हुमायूं को हराया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0069 इसके अंदर एक सीढ़ीदार बाउली है, एक बड़ा दुर्ग है जिसे पुस्तकालय-सह-वेधशाला और एक मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0070 हुमायूँ ने सन् 1533 में इसका निर्माण कार्य शुरू करवाया था, लेकिन कुछ वर्षों के बाद शेर शाह के हाथों उन्हें हार का मुह देखना पड़ा था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0071 लगभग 15 साल बाद, हुमायूँ ने फिर इस किले पर कब्जा कर लिया था, लेकिन उसके कुछ समय बाद ही उसकी मृत्यु पुस्तकालय की सीढ़ियों से नीचे गिरने से हो गई। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0072 हर शाम आयोजित किए जाने वाले एक शानदार लाइट एंड साउंड शो में इस किले की कहानी को प्रदर्शित किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0074 फ़िरोज़ शाह कोटला किला (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0076 दिल्ली की सबसे पुरानी संरचनाओं में से एक, फ़िरोज़ शाह कोटला किला, सन् 1354 में, सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुगलक द्वारा बनवाया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0077 ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, यह किला तब बनवाया गया था जब शासक ने पानी की कमी के कारण अपनी राजधानी तुगलकाबाद से फिरोजाबाद स्थानांतरित करने का फैसला किया। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0078 इसलिए इस किले का निर्माण पवित्र यमुना नदी के किनारे पर किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0079 किले के परिसर में कुछ शानदार बगीचे, मस्जिद, महल आदि हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0080 किले के प्रवेश द्वार पर शासक के नाम पर, एक विशाल लोहे का दरवाजा है और किले की दीवारें 15 मीटर तक ऊंची है, हालांकि किले की कई संरचनाएं आज खंडहर हो चुकी हैं, लेकिन यहां पर मौजूद सीढ़ीदार बाउली अभी भी अच्छी स्थिति में है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0081 किले की एक दिलचस्प विशेषता यह है कि इसमें एक अशोक स्तंभ है, जिसे फिरोज शाह द्वारा अंबाला से दिल्ली लाया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0082 यह 13 मीटर ऊंचा है और इस पर अशोक के सिद्धांतों के लेख अंकित हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0084 संसद भवन (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0086 भारत का संसद भवन दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र का शासन केंद्र है, इस भवन की इमारतें दिल्ली की सबसे प्रभावशाली इमारतों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0087 यह समरूपता और वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है, इसका आकार गोलाकार है, इस भवन की संरचना में राज्य सभा, लोकसभा और केंद्रीय पुस्तकालय के तीन अर्धवृत्ताकार कक्ष हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0088 इस भवन की सुंदरता को बढ़ाने के लिए इसमें लगभग 144 स्तंभ और सुंदर बगीचे हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0089 इस इमारत की चार दीवारी की यह विशेषता है कि उसके बलुआ पत्थर से बने भागों की बेहतरीन ज्यामितीय आकृतियों में तराशा गया है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0090 इस भवन में कोई भी व्यक्ति अधिकारिक अनुमति के बिना प्रवेश नहीं कर सकता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0092 संसद भवन की नींव कनॉट के ड्यूक द्वारा डाली गई थी और इसका निर्माण वर्ष 1921 में पूरा हुआ था, इस भवन का उद्घाटन वर्ष 1927 में लॉर्ड और लेडी इरविन द्वारा किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0093 इस भवन को हर्बर्ट बेकर ने डिजाइन किया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0094 ऐसा कहा जाता है कि इस भवन में ही भारत का संविधान तैयार किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0096 छतरपुर मंदिर (आध्यात्मिक) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0098 यह मंदिर देवी दुर्गा के अवतार मानी जाने वाली कात्यायनी देवी का है, ऐसा कहा जाता है कि छतरपुर मंदिर का परिसर भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर परिसर है, जो 60 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0099 यह मंदिर संगमरमर से निर्मित है, और इसमें द्रविड़ और नागर की शानदार वास्तुकला शैलियों का प्रयोग हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0100 इस मंदिर की तीन परिसरों में 20 छोटे और बड़े मंदिर हैं, इसके अलावा वहां एक कमरा भी है, जिसमें चांदी की मेंजें, कुर्सियां, एक बिस्तर और एक ड्रेसिंग टेबल रखा हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0101 मंदिर के गर्भगृह में, शेर की सवारी करते हुए और हाथ में तलवार लिए देवी माँ की मूर्ति है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0102 मंदिर के गर्भगृह में दण्डवत प्रणाम करने के बाद, भक्तजन परिसर में भगवान राम, भगवान शिव, भगवान गणेश और भगवान हनुमान के मंदिरों में भी जा सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0103 छतरपुर मंदिर को वर्ष 1974 में बाबा संत नागपाल जी द्वारा बनवाया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0104 नवरात्रि के शुभ अवसर पर यहां भक्तों की काफी भीड़ लगी रहती है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0106 सेंट जेम्स चर्च (आध्यात्मिक) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0108 19 वीं शताब्दी में बना सेंट जेम्स चर्च दिल्ली के सबसे पुराने चर्चों में से एक है और पर्यटन के लिए एक प्रमुख स्थल है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0109 यह कश्मीरी गेट के चहल-पहल से भरे क्षेत्र के बीच स्थित है, पर चर्च का शांत वातावरण आगंतुकों को आकर्षित करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0110 यह चर्च आगे से बहुत ही शानदार दिखता है और इसे क्रूसिफ़ॉर्म योजना के तहत पुनर्जागरण पुनरुद्धार शैली में बनाया गया है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0111 इस चर्च में तीन बहुत बेहतरीन बरामदे है, इसके केंद्र में एक अष्टकोणीय गुंबद है, इसकी वेदी के ऊपर रंगीन चित्रों से भरी कई कांच की खिड़कियां हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0112 यहां की एक और विशेषता है कि चर्च के ऊपरी हिस्से में एक क्रॉस और एक तांबे की गेंद लटकी हुई है, और ऐसा माना जाता है कि ये दोनों वेनिस के एक चर्च से प्रेरित है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0114 इस चर्च का परिसर हरे-भरे सुव्यवस्थित बगानों से घिरा हुआ है, इस कारण इसके आस पास शांति रहती है, जो लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0115 ऐसा कहा जाता है कि इसके मैदान में एक ही समय में 1,200 लोग आसानी से समा सकते है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0116 यहां पर अक्सर बपतिस्मा, जन्मदिन, सालगिरह, शादी और धन्यवाद समारोहों जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0118 रविवार को यहां चर्च में बड़ी संख्या में लोगो को आते जाते देखा जा सकता है, यहां क्रिसमस, ईस्टर और पाम संडे जैसे त्योहारों को बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0119 यह चर्च बच्चों के लिए एक रविवार स्कूल आयोजित करता है, ताकि उन्हें बाइबिल की शिक्षा दी जा सके। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0121 सेंट जेम्स चर्च का निर्माण कर्नल जेम्स स्किनर ने किया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0122 ऐसा माना जाता है कि कर्नल ने इस चर्च को बनाने की संकल्पना तब ली थी जब वे युद्ध के मैदान में घायल पड़े हुए थे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0123 यह भी कहा जाता है कि यह चर्च जिस स्थान पर स्थित है, वहां मुगल राजकुमार दारा शिकोह का, जिन्हें उनके भाई औरंगज़ेब ने कत्ल कर दिया था, का आम का बाग़ था।। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0124 यह चर्च एक शांत जगह में स्थित है, और इस चर्च के उत्तर में स्किनर परिवार का कब्रिस्तान है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0126 किला राय पिथौरा (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0128 दिल्ली का ऐतिहासिक रत्न, राय पिथौरा किला या लाल कोट का निर्माण राजपुर के राजा पृथ्वी राज चौहान द्वारा किया गया था, इसलिए इसे राय पिथौरा भी कहा जाता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0129 यह विशाल किला आज भी अपनी भव्यता लिए जाना जाता है, इस किले के अवशेषों को कुतुब मीनार, साकेत, वसंत कुंज, मेहरौली और किशनगढ़ के क्षेत्रों में देखा जा सकता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0130 ऐसा कहा जाता है कि यहां पर पहले, राय पिथौरा नाम का एक शहर था, जिसकी चारों ओर से किलाबंदी की हुई थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0131 इसे दिल्ली का पहला शहर माना जाता है, जिसका निर्माण 8 वीं शताब्दी में तोमर राजाओं के द्वारा किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0132 ऐसा कहा जाता है कि जब पृथ्वी राज चौहान कुतुब-उद-दीन ऐबक से हार गये थे, तो यह किला मामलुक वंश के कब्जे में आ गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0133 तब से लेकर आज तक किले के ढांचे में कोई नवीनीकरण नहीं हुआ। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0134 आज, यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अंतर्गत आता है और यह किला घूमने के लिए एक दिलचस्प जगह है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0136 मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (योग) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0138 मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान की स्थापना वर्ष 1970 में हुई थी, यह योग और अन्य प्राचीन विज्ञानों का एक प्रमुख केंद्र है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0139 यह संस्थान एक केंद्रीय एजेंसी के रूप में पूरे भारत में योग का प्रचार और विकास करती है, यहां योग अनुसंधान, योग चिकित्सा, योग प्रशिक्षण और योग शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0140 यह संस्थान 2 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, इसमें एक पुस्तकालय है, जहां योग और उससे संबंधित विषयों पर 9,000 से अधिक पुस्तकें संग्रहित की गई हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0141 यहां एक शैक्षणिक खंड है, जहां कक्षाएं लगती हैं और अभ्यास होता है, इसके साथ-साथ यहां कॉन्फ्रेंस हॉल भी है जहां ऑडियो विजुअल सुविधाएं उपलब्ध हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0142 यह संस्थान आधुनिक प्रयोगशाला और बायोकेमिकल परीक्षण और अनुसंधान की सुविधा मुहैया करती है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0143 मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0145 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (योग और कल्याण) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0147 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान को प्राचीन भारतीय आयुर्वेद विज्ञान का मुख्य केंद्र माना जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0148 इसकी स्थापना का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा और उपचार प्रदान करवाना था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0149 यह संस्थान पारंपरिक आयुर्वेदिक प्रणालियों के पुनरुत्थान का समर्थन करता है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के बीमारियों का इलाज करती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0150 इस संस्थान में 200 बिस्तरों वाला एक अस्पताल है, जिसमें 25 विशेषज्ञता विभाग और 12 क्लीनिक हैं, जिनमें आठ अंतर-अनुशासनिक प्रयोगशालाएं भी हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0151 इस संस्थान का उद्देश्य आयुर्वेद के माध्यम से चिकित्सा और उपचार को बढ़ावा देना है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0153 यह संस्थान आधुनिक तकनीकों और प्राचीन विज्ञान को एक साथ लाता है और यह संस्थान आयुर्वेद के विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी उपलब्ध करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0154 इसके अलावा यह केन्द्र आयुर्वेद के गुणवत्ता नियंत्रण, औषधि विकास, सुरक्षा मूल्यांकन, मानकीकरण और वैज्ञानिक सत्यापन के अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0156 नीमराना (भ्रमण) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0158 नीमराना दिल्ली से लगभग 140 किमी की दूरी पर स्थित है, नीमराना फोर्ट पैलेस 1464 ईस्वी में बना था, यह अरावली पर्वतमाला में स्थित एक विरासत, एवम् लक्जरी होटल है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0159 यहां आज भी राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान III के सिंहासन को संभाल कर रखा हुआ है, इसे बहुत ही आधुनिक और आरामदायक बनाने के बावजूद यह किला, अपनी प्राचीनता को बरकरार रखे हुए है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0160 राजस्थान के अलवर में स्थित यह तेजस्वी किला 10 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, और इस किले में बहुत ही सुंदर हैंगिंग गार्डन, बड़े बड़े पूल, और अत्याधुनिक कमरे हैं, जो सभी आलीशान आंतरिक सज्जा से सुसज्जित हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0161 यहां की एक और विशेषता है यहां की विशाल बालकनियां जिनसे आसपास के मनमोहक दृश्यों को देखने को मिलता है, इन बालकनियों में खड़े होकर आपको खुद को किसी राजा से कम का एहसास नही होगा, इस महल में अनेक सुंदर चित्रकारियां और प्राचीन वस्तुएं हैं, जो औपनिवेशिक आकर्षण और राजस्थानी विरासत की निशानियों को प्रदर्शित करती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0162 किले के कुल आठ खंड हैं, जहां हर कमरे को एक अलग नाम दिया गया है, और उन कमरों की सजावट उनके नाम के अनुसार की गई है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0164 यह किला रात के समय, अनेक बत्तियों की हल्की रोशनी में नहाया हुआ बेहद ही आकर्षक दिखाई देता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0165 पर्यटक यहां के विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले सकते हैं जो यहां सप्ताहांत में आयोजित किये जाते हैं, या जिप-लाइनिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों में भी भाग ल सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0166 यहां आप विंटेज कार सवारी का अनंद ले सकते है, या आप साथ के रेस्तत्रां में राजस्थानी और फ्रांसीसी व्यंजनों के जायके का भी मजा ले सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0168 इस किले में तीन विशाल सम्मेलन हॉल है, और इस कारण यह किला बिज़नेस मीटिंग और सामाजिक समारोहों के लिए एक आदर्श स्थान है, जहां इन समारोहों का संचालन यहां के शांत वातावरण में आराम से की जा सकती है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0169 नीमराना किला वैवाहिक समारोहों के लिए बहुत ही लोकप्रिय जगह है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0171 खरीददारी के लिए उपयुक्त स्थानों की सूची ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0175 चूंकि दिल्ली उत्तरी भारत का सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है, यहां के बाजारों में पारंपरिक हस्तशिल्प से लेकर कीमती चांदी के बर्तन, नग, रेशमी कपड़े के साथ-साथ आभूषण और कालीन जैसी कई वस्तुएं भी मिलती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0177 कनॉट प्लेस ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0179 अनेक तरह के भोजनालयों, उच्च श्रेणी की दुकानें, पार्लर, थिएटर और पुस्तक की दुकानों के साथ-साथ, यह बाजार दिल्ली के अधिकांश गतिविधियों का केंद्र है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0180 दो संकेंद्रित वृतों में फैला कनॉट प्लेस का ऐतिहासिक महत्व, किसी से कम नहीं है, यहां विभिन्न तरह की दुकानें और कैफे हैं जो इसकी शोभा बढ़ाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0181 यहां की दुकानों में लगभग सभी ब्रॉन्ड का समान मिल जाते हैं, और यहां आभूषण, कपड़े, किताबें, हस्तशिल्प और इलेक्ट्रॉनिक्स की चीज़े सस्ते दामों पर मिल जाती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0183 जनपथ बाजार ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0185 कनॉट प्लेस के बहुत नजदीक ही जनपथ बाजार है, जो अपने कपड़े, हस्तशिल्प, पेंटिंग, पीतल के बर्तन, चमड़े के उत्पाद, जूते, नकली आभूषण आदि के लिए लोकप्रिय है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0186 यहां देशी चीजों के अलावा तिब्बती हस्तशिल्पों का सामान भी आसानी से मिल जाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0187 इस वजह से इसे तिब्बती बाजार भी कहा जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0189 चांदनी चौक ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0191 पुरानी दिल्ली की प्राचीनता को संजोये चांदनी चौक एक भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र, राष्ट्रीय राजधानी के सबसे पुराने क्षेत्रों में से एक है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0192 चांदनी चौक अपने व्यस्त बाजारों के कारण जाना जाता है, जहां की संकरी और अंतहीन गलियां किसी भूलभुलैया से कम नहीं हैं, ये संकरी गलियां छोटी-छोटी दुकानों से सजी हैं, जिनमें नमकीन, मिठाई और सेवई के स्वादिष्ट पकवानों की कई दुकानें हैं, यहां पर ऐसी दुकानें भी हैं, जहां आपको कपड़े सहित और कई उत्पाद मिल जाएंगे और वो भी बजट के दाम पर। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0193 इस मध्ययुगीन बाजार में आपको लगभग सभी तरह के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोमबत्तियां, दैनिक जीवन के सामान और देवी-देवताओं की मूर्तियां बड़ी आसानी से मिल जाएंगे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0194 इसके अलावा, यह दिल्ली के सबसे बड़े थोक बाजारों में से एक है, जिसमें आगंतुकों को कई वस्तुओं पर भारी छूट भी मिल सकती है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0196 दिल्ली हाट ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0198 शहर के केन्द्र में स्थित दिली हाट भारतीय संस्कृति की समृद्धि को प्रदर्शित करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0199 इस बाजार से कई पारंपरिक आइटम खरीदे जा सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0200 इतना ही नहीं, हाट में खाने के लिए किफायती कीमतों पर कुछ स्वादिष्ट व्यंजन भी मिल जाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0201 आप भारत के अलग-अलग राज्यों द्वारा स्थापित विभिन्न खाद्य स्टालों पर भी जा सकते हैं, जहां वे अपने क्षेत्र के मूल व्यंजनों को पेश करते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0202 हाट का दौरा करना अपने आप में एक अनूठा अनुभव है क्योंकि यह आपको भारत के प्रत्येक राज्य की सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रदान करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0204 यहां आप जिन वस्तुओं को खरीद सकते हैं, उनमें पीतल के बर्तन, धातु शिल्प, रत्न, मोती, रेशम और ऊन के कपड़े, अलंकृत जूते और चप्पलें, चंदन और शीशम की बनी सजावट के सामान आदि शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0206 खान मार्केट ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0208 दिल्ली के सबसे व्यस्त और सबसे महंगे बाजारों में से एक, खान मार्केट खरीददारों को कई तरह के बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0209 यहां महंगे ब्रांड्स से लेकर आयुर्वेदिक, किताबें, सरकारी और कॉस्मेटिक के दुकानों तक हैं, और बाजार में खरीदादारों के कौतूहल बनाये रखने के लिए और भी बहुत कुछ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0211 पहाड़गंज ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0213 पहाड़गंज दिल्ली के सबसे लोकप्रिय थोक बाजारों में से एक है, यहां कम बजट में अच्छी चीज़ें मिल जाती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0214 यहां घरेलू चीजों के साथ-साथ विदेशी उत्पाद भी मिल जाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0215 यहां की हलचल भरी सड़कों पर आप हस्तशिल्प, हुक्का पाइप, वस्त्र, किताबें, संगीत वाद्ययंत्र और कपड़े खरीद सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0217 सरोजिनी नगर बाजार ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0219 यह चहल-पहल भरा बाजार खरीदारों के लिए एक स्वर्ग है जहां वे जी भर खरीदारी कर सकते हैं और दुकानों की खिड़कियों पर प्रदर्शित चीजों का मुआयना अपने दिल की संतुष्टि तक कर सकतें है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0220 यह बाजार अपनी संकरी गलियों के काफी सटी सटी दुकानोें और अनेक फैले अस्थायी स्टॉलों के चलते काफी मशहूर हैं क्यों कि इस बाजार में आपको तरह-तरह की वस्तुएं बहुत हीं सस्ते दामों में मिल जातीं हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0222 सेंट्रल मार्केट या लाजपत नगर मार्केट ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0224 लाजपत नगर मार्केट आभूषण, कपड़े, सामान और अन्य फैशन की वस्तुओं के चयन के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0225 इस मार्केट का मुख्य आकर्षण मेहंदी लगाने वाले है, जिन्होंने मार्केट में अपनी दुकानें लगा ली है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0226 यहां लगाये गये मेंहदी की सुंदर आकृतियों की प्रशंसा सभी करेंगे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0227 आप यहां के कुछ सबसे पुराने भोजनालयों में पेश किये जाने वाले व्यंजनों का भी अनंद ले सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0229 संग्रहालयों की सूची ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0231 दिल्ली में संग्रहालयों की शृंखला ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0233 दिल्ली के इतिहास और इसके विरासत को इसके विभिन्न संग्रहालयों में देखा जा सकता है जो न केवल शैक्षणिक हैं, बल्कि यह आपकी यात्रा को और भी दिलचस्प बना देंगे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0235 राष्ट्रीय संग्रहालय (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0237 राष्ट्रीय संग्रहालय में कलाकृतियों और उत्कृष्ट वस्तुओं का एक अच्छा-खासा संग्रह है, जो 5,000 से अधिक वर्ष पुरानी भारतीय सांस्कृतिक की विरासत को दर्शाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0238 इसमें भारतीय और विदेशी दोनों ही तरह की कलाओं की लगभग 2,00,000 प्राचीन कृतियां देखने को मिलती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0239 यहां का पुस्तकालय शोधकर्ताओं के लिए किसी सोने की खान से कम नही है, क्योंकि यहां नृविज्ञान, पुरातत्व, संरक्षण, सजावट कला, इतिहास, साहित्य, संग्रहालय अध्ययन, चित्रकला, दर्शन और धर्म से संबंधित शोध और संदर्भ के लिए किताबें और पत्रिकाएं मौजूद हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0240 इस पुस्तकालय में 60,000 से अधिक पुस्तकें और कई भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाएं भी हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0242 15 अगस्त, सन् 1949 को भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल श्री आर सी राजगोपालाचारी द्वारा इस संग्रहालय का उद्घाटन किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0243 इस भवन का शिलान्यास 12 मई, सन् 1955 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0244 इस भवन के पहले चरण का औपचारिक उद्घाटन 18 दिसंबर, सन् 1960 को डॉ. एस राधाकृष्णन द्वारा किया गया था, और इसका दूसरा चरण सन् 1989 में पूरा हुआ। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0246 राष्ट्रीय हस्तशिल्प और हथकरघा संग्रहालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0248 इस संग्रहालय में लगभग 35,000 विशिष्ट और दुर्लभ कलाकृतियां हैं, जो भारतीय शिल्पकारों की परंपराओं को शिल्प को वस्त्र, कढ़ाई, चित्रों और काष्ठकला, पत्थर और मिट्टी के बने कृतियों से दर्शाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0249 इस संग्रहालय में कई दीर्घाएं हैं जैसे आदिवासी और ग्रामीण शिल्प दीर्घा, लोकप्रिय संस्कृति दीर्घा, वस्त्र दीर्घा, और दरबारी शिल्प दीर्घा। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0250 यहां का खास आकर्षण है गांव परिसर, जो 5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0251 यहां ग्रामीण जीवन का प्रदर्शित करने वाली लगभग 15 संरचनाएं हैं जिनमें भारत के भिन्न भिन्न भाग के पुण्य स्थलें और आंगन शामिल है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0252 यहां पर्यटक लोक कला या नृत्य प्रदर्शन को भी देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0253 इस संग्रहालय की अन्य रोचक विशेषता है, कर्नाटक का 300 साल पुराना भूटा संग्रह, अनोखी कढ़ाई वाले चंबा के रूमाल, और 300 साल पुराना दुर्लभ कश्मीरी दुशालाएं (शॉल)। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0255 राष्ट्रीय रेल संग्रहालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0257 राष्ट्रीय रेल संग्रहालय भारत की रेल विरासत का साक्षी है, राष्ट्रीय रेल संग्रहालय की शानदार प्रदर्शनी कमरे के अंदर और बाहर दोनों जगहों पर है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0258 इस संग्रहालय के अंदर एक टॉय ट्रेन है, जो आगंतुकों को विस्तार से संग्रहालय देखने का अवसर देता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0259 इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण रेलवे के 100 साल पुराने कार्यशील और स्थिर मॉडल, पुरातन फर्नीचर, ऐतिहासिक फोटोग्राफ और सिग्नल के उपकरण हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0261 शंकर का अंतराष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय (शंकर इन्टर्नैशनल डॉल म्यूजियम) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0263 गुड़ियों का संग्रहालय (डॉल म्यूजियम) दुनिया में विभिन्न देशों की संस्कृतियों और परंपराओं का अध्ययन करने के लिए एक बेहतरीन संग्रहालय है, जो आपको अचम्भित कर देता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0264 यहां 80 से अधिक देशों की 6,500 गुड़ियों का संग्रह हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0265 इस पूरे संग्रहालय को दो भागों में विभाजित किया गया है - एक भाग में पश्चिमी देशों जैसे यूएसए, यूके आदि की गुड़ियां हैं, वही दूसरे भाग में एशियाई, अफ्रीकी और मध्य पूर्वी देशों की गुड़ियां हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0266 यहां का मुख्य आकर्षण केन्द्र भारतीय पोशाकों को पहने 150 प्रकार की गुड़ियां हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0267 जिसमें कथकली पोशाक वाली गुड़िया भी शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0268 इस संग्रहालय की स्थापना 'के शंकर पिल्लई' ने की थी, जो एक राजनीतिक हास्य चित्रकार (कार्टूनिस्ट) थे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0270 नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट (विरासत) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0272 नेशनल गैलरी ऑफ़ मॉडर्न आर्ट देश के प्रमुख संस्थानों में से एक है, यहां भारत के कुछ सबसे प्राचीन चित्र और कलाकृतियां देखने को मिलती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0273 इस गैलरी में लगभग 14,000 कृतियां हैं, जिनमें से कुछ सन् 1850 के दशक की है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0274 यहां जिन महान चित्रकारों की कृतियां प्रदर्शित कि गई हैं उनमें रवींद्रनाथ टैगोर, राजा रवि वर्मा, थॉमस डेनियल, गगनेंद्रनाथ टैगोर, अबनिंद्रनाथ टैगोर, नंदलाल बोस के साथ कई विदेशी कलाकारों और मूर्तिकारों की कृतियां भी शामिल हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0276 इस गैलरी का क्षेत्र, जयपुर के महाराजा का पूर्व आवासीय महल था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0277 सन् 1936 में इस तितली के आकार वाले भवन का निर्माण हुआ था, जिसे सर आर्थर ब्लूमफील्ड द्वारा डिजाइन किया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0278 इस गैलरी का पहला निरीक्षक हरमन गोएट्ज़ थे, जो जर्मन कला के प्रतिष्ठित इतिहासकार थे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0279 कुछ समय बाद इसमें कला पुनर्वीकरण सेवा (आर्ट रेस्टोरेशन सर्विसेज) और कला संदर्भ पुस्तकालय (आर्ट रेफरेंस लाइब्रेरी) जैसी नई सुविधाएं जोड़ी गई। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0280 सन् 2009 में पुरानी गैलरी से छ: गुना बड़ी एक नई संरचना जोड़ी गई, और इसके साथ एक नये ऑडिटोरियम, एक पूर्वावलोकन (प्रिव्यू) थियेटर और प्राकृतिक संरक्षण प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0282 लोधी कला मंडल (आर्ट डिस्ट्रिक्ट) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0284 यदि आपको सड़क किनारे खड़े एक बांसुरी बेचने वाला, किताबों के ढेर के पीछे बैठे और अखबार पढ़ते हुए सरदारजी, एक आलसी गाय आसमान को देखती हुई, एक दुकानदार अपने ग्राहकों को मिठाइयां बेचता हुआ और कई अन्य चीज़े दिखें तो आप जान जायें कि आप लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट में है, जो लोधी कॉलोनी में है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0285 इस अनजान पड़ोस में एक आश्चर्यजनक परिवर्तन देखा गया, और यह आर्ट डिस्ट्रिक्ट एक जीवंत कैनवास है जो आस-पास की जीवित कहानियां को दीवारों पर उतार देता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0286 इस क्षेत्र को भारत के पहले सार्वजनिक कला मंडल (आर्ट डिस्ट्रिक्ट) में परिवर्तित करने के लिए है, यहां के सड़क के किनारों की दीवारें भारत और दुनिया भर के कलाकारों के लिये कैनवास बन गईं हैं, जिस पर उन्होंने अनेक चित्रकारियां की हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0288 नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0290 भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की याद में बनाया गया यह संग्रहालय नेहरू जी पुराने कार्यालय को प्रदर्शित करता है, जिसे फिर से उसी शिल्पकृतियों और फर्नीचर से बनाया गया है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0291 यहां के पुस्तकालय में काफी पुस्तके हैं, जो आधुनिक भारत के इतिहास को बताते है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0292 यहां का नेहरू तारामंडल एक अन्य आकर्षण केन्द्र है जिससे पूरे क्षेत्र के पर्यटक इसकी ओर आकर्षित होते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0293 इस तारामंडल के आकाश थियेटर में आप कई दिलचस्प शो और प्रस्तुतियों को देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0295 राष्ट्रीय पुलिस संग्रहालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0297 भारत का यह दिलचस्प संग्रहालय केंद्रीय पुलिस बल, राज्य पुलिस बल और विदेशी देशों के पुलिस बल से संग्रहित प्रदर्शनो को प्रदर्शित करता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0298 यहां प्रदर्शित की जाने वाली लोकप्रिय वस्तुएं, हथियार, जाली दस्तावेज़, छवियां, नकली उपकरण आदि हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0299 इस संग्रहालय में पुलिस की क्षमताओं को भी दर्शाया जाता है कि कैसे वो अपराध को सुलझाती हैं और अपराधियों को गिरफ्तार करती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0300 यहां आप दुनिया भर के फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशालाओं, केन्द्र और राज्यों के फिंगर प्रिंट ब्यूरो और पुलिस बल द्वारा उपयोग की जाने वाली आधुनिक और पुरानी तकनीकों के भी प्रदर्शनों को देख सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0301 इस संग्रहालय की स्थापना सन् 1991 में की गई थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0303 राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र संग्रहालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0305 इस प्रभावशाली विज्ञान केंद्र का उद्देश्य विज्ञान की उपलब्धियों के बारे में आगंतुकों को शिक्षित करना है, दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र संग्रहालय में जरूर जाएं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0306 इस संग्रहालय में विज्ञान की क्रियाशील प्रदर्शनी अद्भुत आकर्षक हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0307 पर्यटक यहां विभिन्न हिस्से में दिलचस्प प्रदर्शन देख सकते हैं जो सभी उम्र के पर्यटकों के लिए है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0308 यहां अपने हाथ से चलाने वाले यंत्र लगें हैं जो भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से दिखाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0309 राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र संग्रहालय सन् 1992 में स्थापित किया गया था और यह राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद का एक भाग है, जो संस्कृति मंत्रालय के तहत आता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0311 लाल किला पुरातत्व संग्रहालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0313 लाल किला, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, और इसका यह संग्रहालय मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को समर्पित है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0314 इसमें मुगल काल की अनेक संग्रह हैं जिसमें पेंटिंग, सुलेखन (कैलिग्राफी), कलाकृतियां, वेशभूषा और वस्त्र आदि वस्तुएं हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0315 इस संग्रहालय का प्रमुख आकर्षण सन् 1857 की स्वतंत्रता के युद्ध के हथियार और एक नक्शा है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0316 अन्य दर्शनीय चीजें हैं, राजा का चांदी का हुक्का, मोतियों से जड़े रेशमी कपड़े, 19 वीं शताब्दी के वस्त्र और 13 वीं शताब्दी की सुंदर नीली टाइलें, आदि। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0317 यह लाल किला पुरातत्व संग्रहालय, लाल किले के मुमताज महल के अंदर स्थित है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0319 वायु सेना संग्रहालय ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0321 यह शानदार संग्रहालय पालम के वायु सेना स्टेशन में स्थित है, यहां शस्त्रागार और हवाई जहाजों की एक सुंदर और सक्रिय संग्रह है, जो भारतीय वायु सेना के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0322 यह संग्रहालय भारत की वायु सेना की महान उपलब्धियों को दर्शाता है, और देश की शांति में इसकी अहम भूमिका पर भी प्रकाश डालता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0326 इन व्यंजनों में लिप्त हो जाएं ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0328 दिल्ली का खाना बेहद लजीज, विविधता पूर्ण और स्वादिष्ट होता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0329 नाश्ते में चटपटी चाट या नरम निहारी के मजे लें, राजधानी में व्यंजनों की श्रेणी आपको अधिक खाने के लिए विवश करेगी और फिर भी आप असंतुष्ट रहेंगे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0330 "#SEG189" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0332 "#SEG190" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0333 बटर चिकन ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0334 "#SEG191" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0335 सन् 1950 के दशक में मांसाहारियों के अधिकांश व्यंजनों का मूल, दरिया गंज का मोती महल हुआ करता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0336 ऐसा कहा जाता है कि यह जगह पहले से ही तंदूरी चिकन प्रेमियों के बीच लोकप्रिय था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0337 यहां के रेस्तत्रां के रसोइये बचे हुए चिकन की तरी के पुनः उपयोग करने की आदत थी, और इसके लिये वे इसमें मक्खन और टमाटर मिला दिया करते थे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0338 और इस तरह बने सॉस में तंदूरी चिकन के टुकड़ों के साथ पका दिया जाता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0339 इस प्रकार स्वादिष्ट बटर चिकन अस्तित्व में आया, जिसके स्वाद ने पूरे विश्व के लोगो के मुंह से लार टपका दी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0340 यह मलाईदार लाल टमाटर की ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी होती है और स्वाद में यह थोड़ा मीठा होता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0341 यह पकवान मुंह में डालते ही पिघल जाता है, क्योंकि इसकी तरी चिकन टुकड़ों में अच्छी तरह से रिस जाती है, जिसकी वजह से चिकन के टुकड़े तर और नरम हो जाते है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0342 इसे नान या रोटी के साथ खाने में सबसे ज्यादा मजा आता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0343 "#SEG192" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0345 "#SEG193" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0346 परांठों को सपाट सतह वाले तवे पर पकाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0347 सबसे बेहतरीन परांठे चांदनी चौक इलाके में परांठे वाली गली में मिलते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0348 सन् 1870 के दशक से परांठों की दुकानें यहां है, जब वे पहली बार यहां आये। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0349 आप यहां के स्वादिष्ट परांठे खाकर अपना नाम उन नामी बड़े लोगों में जोड़ सकते हैं, जो ,यहां इसका स्वाद लेने आये, जैसे जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, इत्यादि। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0350 यहां के पराठे, आलू, मटर, या फूलगोभी से भरे होते हैं, इसके साथ ही नये प्रकार के विभिन्न पराठे, दाल, मेथी, मूली, पापड़, या गाजर से भी भरे मिलेंगे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0351 यहां पनीर, पुदीना, नींबू, मिर्च, सूखे मेवे, काजू, किशमिश, बादाम, रबड़ी, खुरचन, केला, करेला, भिंडी और टमाटर से भरे परांठे भी मिलते हैं पर वो थोड़े महंगे होते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0352 इसे पुदीने की चटनी, इमली या केले की चटनी, आलू की सब्जी या अंचार के साथ परोसा जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0353 "#SEG194" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0354 मिठाई और डेज़र्ट्स (भोजन और व्यंजन) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0355 "#SEG195" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0356 जब मिठाई की बात आती है तो दिल्ली किसी खाने के ख़ज़ाने से कम नहीं है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0357 अगर आप अपने खाने की शुरूआत किसी लजीज मीठें पकवान से करना चाहते हैं तो शुरू रबड़ी फलूदा से करें, यह गाढ़े दूध से बनी मलाईदार व्यंजन है जिसे सेंवई की नूडल्स के साथ परोसा जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0358 कुल्फी एक जमने वाली डिश है, और अगर आपका मन कभी थोड़ा मीठा खाने का हो, या खाने के बाद मीठा खाना हो तो उस सूची में कुल्फी सबसे ऊपर होगी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0359 इसके विभिन्न विकल्प हैं, जैसे ठंडा और जूसी अनार, सुगंधित केसर, पिस्ता, गुलाब, केला, और आम आदि। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0360 यदि किसी को अपने शाम के स्नैक को लज्जतदार बनाना है तो उसके लिए जलेबी एक बेहतरीन विकल्प है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0361 इसमें जलेबी के घोल को टेड़े- मेड़े आकार में तलने के बाद, चाशनी में डुबो दिया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0362 जलेबी को रबड़ी फलूदा के साथ भी खाया जा सकता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0363 दिल्ली का अन्य मीठा व्यंजन है दौलत की चाट, जो गाढ़े दूध की उफनती छाली से बनता है, यह हल्का और फुला हुआ होता है और इसे पिस्ते की कतरनों से सजाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0364 "#SEG196" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0365 त्योहारों के अवसरों पर लगभग हर भारतीय परिवार में बनने वाला मीठा पकवान खीर है, जिसका स्वाद दिल्ली में जरूर लें। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0366 इसे बनाने के लिए चावल, चीनी और दूध को उबाला जाता है और इसे ठंडा और गर्म दोनो तरीकों से खाया जा सकता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0367 और इसके ऊपर मेवे के कतरन डालना न भूलें। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0368 "#SEG197" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0369 शुद्ध देसी घी से बनी मिठाइयां, जैसे सोहन हलवे, पिस्ता समोसा और बदाम बर्फी का भी आप यहां लुत्फ उठा सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0370 "#SEG198" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0371 तंदूरी चिकन ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0372 "#SEG199" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0373 दिल्ली की खाद्य संस्कृति और तंदूरी चिकन में काफी समानता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0374 यह चिकन को भून कर बनता है, जिसमें चिकन को दही और मसालों में मिला कर तंदूर में पकाया जाता है, तंदूर एक मिट्टी का बेलनाकार ओवन है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0375 इसे सबसे ज्यादा लोग तंदूरी रोटी के साथ खाना पंसद करते हैं, और यह ज्यादा कीमती भी नही होता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0376 "#SEG200" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0377 कबाब (भोजन) ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0378 "#SEG201" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0379 कबाब भारत में अफगानों द्वारा लाया गया था और इसकी शुरूआत तुर्की की रसोई में हुई थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0380 इसकी लोकप्रियता मुगल काल के दौरान हुई थी और आज के समय में देश भर में तरह-तरह के कबाब खाने को मिलते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0381 यह बारीक कटे हुए मांस और भारतीय महक वाले मसालों से बनाया जाता है, दिल्ली में रूई की तरह मुलायम कबाब को देख कर आपके मुंह में पानी भर आएगा। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0382 यहां तरह-तरह के लजीज कबाब खाने को मिलते हैं, जैसे काकोरी कबाब, और यह कबाब मटन पर पुदीने के लेप लगा कर पकाया जाता है, शम्मी कबाब, मटन या चिकन का बना हुआ होता हैं और यह मुलायम कबाब, मुंह में डालते ही धुल जाता है, रेशमी कबाब, बरीक कटे हुए चिकन से बनता है और इसे कोयले की आंच पर पकाया जाता है, सुतली कबाब को एक आकार में मांस को काट कर उस पर मसालों का पेस्ट लगाया जाता है और फिर इसे सीक में डाल कर पकाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0383 "#SEG202" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0384 कबाब तैयार करने की प्रक्रिया बेहद दिलचस्प है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0385 इसे सीक के अंदर डाल कर तंदूर में पकाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0386 इसके पकने के बाद इस पर नींबू निचोड़ दिया जाता है, फिर इसे रूमाली रोटी और प्याज के साथ खाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0387 "#SEG203" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0389 "#SEG204" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0390 बासमती चावल से बनी बिरयानी दिल्ली के हर कोने में मिलती है, जिसकी विविधताएं स्थानीय या किसी विषेश स्थान से संबंद्धित रहती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0391 इसे धीमी आंच में एक हांडी में भारतीय मसालों के साथ पकाया जाता है, और इसमें केसर और मांस के टुकड़े मिलाये जाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0392 स्वादिष्ट बिरयानी बनाने की विधि थोड़ी जटिल है, इसे बनाने के लिए कौन सी चीज़ कब और कितनी डालनी है इस तकनीक का पता होना चाहिए। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0393 पारंपरिक पद्धति में दम पुख्त में बिरयानी पकाया जाता है, जो एक धीमी आंच के चूल्हा है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0394 एक हाड़ी में सभी सामग्री डाल कर इसे कोयले की आंच पर धीरे-धीरे पकाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0395 हांडी को आटे की लेप से बन्द कर दिया जाता है, इस वजह से भाप से मांस पक कर मुलायम हो जाता है और चावल पानी में रिस जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0396 बिरयानी में 15 से भी अधिक प्रकार के मसालों का उपयोग होता हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0397 इसकी कई विविधताएं हैं, हालांकि चिकन इसकी मुख्य सामग्री है पर इसमें केकड़े, झींगे और मछली का भी उपयोग किया जा सकता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0398 इस पकवान में अच्छी सुगंध देने के लिए गुलाब जल, केवड़ा जल और खाद्य इतर को भी मिलाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0399 "#SEG205" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0400 ऐसा कहा जाता है कि बिरयानी बनानी की विधि का नुस्खा तुर्क और मंगोल विजेता तैमूर अपने साथ ले कर भारत आए थे। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0401 ऐसा माना जाता है कि तैमूर की सेना को खाने के लिए चावल, मांस और मसालों का मिश्रण दिया जाता था, जो एक बड़ी हांडी में पकाया जाता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0402 "#SEG206" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0403 इसकी एक और कहानी है कि बिरयानी अरब व्यापारियों द्वारा मालाबार तट पर लाई गई थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0404 तमिल साहित्य में एक ऐतिहासिक अभिलेख में 'ऊँ सोरू' नामक चावल के एक पकवान का वर्णन मिलता है, जो 2 ईस्वी में व्यापारियों द्वारा लाया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0405 ऐसा कहा जाता है कि यह पकवान चावल से बना होता था, जिसमें घी, मांस, धनिया, काली मिर्च, हल्दी और तेजपत्ता मिला होता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0406 "#SEG207" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0407 छोले भटूरे ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0408 "#SEG208" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0409 छोले भटूरे दिल्ली में सबसे लोकप्रिय स्नैक्स में से एक है, जिसकी उत्पत्ती पंजाब में हुई थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0410 इसे सफेद छोले से बनाया जाता है, जिसे रात भर भिगोया जाता है और फिर मसालों में उसे पकाया जाता है, इसे भटूरे के साथ खाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0411 यह लोकप्रिय नाश्ता है, जो अचार, प्याज या हरी चटनी या लस्सी के लंबे गिलास के साथ परोसा जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0412 "#SEG209" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0413 निहारी ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0414 "#SEG210" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0415 एक स्टू जिसमें धीमी पका हुआ मांस और अस्थि मज्जा होता है, निहारी मुंह में मजबूत भावपूर्ण स्वाद का एक विस्फोट है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0416 नरम मांस, मसालेदार स्टू और मिर्च के साथ, मिट्टी के ओवन में बनाई गई नाजुक खमीरी रोटी के साथ खाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0417 पुरानी दिल्ली में नल्ली निहारी एक पारंपरिक नाश्ता है जिसे लोग बढ़े चाव से खाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0418 "#SEG211" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0419 ऐसा कहा जाता है कि निहारी की रेसिपी 17 वीं या 18 वीं सदी की है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0420 यह संभवतः पुरानी दिल्ली में विकसित हुई थी और इसे बनाने की विधि की प्रेरणा अवधी खा़नसामे से ली गई थी। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0421 "#SEG212" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0422 निहारी में एक इंडो फ़ारसी प्रभाव देखने को मिलता है, जो मुगलों द्वारा भारत लाया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0423 हालांकि निहारी शब्द अरबी के निहार से आया है, जिसका अर्थ 'सुबह' होता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0424 ऐसा कहा जाता है कि मुगल काल के दौरान नवाबों द्वारा उनकी प्रार्थना करने के बाद निहारी को नाश्ते में खाया जाता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0425 बाद में सेना के जवानों और मुगल सैनिकों को भी ऊर्जा बढ़ाने के लिए इस मांसाहारी व्यंजन को दिया जाने लगा। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0426 ऐसा कहा जाता है कि इसे पूरी रात बड़े-बड़े बर्तनों में पकाया जाता था और सुबह मजदूरों और सैनिकों को मुफ्त में परोसा जाता था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0427 "#SEG213" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0428 इस सुबह के नाश्ते का एक अनूठा पहलू यह है कि कल की बची हुई निहारी (टार) को अगले दिन तैयार किए जाने वाले पकवान में मिला दिया जाता है, जिससे उस पकवान का अलग जायका निखर कर आता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0429 यह प्रथा कई सदियों से चलन में है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0430 "#SEG214" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0432 "#SEG215" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0433 दिल्ली के लोगों में चाट इतना लोकप्रिय है कि राजधानी के हर कोने में आपको एक चाट वाला मिलेंगा। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0434 चाट में सबसे ज्यादा मशहूर गोलगप्पा है, जो एक छोटा आंटे का फूला गोलगप्पा होता है जिसमें आलू और इमली के पानी भर कर खाया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0435 कुल्ले-की-चाट का जायका जरूर लें, जो फलों और सब्जियों को बीच से खोखला करके बनाया जाता है और उसे उबले हुए छोले, और अनार के दाने से भर दिए जाते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0436 इसके उपर नींबू का रस और चाट मसाला डाल दिया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0437 आप को आलू चाट भी चखनी चाहिए, इसमें आलू के टुकड़े को तल कर चटपटे घोल मे डाल दिया जाता है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0438 आलू टिक्की भी एक बेहतरीन विकल्प है जिसमें आप इसे इमली की चटनी या पुदीने की चटनी के साथ चटकारे लेते हुए खा सकते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0439 "#SEG216" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0440 ऐसा कहा जाता है कि मुगल सम्राट शाहजहां की रसोई में चाट बनाया गया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0441 ऐसा माना जाता था कि उस समय यमुना का पानी बहुत दूषित हो गया था, उसके प्रभाव को कम करने के लिए खा़नसामों ने अधिक तेल और मसाले वाला खाना बनाना शुरू कर दिया था। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0442 इसी वजह से चाट अस्तित्व में आया। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0443 "#SEG217" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0445 "#SEG218" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0447 "#SEG219" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0448 यह शहर घरेलू उड़ानों के माध्यम से देश के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0449 यही नहीं, नई दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से बड़ी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी संचालित होती हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0450 "#SEG220" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0452 "#SEG221" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0453 नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, दिल्ली को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0454 "#SEG222" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0456 "#SEG223" ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0457 यह शहर देश के प्रमुख शहरों में सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों के जाल से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। ebs_tourism-delhi-part2-hin-translation-hin2tel_0458 कश्मीरी गेट पर इंटर स्टेट बस टर्मिनस, सराय काले-खान बस टर्मिनस, और आनंद विहार बस टर्मिनस दिल्ली के प्रमुख बस स्टैंड हैं।