ID SENT ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0001 1. गति के नियम ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0003 - गति ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0005 - त्वरण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0007 - विस्थापन और दूरी ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0009 - न्यूटन के गति संबंधी नियम और समीकरण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0011 पिंड की गति (Motion of an Object) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0015 नीचे दिए गए कौन-कौन-से उदाहरणों में आपको गति की अनुभूति होती है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0016 गति के होने या ना होने का स्पष्टीकरण आप कैसे करेंगे? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0018 1. पक्षी का उड़ना। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0020 2. रुकी हुई रेलगाड़ी। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0022 3. हवा में उड़ने वाले घास-पात। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0024 4. पहाड़ पर स्थित-स्थिर पत्थर। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0026 दैनिक जीवन में हम विभिन्न पिंडों की गति देखते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0027 कई बार हम पिंडों की गति प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख सकते, जैसे कि बहने वाली हवा। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0028 उपर्युक्त उदाहरणों की भाँति हम अनेक उदाहरण बता सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0029 वे कौन-से हैं? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0033 1. आप बस में सफर कर रहे हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0034 क्या आपके पड़ोस में बैठा हुआ व्यक्ति गतिशील है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0036 2. किसी पिंड के गतिशील होने या न होने को निश्चित करने के लिए आपको कौन-कौन-सी बातों का विचार करना पड़ेगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0037 आपने पिछली कक्षा में पढ़ा है कि गति एक सापेक्ष संकल्पना है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0038 यदि कोई पिंड अपने चारों ओर के पिंडों के संदर्भ में अपना स्थान परिवर्तित कर रहा हो तो, हम कह सकते हैं कि वह पिंड गतिशील है और यदि वह अपने चारों ओर के पिंडों के संदर्भ में अपना स्थान परिवर्तित न करे तो हम कह सकते हैं कि वह स्थिर है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0040 विस्थापन और दूरी (Displacement and Distance) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0042 आओ करके देखें ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0044 1. आकृति 1.1 (अ) में दिखाए अनुसार धागे की सहायता से A तथा B के बीच की दूरी अलग-अलग प्रकार से नापिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0046 2. अब पुनः A से B तक की दूरी सीधी खंडित रेखा द्वारा दर्शाए गए पथ से नापें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0047 आपके मतानुसार किस पथ से नापी गई दूरी योग्य है ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0050 आकृति 1.1 विद्‍यालय और घर की स्थिति ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0054 1. शीतल विद्‍यालय जाते समय अपनी सहेली संगीता के घर जाकर फिर विद्‍यालय गई। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0055 आकृति 1.1 (आ) देखिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0057 2. लेकिन प्रशांत सीधे विद्‌यालय गया। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0059 यदि दोनों एकसमान चाल से चले हों तो कौन कम समय में विद्‍यालय पहुँचेगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0062 क्या उपर्युक्त उदाहरण में प्रत्यक्ष तय की गई दूरी और यथार्थ दूरी में अंतर होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0063 क्याें? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0067 दूरी का अर्थ दो बिंदुओं के बीच गतिशील रहने पर पिंड द्वारा प्रत्यक्ष रूप से तय किया गया पथ है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0068 विस्थापन का अर्थ गतिशीलता के प्रारंभ और अंतिम बिंदु के बीच की सबसे कम दूरी है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0072 1. आकृति 1.2 (अ) में दर्शाए अनुसार स्वराली हर दिन प्रातः 100 मीटर त्रिज्यावाले वृत्ताकार मैदान के किनारे पर चक्कर लगाती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0073 बिंदु A से चलने की शुरुआत करके एक चक्कर पूर्ण करने पर उसके द्वारा तय की गई दूरी और उसका विस्थापन कितना होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0075 2. आकृति 1.2 (आ) में दिखाए अनुसार यदि एक गाड़ी बिंदु P से निकलकर स्थान Q तक गई और पुनः स्थान P पर वापस आई तो उसके द्वारा तय की गई दूरी और उसका विस्थापन कितना होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0077 आकृति 1.2 दूरी और विस्थापन ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0079 किसी पिंड का विस्थापन शून्य होने पर भी पिंड द्वारा प्रत्यक्ष रूप से तय की गई दूरी शून्य नहीं हो सकती। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0081 चाल और वेग (Speed and Velocity) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0085 1. सदिश (Vectors) और अदिश (Scalars) राशि का क्या अर्थ है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0087 2. दूरी (Distance), चाल (Speed), वेग (Velocity), समय (Time), विस्थापन (Displacement) में से सदिश और अदिश राशियाँ कौन-सी हैं? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0089 चाल = तय की गई कुल दूरी/लगा हुआ कुल समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0091 किसी पिंड द्वारा इकाई समय में एक ही दिशा में तय की गई दूरी को वेग (Velocity) कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0092 यहाँ इकाई समय का अर्थ एक सेकंड, एक मिनिट, एक घंटा इत्यादि हो सकता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0093 बड़ी इकाई द्वारा समय नापने पर एक वर्ष भी इकाई समय हो सकता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0094 इकाई समय में होने वाले विस्थापन को वेग कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0096 वेग = विस्थापन/समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0100 1. चाल और वेग की इकाइयाँ समान होती हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0101 उनकी SI प्रणाली में इकाई m/s और CGS प्रणाली में इकाई cm/s है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0103 2. चाल दूरी से संबंधित है तो वेग विस्थापन से संबंधित है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0105 3. यदि गति सरल रेखा में है तो चाल और वेग का मान समान होता है अन्यथा वे अलग-अलग हो सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0108 Page-2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0110 पिछले उदाहरण (पृष्ठ क्र.1) में शीतल और संगीता के घरों के बीच की दूरी सरल रेखा में 500 मीटर है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0111 संगीता के घर और विद्‌यालय की दूरी सरल रेखा में 1200 मीटर है और शीतल के घर और विद्‍यालय की दूरी सरल रेखा में 1300 मीटर है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0112 यदि शीतल को संगीता के घर जाने के लिए 5 मिनिट लगे और वहाँ से विद्‍यालय जाने के लिए 24 मिनट लगे तो, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0114 शीतल की A पथ पर चाल = दूरी/समय = 500 मीटर/5 मिनिट = 100 मीटर/मिनिट ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0116 शीतल की B पथ पर चाल = दूरी/समय = 1200 मीटर/24 मिनिट = 50 मीटर/मिनिट ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0118 शीतल की औसत चाल = कुल दूरी/कुल समय = 1700 मीटर/ 29 मिनिट = 58.6 मीटर/मिनिट ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0120 शीतल का औसत वेग = प्रत्यक्ष विस्थापन/समय = 1300 मीटर/29 मिनिट ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0122 शीतल का वेग = 44.83 मीटर/मिनिट ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0124 चाल और दिशा का वेग पर होने वाला प्रभाव ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0126 सचिन मोटर साइकिल से सफर कर रहा है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0127 सफर करते समय निम्नलिखित प्रसंगों में क्या घटित हुआ बताइए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0128 (आकृति 1.3 देखिए) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0130 1. सचिन द्वारा मोटर साइकिल से सफर करते समय, गति की दिशा बदलते हुए मोटर साइकिल की चाल बढ़ाने या कम करने से वेग पर क्या प्रभाव होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0132 2. क्या सचिन के सफर करते समय किसी मोड़ के आने पर चाल और वेग समान होंगे? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0134 सचिन द्वारा मोटर साइकिल की चाल स्थिर रखकर दिशा बदलने से वेग पर क्या प्रभाव होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0136 3. घुमावदार रास्ते पर मोटर साइकिल चलाते समय सचिन द्वारा मोटर साइकिल की चाल और दिशा दोनों परिवर्तित करने से वेग पर क्या प्रभाव होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0138 उपर्युक्त प्रसंगों से यह स्पष्ट होता है कि वेग, चाल और दिशा दोनों पर निर्भर करता है और वेग आगे दिए अनुसार बदलता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0140 1. चाल परिवर्तित करके और दिशा वही रखकर। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0142 2. दिशा परिवर्तित करके और चाल वही रखकर। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0144 3. चाल और गति की दिशा दोनों परिवर्तित करके। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0146 आकृति 1.3 वेग पर होने वाला प्रभाव ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0150 चाल का मापन दूरी/समय के अनुसार सर्वप्रथम गैलेलियो ने किया। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0151 हवा में ध्वनि का वेग 343.2 m/s और प्रकाश का वेग 3x10^8 m/s है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0152 पृथ्वी की सूर्य के परितः परिभ्रमण करने की चाल 29770 m/s है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0154 Page-3 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0156 एकरेखीय एकसमान और असमान गति (Uniform and Nonuniform Motion along a straight line) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0158 अमर, अकबर और एंथनी उनकी स्वयं की गाड़ी से अलग-अलग वेग से सफर कर रहे हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0159 उनकी अलग-अलग समय में तय की गई दूरी नीचे तालिका में दी गई है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0163 1. अमर, अकबर और एंथनी द्वारा सफर करते समय नोट की गई दूरियों के लिए समय कितना है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0165 2. निश्चित समय में समान दूरी किसने तय की है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0167 3. क्या अकबर द्वारा निश्चित समय में तय की गई दूरी समान है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0169 4. अमर, अकबर और एंथनी द्वारा निश्चित समय में तय की गई दूरी का विचार करते हुए उनकी चाल किस प्रकार की हैं? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0171 यदि पिंड द्वारा समान समय में समान दूरी तय की जाती है तो उसकी गति को एकसमान गति कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0173 यदि पिंड समान समय में असमान दूरी तय करता है तो उसकी गति को असमान गति कहते हैं, जैसे - भीड़वाले रास्ते पर वाहनों की गति या साइकिल चलाने की गति। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0175 त्वरण (Acceleration) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0177 आओ करेके देखें ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0179 1. 1 मीटर लंबाई वाली एक पनारी (नली) लो। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0181 2. आकृति 1.4 के अनुसार पनारी का एक सिरा जमीन पर टिकाकर उसका दूसरा सिरा जमीन से कुछ ऊँचाई पर हाथ से पकड़ें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0183 3. एक छोटी गेंद लेकर उसे पनारी के ऊँचे भाग की ओर से छोड़ दें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0185 4. गेंद के नीचे आते समय उसके वेग का अवलोकन करें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0187 5. क्या गेंद के ऊपर से नीचे आते समय, उसका वेग सभी स्थानों पर समान था? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0189 6. प्रारंभ में, बीच में और जमीन के पास आते समय वेग कैसे बदलता है, उसका अवलोकन करें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0191 आकृति 1.4 वेग में परिवर्तन ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0195 बचपन में आप सभी फिसलपट्टी पर खेले होंगे। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0196 फिसलपट्टी से फिसलते समय प्रारंभ में वेग कम होता है, बीच में वह बढ़ता है और अंत में वह कम होकर इसे सदैव ध्यान में रखिए शून्य हो जाता है, यह हमें पता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0197 इस वेग परिवर्तन की दर को ही हम त्वरण कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0199 त्वरण = वेग में परिवर्तन/समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0201 यदि प्रारंभिक वेग u समय t के पश्चात बदलकर अंतिम वेग v हो जाता है तो ... ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0203 त्वरण = a = अंतिम वेग - प्रारंभिक वेग/समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0205 ∴ a = (v-u)/t ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0207 यदि कोई गतिशील पिंड निश्चित समय में वेग बदलता है तो उस पिंड की गति को त्वरित गति कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0208 गतिशील पिंड में दो प्रकार के त्वरण हो सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0210 1. यदि समान समय में वेग में समान परिवर्तन होता है तो एकसमान त्वरण होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0212 2. यदि समान समय में वेग में असमान परिवर्तन होता है तो असमान त्वरण होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0216 1. जब गति की शुरुआत होते समय पिंड विराम अवस्था में होता है तब पिंड का प्रारंभिक वेग कितना होता है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0218 2. जब गति के अंत में पिंड विरामावस्था में आता है तब उसका अंतिम वेग कितना होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0220 धनात्मक, ॠणात्मक और शून्य त्वरण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0222 किसी पिंड का त्वरण धनात्मक या ॠणात्मक हो सकता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0223 जब किसी पिंड का वेग बढ़ता है तब त्वरण धनात्मक होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0224 यहाँ त्वरण वेग की दिशा में होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0225 जब किसी वस्तु का वेग कम होता है तब त्वरण ॠणात्मक होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0226 ॠणात्मक त्वरण को 'अवत्वरण' या 'मंदन' (Deceleration) कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0227 यह वेग की विपरीत दिशा में होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0228 वेग स्थिर रहने पर त्वरण शून्य होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0230 एकसमान गति के लिए दूरी - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0232 नीचे दी गई तालिका में एक गाड़ी द्वारा निश्चित समय में तय की गई दूरी दी गई हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0233 तालिका के अनुसार समय X अक्ष पर तथा दूरी Y अक्ष पर लेकर आकृति 1.5 में आलेख बनाइए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0234 क्या दूरी और समय के बीच समानुपात का संबंध आलेख द्वारा स्पष्ट होता है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0236 पैमाना : X अक्ष 1 सेमी =10 सेकंड ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0238 Y अक्ष 1 सेमी = 20 मीटर ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0240 आकृति 1.5 दूरी - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0244 एकसमान गति में पिंड समान समयाविधि में समान दूरी तय करता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0245 यह दूरी-समय आलेख की सरल रेखा दर्शाती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0249 दूरी – समय आलेख की सरल रेखा का ढाल (slope) निकालने पर वह क्या दर्शाता है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0251 असमान गति के लिए दूरी - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0253 दी गई सारिणी में बस द्वारा निश्चित समय में तय की गई दूरियाँ दी गई हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0254 समय को X-अक्ष पर तथा दूरी को Y-अक्ष पर लेकर आकृति 1.6 में आलेख बनाइए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0255 क्या दूरी और समय के बीच समानुपात का संबंध आलेख की सहायता से स्पष्ट होता है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0257 आकृति 1.6 दूरी - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0259 यहाँ समयानुसार दूरी में असमान परिवर्तन होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0260 अतः यहाँ गति असमान है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0264 एकसमान गति और असमान गति के दूरी-समय आलेखों में आपको क्या अंतर दिखाई दिया? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0266 एकसमान गति के लिए वेग – समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0268 एक रेलगाड़ी 60 किमी प्रति घंटे के एकसमान वेग से सतत रूप से गतिशील है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0269 इस एकसमान गति के लिए वेग और समय का परिवर्तन वेग-समय आलेख (आकृति 1.7) में दर्शाया गया है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0271 1. रेलगाड़ी द्वारा 2 से 4 घंटों के बीच तय की गई दूरी कैसे ज्ञात की जा सकती है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0273 2. क्या 2 से 4 घंटों के बीच रेलगाड़ी द्वारा तय की गई दूरी और आकृति के एक चतुर्भुज ABCD के क्षेत्रफल का संबंध है क्या? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0274 यहाँ गाड़ी का त्वरण कितना है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0276 आकृति 1.7 वेग - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0278 Page-6 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0280 एकसमान त्वरित गति के लिए वेग – समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0282 निश्चित समयावधिनुसार कार के वेग में होने वाले परिवर्तन सारिणी में दिए गए हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0284 आकृति 1.8 वेग - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0286 आकृति 1.8 का आलेख दर्शाता है कि, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0288 1. निश्चित समयावधि में वेग में समान परिवर्तन होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0289 यह वेग त्वरित है और त्वरित एकसमान है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0290 प्रत्येक 5 मिनिट में वेग में कितना परिवर्तन होता है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0292 2. सभी एकसमान त्वरित गति के लिए वेग-समय आलेख सरल रेखा होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0294 3. असमान त्वरित गति के लिए वेग-समय आलेख समयानुसार त्वरण में होने वाले परिवर्तन के अनुसार किसी भी आकार का हो सकता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0296 आकृति 1.8 के आलेख की सहायता से कार द्वारा 10 सेकंड से 20 सेकंड की समयावधि के बीच तय की गई दूरी हम रेलगाड़ी के पिछले उदाहरण की तरह ज्ञात कर सकते हैं, लेकिन यहाँ कार का वेग स्थिर न रहकर एकसमान त्वरण के कारण सतत रूप से परिवर्तित हो रहा है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0297 ऐसे समय हम दी गई समयावधि के बीच कार के औसत वेग का उपयोग करके कार द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कर सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0299 आलेख द्वारा दिखाई देता है कि कार का औसत वेग (32 +16)/2 = 24 मीटर/सेकंड है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0301 इसे दी गई समयावधि अर्थात 10 सेकंड से गुणा करने पर कार द्वारा तय की गई दूरी प्राप्त होती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0303 दूरी = 24 मीटर/सेकंड × 10 सेकंड = 240 मीटर ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0305 पिछले उदाहरण की तरह कार द्वारा तय की गई दूरी चतुर्भुज ABCD के क्षेत्रफल के बराबर होगी, इसकी पड़ताल करके देखिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0307 A(☐ ABCD ) = A (☐ AECD) + A (∆ ABE) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0309 आलेख पद्धति द्वारा गति संबंधी समीकरण (Equations of Motion using graphical method) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0311 न्यूटन ने पिंड की गति का अध्ययन किया और बाद में गति संबंधी तीन समीकरण का समुच्चय प्रतिपादित किया। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0312 एक रेखा में गतिशील पिंड के विस्थापन, वेग, त्वरण और समय में संबंध इन समीकरणों द्वारा स्थापित किया गया है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0314 Page-7 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0316 एक पिंड प्रारंभ में 'u' वेग से सरल रेखा में गतिशील है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0317 't' समय के अंतर्गत त्व‍रण के कारण वह अंतिम वेग 'v' प्राप्त करता है और उसका विस्थापन 's' है तो तीन समीकरणों का समुच्चय इस प्रकार दे सकते हैं, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0319 v = u + at यह वेग - समय संबंध दर्शाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0321 s = ut +1/2at^2 यह विस्थापन - समय संबंध दर्शाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0323 v^2 = u^2 + 2as यह विस्थापन - वेग संबंध दर्शाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0325 हम देखेंगे कि ये समीकरण आलेख पद्धति से कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0327 वेग – समय संबंध का समीकरण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0329 एक समान त्वरित वेग से गतिमान पिंड के वेग में समयानुसार होने वाला परिवर्तन आकृति 1.9 में आलेख की सहायता से दर्शाया गया है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0330 पिंड आलेख के बिंदु D से गतिशील होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0331 समयानुसार पिंड का वेग बढ़ता जाता है और समय t के पश्चात पिंड आलेख के बिंदु B तक पहुँचता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0333 पिंड का प्रारंभिक वेग = u = OD ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0335 पिंड का अंतिम वेग = v = OC ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0337 कालावधि = t = OE ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0339 बिंदु B से Y अक्ष के समांतर रेखा खींचें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0340 वह X अक्ष को बिंदु E पर प्रतिच्छेदित करती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0341 बिंदु D से X अक्ष के समांतर रेखा खींचें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0342 वह रेखा BE को बिंदु A पर प्रतिच्छेदित करती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0344 त्वरण (a) = पिंड का अंतिम वेग/समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0346 Err:508 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0348 #NAME? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0350 BC ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0354 ∴ CD = at …… (i) (OC - OD = CD) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0356 आलेख के अनुसार.... BE = BA + AE ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0358 ∴ v = CD + OD ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0360 ...(AB = CD और AE = OD) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0362 ∴ v = at + u ............(i से) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0364 ∴ v = u + at यह गति संबंधी पहला नियम है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0366 आकृति 1.9 वेग - समय आलेख ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0368 विस्थापन - समय संबंध का समीकरण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0370 माना किसी पिंड ने एकसमान त्वरण 'a' के अनुसार समय 't' मे दूरी 's' तय की है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0371 आकृति 1.9 के आलेख के अनुसार वस्तु द्वारा तय की गई दूरी चतुर्भुज DOEB के क्षेत्रफल द्वारा ज्ञात की जा सकती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0373 ∴ s = चतुर्भुज DOEB का क्षेत्रफल ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0377 ∴ s = (AE × OE ) + (1/2 × [AB × DA]) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0381 परंतु AE = u, OE = t और (OE = DA = t) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0383 AB = at ---( AB = CD ) --- (i) से ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0385 ∴ s = u×t+1/2×at×t ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0387 ∴ गति संबंधी दूसरा समीकरण s = ut + 1/2 at^2 है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0389 विस्थापन - वेग संबंध का समीकरण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0391 आकृति 1.9 के आलेख से, पिंड द्वारा तय की गई दूरी चतुर्भुज DOEB के क्षेत्रफल द्वारा ज्ञात की जा सकती है, यह हम देख चुके हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0392 चूँकि चतुर्भुज DOEB एक समलंब चतुर्भुज है अतः समलंब चतुर्भुज के सूत्र का उपयोग करके हम पिंड द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कर सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0394 ∴ s = समलंब चतुर्भुज DOEB का क्षेत्रफल ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0396 ∴ s = 1/2 × समांतर भुजाओं की लंबाइयों का योगफल × समांतर भुजाओं के बीच की लंब दूरी ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0398 ∴ s = 1/2 × (OD + BE ) × OE परंतु , OD = u, BE = v और OE = t ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0400 ∴ s = 1/2 × ( u + v) × t ------ (ii) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0402 परंतु, a = (v-u)/t ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0404 ∴ t = (v-u)/a ------------(iii) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0406 ∴ s = 1/2 (u + v) × (v-u)/a ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0408 ∴ s = (v+u) ( v-u)/2a ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0410 ∴ 2 as = (v+u) ( v-u) = v^2-u^2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0412 ∴ v^2 = u^2 + 2as ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0414 यह गति संंबंधी तीसरा समीकरण है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0418 जिस समय पिंड त्वरित होता है उस समय उसका वेग परिवर्तित होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0419 वेग में होने वाला परिवर्तन वेग के परिमाण या दिशा या दोनों ही परिवर्तित होने के कारण होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0421 एकसमान वृत्ताकार गति (Uniform Circular Motion) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0425 घड़ी के सेकंड के काँटे की नोंक का अवलोकन कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0426 उसके चाल और वेग के बारे में क्या कहा जा सकता है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0428 घड़ी के काँटे की नोंक की चाल स्थिर रहती है परंतु उसके विस्थापन की दिशा निरंतर बदलने के कारण उसका वेग निरंतर बदलता रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0429 सेकंड के काँटे की नोंक के वृत्ताकार पथ पर घूमने के कारण इस गति को एकसमान वृत्ताकार गति कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0430 इस प्रकार की गति के अन्य कौन-से उदाहरण आप बता सकते हैं? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0436 1. आकृति 1.10 में दिखाए अनुसार एक वर्गाकार पथ बनाइए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0438 2. उस वर्गाकार पथ पर एक भुजा के मध्यभाग के एक बिंदु पर पेंसिल रखकर एक चक्कर पूर्ण कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0440 3. एक चक्कर पूर्ण करते समय आपको कितनी बार दिशा बदलनी पड़ी, उसे नोट कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0442 4. अब यही कृति पंचभुज, षटभुज, अष्टभुज पथ पर कीजिए और आपको कितनी बार दिशा बदलनी पड़ी, उसे नोट करें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0444 5. यदि भुजाओं की संख्या बढ़ाते हुए उसे असंख्य किया जाए तो कितनी बार दिशा बदलनी पड़ेगी और पथ का आकार कौन-सा होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0445 अर्थात भुजाओं की संख्या बढ़ाते जाएँ तो बार-बार दिशा बदलनी पड़ती है और भुजाओं की संख्या बढ़ाते हुए उसे असंख्य करने पर पथ वृत्ताकार होगा। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0447 जब पिंड स्थिर चाल से वृत्ताकार पथ पर गतिशील होता है तब वेग में होने वाला परिवर्तन केवल गति की दिशा बदलने से होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0448 इस कारण वह त्वरित वेग होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0449 जब कोई पिंड एकसमान चाल से वृत्ताकार पथ पर जाता है तब उस गति को एकसमान वृत्ताकार गति कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0450 उदाहरणार्थ, एकसमान चाल घुमनेवाला गुलेल के पत्थर की गति, साइकिल के पहिए के किसी भी बिंदु की गति। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0452 आकृति 1.10 दिशा में परिवर्तन ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0456 दैनिक जीवन में वृत्ताकार गति से गतिशील होने वाले उदाहरणों को खोजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0458 वृत्ताकार गति में गतिशील पिंड t समय के पश्चात अपने मूल स्थान पर पुनः आता है तो पिंड की चाल निम्नलिखित सूत्र की सहायता से ज्ञात की जा सकती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0460 चाल = परिधि/समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0462 v= 2pr/t, r = वृृत्त की त्रिज्या ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0464 एकसमान वृत्ताकार वेग की दिशा ज्ञात करना ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0468 एक गोल घूमने वाली चकती लो। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0469 उसके किनारे पर पाँच रुपए का एक सिक्का रखें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0471 आकृति 1.11 में दर्शाए अनुसार चकती को गोल घुमाएँ। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0472 चकती को अधिक वेग से घुमाने पर, अवलोकन करें कि सिक्का कौन-सी दिशा में फेंका जाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0473 चकती पर सिक्का विभिन्न स्थानों पर रखकर इस कृति को पुनः-पुनः करें और निरीक्षण करें कि प्रत्येक बार सिक्का कौन-सी दिशा में फेंका जाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0475 आकृति 1.11 चकती के ऊपर का सिक्का ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0479 सिक्का वृत्ताकार चकती की त्रिज्या के लंबवत रहने वाली स्पर्श रेखा की दिशा में जाएगा। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0480 सिक्का फेंके जाते समय जिस स्थिति में होगा उसके अनुसार वह विशेष दिशा में फेंका जाएगा अर्थात् सिक्का वृत्ताकार दिशा में घूमते समय गति की दिशा प्रत्येक बिंदु के पास परिवर्तित होती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0484 उदाहरण 1 : एक खिलाड़ी वृत्ताकार मार्ग पर दौड़ते समय 25 सेकंड में 400 मीटर दूरी दौड़कर पुनः प्रारंभिक स्थान पर वापस आता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0485 उसकी औसत चाल और औसत वेग कितना होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0487 दत्त : तय की गई कुल दूरी = 400 मी. ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0489 कुल विस्थापन = 0 मीटर (उसके पुनः प्रारंभिक स्थान पर आने के कारण) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0491 लगा हुआ कुल समय = 25 सेकंड ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0493 औसत चाल = ?, औसत वेग = ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0495 औसत चाल = तय की गई कुल दूरी/लगा हुआ कुल समय = 400/25 = 16 मीटर/सेकंड ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0497 औसत वेग = कुल विस्थापन/लगा हुआ कुल समय = 0/ 25 = 0 मीटर/सेकंड ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0499 उदाहरण 2 : एक हवाई जहाज 3.2 m/s^2 के त्वरण से 30 सेकंड धावन पथ पर दौड़ने के बाद हवा में उड़ता है तो हवाई जहाज ने उड़ने के पहले कितनी दूरी तय की? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0501 दत्त : a = 3.2 m/s^2, t = 30 सेकंड, u = o , s = ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0503 s = ut + at^2 = 0 × 30 + 1/2 × 3.2 × 30^2 = 1440 m. ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0505 उदाहरण 3 : एक कंगारू की क्षितिज के लंब दिशा में 2.5 m ऊँची छलाँग मारने की क्षमता होने पर उस कंगारू की हवा में छलाँग मारने की चाल कितनी होगी? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0507 दत्त : a = 9.8 m/s^2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0509 s = 2.5 m ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0511 v = 0 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0513 u = ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0515 v^2= u^2 + 2as ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0517 (0)^2 = u^2 + 2 × (-9.8) (2.5) त्वरण वेग की ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0519 विपरीत दिशा में होने के कारण ॠण चिह्‌न का उपयोग किया है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0521 0 = u^2 - 49 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0523 u^2 = 49 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0525 u = 7 m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0527 उदाहरण 4 : एक मोटरबोट विरामावस्था से निकलकर एकसमान त्वरण से जाती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0528 यदि वह 5 सेकंड में 15 मीटर/सेकंड का वेग प्राप्त करती है तो निर्मित त्वरण और दिए गए समय में तय की गई दूरी कितनी होगी? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0532 प्रारंभिक वेग (u) = 0 मीटर/सेकंड, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0534 अंतिम वेग (v) = 15 मीटर/सेकंड, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0536 कुल समय (t) = 5 सेकंड ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0538 त्वरण = ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0540 गति संबंधी पहले समीकरण से त्वरण, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0542 त्वरण = v-u/t = 15-0/5 = 3 मीटर/सेकंड ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0546 गति संबंधी दूसरे समीकरण से, तय की गई दूरी ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0550 s = 0 × 5 + 1/2 3 × 5^2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0554 न्यूटन के गति संबंधी नियम (Newton's Laws of Motion) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0556 ऐसा क्यों होता होगा? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0558 1. स्थिर अवस्था वाली कोई वस्तु बल लगाए बिना जगह से हिलती नहीं है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0560 2. टेबल पर रखी पुस्तक उठाने के लिए आवश्यक पर्याप्त बल द्वारा टेबल उठाया नहीं जाता। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0562 3. टहनी हिलाने पर वृक्ष से फल नीचे गिरते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0564 4. विद्‌युत द्वारा घूमने वाला पंखा बंद करने पर भी पूर्ण रूप से रुकने के पहले वह कुछ समय तक घूमता रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0566 उपर्युक्त घटनाओं के कारणों को खोजने पर हमें यह स्पष्ट होता है किपिंड में जड़त्व होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0567 पिंड का जड़त्व पिंड के द्रव्यमान से संबंधित होता है, यह आपने सीखा है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0568 न्यूटन के गति संबंधी पहले नियम में पदार्थ के इसी गुणधर्म का वर्णन किया गया है इसलिए उसे 'जड़त्व का नियम' भी कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0570 न्यूटन का गति संबंधी पहला नियम (Newton's first Law of Motion) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0574 एक गिलास में बालू भर लीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0575 उस गिलास पर एक गत्ता रखिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0576 गत्ते पर पाँच रुपए का एक सिक्का रखिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0577 अब गत्ते को ऊँगली द्वारा थपकी मारें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0578 क्या होता है उसका अवलोकन करें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0580 संतुलित और असंतुलित बल (Balanced and Unbalanced Force) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0582 आपने रस्सी खींचने का खेल खेला होगा। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0583 जब तक दोनों ओर से प्रयुक्त बल समान होता है तब तक रस्सी का मध्यभाग स्थिर रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0584 यहाँ दोनों ओर से प्रयुक्त बल समान रहने अर्थात बल 'संतुलित' रहने के कारण बल प्रयुक्त करने पर भी रस्सी का मध्यभाग स्थिर रहता है परंतु जब एक सिरे द्वारा प्रयुक्त बल बढ़ता है, उस समय प्रयुक्त बल 'असंतुलित' हो जाते हैं और परिणामी बल अधिक बल के सिर की ओर प्रयुक्त होता है और रस्सी का मध्य उस दिशा में सरकता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0586 'यदि किसी पिंड पर कोई भी बाह्‍य असंतुलित बल कार्यरत नहीं होता तो उसकी विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एक समान गति में सातत्य रहता है।' ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0588 कोई पिंड विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में होता है तब उस पर किसी भी प्रकार का बल कार्यरत नहीं होता ऐसा नहीं है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0589 वास्तविक रूप से उस पिंड पर विभिन्न बाह्‍य बल कार्यरत होते हैं परंतु उनके एक-दूसरे को निष्फल करने के कारण कुल परिणामी बल शून्य होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0590 न्यूटन के पहले नियम द्वारा जड़त्व का अर्थात पिंड की गति संबंधी अवस्था अपने आप परिवर्तित न होने का स्पष्टीकरण दिया जाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0591 इसी प्रकार पिंड की विरामावस्था या पिंड की सरलरेखा में एकसमान गति में परिवर्तन करने वाले या परिवर्तन के लिए उद्यत करने वाले असंतुलित बल का स्पष्टीकरण दिया जाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0593 जड़त्व संबंधी सब उदाहरण न्यूटन के गति संबंधी पहले नियम के उदाहरण हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0597 न्यूटन का गति संबंधी दूसरा नियम (Newton's second Law of Motion) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0601 अ. 1. अपने मित्र को समान आकार की प्लास्टिक और रबड़ की गेंदे ऊँचाई से नीचे डालने के लिए कहें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0603 2. आप गेंदों को पकड़ें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0604 आप कौन-सी गेंद सरलता से पकड़ सकते हैं? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0607 आ. 1. आपके मित्र को एक गेंद धीरे से फेंकने के लिए कहें और आप उसे पकड़ने का प्रयत्न करें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0609 2. अब उसी गेंद को आप अपने मित्र को जोर से फेंकने के लिए कहें और आप उसे पकड़ने का प्रयत्न करें। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0610 किस समय आप गेंद सरलता से पकड़ सके? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0613 एक पिंड द्वारा दूसरे पिंड पर किए गए आघात (टक्कर) का परिणाम उस पिंड के द्रव्यमान और उसके वेग दोनों पर निर्भर करता है अर्थात् बल का परिणाम प्राप्त करने के लिए पिंड के द्रव्यमान और वेग को एकत्र जोड़ने वाला गुणधर्म कारणीभूत है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0614 इस गुणधर्म को न्यूटन ने 'संवेग' द्वारा संबोधित किया। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0616 संवेग में परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0617 संवेग की दिशा वेग की दिशा में होती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0618 SI प्रणाली के अनुसार संवेग की इकाई kg m/s और CGS प्रणाली में gm cm/s है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0620 जब पिंड पर प्रयुक्त किया गया असंतुलित बल वेग में परिवर्तन करता है तो वही बल संवेग में भी परिवर्तन करता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0621 पिंड के संवेग में परिवर्तन लाने के लिए आवश्यक बल संवेग परिवर्तन की दर पर निर्भर करता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0623 संवेग (Momentum) (P) : पिंड के वेग और द्रव्यमान के गुणनफल को संवेग कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0625 P = mv संवेग एक सदिश राशि है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0627 'संवेग परिवर्तन की दर प्रयुक्त बल के समानुपाती होती है और संवेग का परिवर्तन बल की दिशा में होता है।' ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0629 माना, द्रव्यमान, m का एक पिंड प्रारंभिक वेग 'u' से जाते समय उसके गति की दिशा में बल F प्रयुक्त करने से समय t के पश्चात पिंड का वेग V हो जाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0631 ∴ पिंड का प्रारंभिक संवेग = mu , ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0633 समय t के पश्चात पिंड का अंतिम वेग = mv ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0635 ∴ संवेग परिवर्तन की दर = संवेग में होने वाला परिवर्तन/समय ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0637 ∴ संवेग परिवर्तन की दर = mv- mu/t = m( v- u)/t = ma ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0639 न्यूटन के गति संबंधी दूसरे नियम के अनुसार, संवेग परिवर्तन की दर प्रयुक्त बल के समानुपाती होती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0641 ∴ ma ∝ F ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0643 ∴ F = kma (k = एक स्थिरांक है उसका मान 1 है।) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0645 F = m×a ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0649 दो विभिन्न द्रव्यमानों तथा प्रारंभ में विरामावस्था में स्थित दो पिंडों का विचार कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0650 दोनों का प्रारंभिक संगेव शून्य होगा। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0651 माना, दोनों पिंडों पर विशेष समयावधि (t) के लिए निश्चित बल (F) प्रयुक्त किया। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0652 हल्का पिंड भारी पिंड की तुलना में अधिक वेग से जाने लगेगा परंतु उपर्युक्त सूत्र से स्पष्ट होता है कि, दोनों पिंडों की संवेग परिवर्तन की दर लेकिन समान है अर्थात F होगी और उनमें होने वाला परिवर्तन भी (Ft) समान होगा। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0653 अतः विभिन्न पिंडों पर समान समयावधि में समान बल प्रयुक्त करने पर संवेग में परिवर्तन समान होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0655 SI प्रणाली में बल की इकाई न्यूटन है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0657 न्यूटन (N) : 1 kg द्रव्यमान में 1 m/s^2 का त्वरण उत्पन्न करने वाले बल को 1 बल न्यूटन कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0659 1 N = 1 kg × 1 m/s^2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0661 CGS प्रणाली में बल की इकाई डाइन है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0663 डाइन (dyne) : 1 g द्रव्यमान में 1 cm/s^2 का त्वरण उत्पन्न करने वाले बल को 1 डाइन कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0665 1 dyne = 1 g × 1 cm/s^2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0669 ऊँची छलाँग मारने वाले मैदानी खेलों में खिलाड़ी जमीन पर बालू की मोटी परत पर गिरे, ऐसी व्यवस्था क्यों की जाती है? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0671 न्यूटन का गति संबंधी तीसरा नियम (Newton's third law of Motion) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0675 1. पीछे की ओर छिद्र वाली प्लास्टिक की एक नाव लीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0677 2. एक गुब्बारे में हवा भरकर उसे नाव के छिद्र पर लगाओ और नाव को पानी में छोड़िए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0679 जैसे जैसे गुब्बारे की हवा बाहर निकलेगी वैसे-वैसे नाव पर क्या प्रभाव होता है और क्यों? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0681 न्यूटन के गति संबंधी पहले दो नियमों से बल और बल के परिणाम की जानकारी मिलती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0683 'परंतु प्रकृति में बल अकेला हो ही नहीं सकता' बल दो पिंडों के बीच की अन्योन्य क्रिया है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0684 बल हमेशा जोड़ी द्वारा ही प्रयुक्त होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0685 जब एक पिंड दूसरे पिंड पर बल प्रयुक्त करता है उसी समय दूसरा पिंड भी पहले पिंड पर बल प्रयुक्त करता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0686 दो पिंडों के बीच के बल हमेशा समान और विपरीत होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0687 यह संकल्पना न्यूटन के गति संबंधी तीसरे नियम में प्रतिपादित की गई है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0688 पहले पिंड द्वारा दूसरे पिंड पर प्रयुक्त किए गए बल को प्रतिक्रिया बल कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0690 'प्रत्येक क्रिया बल के लिए समान परिमाण वाले और उसी समय प्रयुक्त होने वाले प्रतिक्रिया बल का अस्तित्व होता है और उनकी दिशा परस्पर विपरीत होती है।' ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0692 1. क्रिया और प्रतिक्रिया ये बल को स्पष्ट करने वाली बातें हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0694 2. ये बल जोड़ी द्वारा ही प्रयुक्त होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0695 बल स्वतंत्र रूप से कभी भी अस्तित्व में नहीं रहता। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0697 3. क्रिया बल और प्रतिक्रिया बल एक ही समय कार्यरत होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0699 4. क्रिया और प्रतिक्रिया बल विभिन्न पिंडों पर प्रयुक्त होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0700 वे एक ही पिंड पर प्रयुक्त नहीं होते। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0701 इस कारण ये बल एक-दूसरे का प्रभाव नष्ट नहीं कर सकते। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0705 1. बल्ले द्वारा गेंद को मारते समय बल्ले की गति का कम होना। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0707 2. बंदूक से गोली दागते समय बंदूक का पीछे सरकना। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0709 3. अग्निबाण (रॉकेट) का प्रक्षेपण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0711 इन उदाहरणों का स्पष्टीकरण न्यूटन के तीसरे नियम के आधार पर कैसे करोगे? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0715 संवेग की अविनाशिता का नियम (Law of Conservation of Momentum) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0717 माना पिंड, A का द्रव्यमान m_1 तथा उसका प्रारंभिक वेग u_1 है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0718 इसी प्रकार पिंड B का द्रव्यमान m_2 तथा उसका प्रारंभिक वेग u_2 है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0720 संवेग के सूत्र के अनुसार पिंड A का प्रारंभिक संवेग = m_1u_1 और B का प्रारंभिक संवेग = m_2u_2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0722 जिस समय दोनों पिंडों की परस्पर टक्कर होती है उस समय पिंड A पर पिंड B के कारण बल F_1 प्रयुक्त होकर पिंड A त्वरित होता है और उसका वेग v_1 हो जाता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0724 ∴ पिंड A का टक्कर के पश्चात संवेग = m_1v_1 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0726 न्यूटन के गति संबंधी तीसरे नियम के अनुसार पिंड A भी पिंड B पर समान बल विपरीत दिशा में प्रयुक्त करता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0727 उस समय उसके संवेग में परिवर्तन होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0728 माना उसका वेग v_2 हो जाता है तो ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0730 तो पिंड B का टक्कर के पश्चात संवेग = m_2v_2 यदि पिंड B पर बल F_2 प्रयुक्त होता है, तो ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0732 F_2 = - F_1 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0734 ∴ m_2a_2 = -m_1_a1 ………… ∴ F = ma ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0736 ∴ m_2 (v-u)/t = -m_1 × (v_1-u_1)……… ∴ a= (v_2-u_2)/t ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0738 ∴ m_2 (v_2 - u_2 ) = - m_1 (v_1-u_1) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0740 ∴ m_2v_2 - m_2u_2 = - m_1v_1 + m_1u_1 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0742 ∴ (m_2v_2 + m_1v_1 ) = (m_1u_1 + m_2u_2) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0744 कुल अंतिम संवेग का परिमाण = कुल प्रारंभिक संवेग का परिमाण ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0746 अतः यदि दो पिंडों पर बाह्‍य बल कार्यरत न हो तो उनका प्रारंभिक संवेग और अंतिम संवेग समान होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0747 पिंडों की संख्या कितनी भी होगी तब भी यह कथन सत्य है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0749 'दो पिंडों की अन्योन्य क्रिया होते समय यदि उनपर कोई बाह्‍य बल कार्यरत न हो तो उनका कुल संवेग स्थिर रहता है, वह बदलता नहीं है।' ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0751 यह न्यूटन के गति संबंधी तीसरे नियम का उपसिद्धांत है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0752 टक्कर होने के पश्चात भी संवेग स्थिर रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0753 टक्कर होने वाले पिंडों में संवेग पुनर्वितरित होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0754 एक पिंड का संवेग कम होता है तो दूसरे पिंड का संवेग बढ़ता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0755 इसलिए सिद्धांत निम्नानुसार भी प्रतिपादित कर सकते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0757 यदि दो पिंडों की टक्कर होती है तो उनका टक्कर के पूर्व का कुल संवेग उनके टक्कर के पश्चात के कुल संवेग के बराबर होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0759 यह सिद्धांत समझने के लिए बंदूक से दागी गई गोली के उदाहरण पर विचार करते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0760 जब द्रव्यमान m_1 की गोली द्रव्यमान m_2 की बंदूक से दागी जाती है, तब वेग से आगे जाते समय उसका संवेग m_1v_1 होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0761 गोली दागने के पूर्व बंदूक और गोली स्थिर रहने के कारण प्रारंभिक संवेग शून्य होता है और कुल संवेग शून्य होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0762 गोली दागने के पश्चात भी उपर्युक्त नियमानुसार कुल संवेग शून्य होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0763 अतः गोली आगे जाने के कारण बंदूक पीछे की दिशा में सरकती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0764 इस सरकने को 'प्रतिक्षेप' (Recoil) कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0766 बंदूक प्रतिक्षेप वेग से (v_2) ऐसी पद्धति से सरकती है कि, ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0768 m_1v_1 + m_2v_2 = 0 या v2 = - m_1/m_2 × v_1 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0772 बंदूक का द्रव्यमान गोली के द्रव्यमान की तुलना में बहुत अधिक होने के कारण बंदूक का वेग गोली के वेग की तुलना में बहुत कम होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0773 बंदूक के संवेग और गोली के संवेग के परिमाण समान और दिशा विपरीत होती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0774 इस कारण संवेग स्थिर रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0775 अग्निबाण (रॉकेट) के प्रक्षेपण में भी संवेग स्थिर रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0779 उदाहरण 1 : एक तोप का द्रव्यमान 500 kg है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0780 उससे गोला दागने के पश्चात तोप 0.25 m/s वेग से प्रतिक्षेपित होती है तो तोप का संवेग ज्ञात कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0782 दत्त : तोप का द्रव्यमान = 500 kg, प्रतिक्षेप वेग = 0.25 m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0784 संवेग = ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0786 संवेग = m × v = 500 × 0.25 = 125 kg m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0788 उदाहरण 2 : गेंदों के द्रव्यमान क्रमशः 50 ग्राम और 100 ग्राम हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0789 वे एक ही रेखा पर एक ही दिशा में 3 m/s और 1.5 m/s के वेग से जा रही हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0790 उनकी टक्कर होती है और टक्कर होने के पश्चात पहली गेंद 2.5 m/s के वेग से गतिशील होती है तो दूसरी गेंद का वेग ज्ञात कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0794 पहली गेंद का द्रव्यमान = m_1 = 50 g = 0.05 kg ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0796 दूसरी गेंद का द्रव्यमान = m_2 = 100 g = 0.1 kg ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0798 पहली गेंद का प्रारंभिक वेग = u_1 = 3 m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0800 दूसरी गेंद का प्रारंभिक वेग = u_2 = 1.5 m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0802 पहली गेंद का अंतिम वेग = v_1 = 2.5 m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0804 दूसरी गेंद का अंतिम वेग = v_2 = ? ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0806 संवेग की अविनाशिता के सिद्धांत के अनुसार, प्रारंभिक कुल संवेग = अंतिम कुल संवेग ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0808 m_1u_1 + m_2u_2 = m_1v_1 + m_2v_2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0810 (0.05 × 3) + (0.1 × 1.5) = (0.05 × 2.5) + (0.1 × v_2) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0812 ∴ (0.15) + (0.15) = 0.125 + 0.1v_2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0814 ∴ 0.3 = 0.125 + 0.1 v_2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0816 ∴ 0.1v_2 = 0.3 - 0.125 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0818 ∴ v2 = 0.175/0.1 = 1.75 m/s ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0822 1. नीचे दी गई तालिका के पहले स्तंभ को दूसरे और तीसरे स्तंभ से जोड़िए और नई सारिणी तैयार कीजिए : ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0824 क्र. | स्तंभ-1 | स्तंभ-2 | स्तंभ-3 | ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0826 1 | ॠण त्वरण | पिंड का वेग स्थिर रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0827 | एक कार शुरुआत में विरामावस्था के बाद 50 किमी/घंटा वेग 10 सेकंड में प्राप्त करती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0829 2 | धन त्वरण | पिंड का वेग कम होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0830 | एक वाहन 25 मी/सेकंड के वेग से गतिशील है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0832 3 | शून्य त्वरण | वस्तु का वेग बढ़ता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0833 | एक वाहन 10 मी/सेकंड के वेग से जाकर 5 सेकंड के बाद रुकता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0835 2. अंतर स्पष्ट कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0837 अ) दूरी और विस्थापन ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0839 आ) एकसमान गति और असमान गति ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0843 3. नीचे दी गई सारिणी पूर्ण कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0845 u(m/s) | a(m/s^2) | t(sec) | v = u + at (m/s) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0847 2 | 4 | 3 | - ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0849 - | 5 | 2 | 20 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0851 u(m/s) | a(m/s^2) | t(sec) | s = ut + 1/2 at^2 (m) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0853 5 | 12 | 3 | - ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0855 7 | - | 4 | 92 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0857 u (m/s) | a(m/s^2) | s(m) | v^2 = u^2 + 2as (m/s)^2 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0859 4 | 3 | - | 8 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0861 - | 5 | 8.4 | 10 ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0863 4. रिक्त स्थानों की पूर्ति करके वाक्यों को पूर्ण करें और उनका स्पष्टीकरण लिखिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0865 अ. पिंड की गति के प्रारंभ और अंतबिंदु के बीच की कम-से-कम दूरी को पिंड का ........ कहते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0867 आ. अवत्वरण अर्थात ................ त्वरण है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0869 इ. जब पिंड एकसमान वृत्ताकार गति से जाता है तब उसका ............. प्रत्येक बिंदु के पास बदलता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0871 ई. टक्कर होते समय ........ हमेशा अक्षय रहता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0873 ए. अग्निबाण (रॉकेट) का कार्य न्यूटन के ............ नियम पर आधारित है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0877 अ. जब कोई पिंड मुक्त रूप से जमीन पर गिरता है तब गति का त्वरण एकसमान होता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0879 आ. क्रिया बल और प्रतिक्रिया बल के परिमाण समान और दिशा विपरीत होने पर भी वे एक-दूसरे को निष्फल नहीं करते। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0881 इ. समान वेग वाली गेंदों में से क्रिकेट की गेंद को रोकने की अपेक्षा टेनिस की गेंद को रोकना सरल होता हैै। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0883 ई. विरामावस्था के पिंड की गति एकसमान मानी जाती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0885 6. न्यूटन के गति संबंधी प्रत्येक नियम पर आधारित 5 उदाहरण देकर उनका स्पष्टीकरण लिखिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0887 7. उदाहरण हल कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0889 अ. एक पिंड प्रारंभ के 3 सेकंड में 18 मीटर और बाद के 3 सेकंड में 22 मीटर जाता है तथा अंतिम 3 सेकंड में 14 मीटर जाता है तो उनकी औसत चाल ज्ञात कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0890 (उत्तर : 6 m/s) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0892 आ. एक पिंड का द्रव्यमान 16 kg है तथा वह 3 m/s^2 के त्वरण से गतिशील है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0893 उस पर प्रयुक्त बल की गणना कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0894 उतना ही बल 24 kg द्रव्यमान के पिंड पर प्रयुक्त करने पर निर्मित होने वाला त्वरण कितना होगा? (उत्तर : 48 N, 2 m/s^2) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0896 इ. बंदूक की एक गोली का द्रव्यमान 10 g है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0897 वह 1.5 m/s के वेग से 900 g ग्राम द्रव्यमान के लकड़ी की मोटी पट्टी में घुसती है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0898 प्रारंभ में पट्टी विरामावस्था में है परंतु गोली दागने के पश्चात वह पट्टी में घुसती है और दोनों विशिष्ट वेग से गतिशील होते हैं। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0899 बंदूक की गोली के साथ लकड़ी की पट्टी जिस वेग से गतिशील होती है, उसका वेग ज्ञात कीजिए। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0900 (उत्तर : 0.15 m/s) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0902 ई. एक व्यक्ति शुरुआत में 40 सेकंड में 100 मीटर दूरी तक तैरता है। ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0903 बाद में 40 सेकंड में वह व्यक्ति 80 मीटर दूरी तय करता है और अंतिम 20 सेकंड में 45 मीटर दूरी तय करता है तो उस व्यक्ति की औसत चाल क्या होगी? (उत्तर : 2.25 m/s) ebs_phy-gati-ke-niyam-page-01-17-hin2tel_0907 न्यूटन के गति संबंधी नियमों पर आधारित दैनिक जीवन के विभिन्न उपकरणों/साधनों की जानकारी प्राप्त कीजिए।